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लाखों सालों से बर्फ में कैद ये खतरनाक वायरस छूटने वाले हैं, इनके आगे कोविड-19 कुछ भी नहीं, अब दुनिया में मचेगी तबाही!

Virus: ग्लेशियरों पर रिसर्च कर रहे वैज्ञानिकों का मानना है कि आर्कटिक में लाखों खतरनाक वायरस दबे हुए है. जैसे-जैसे जलवायु गर्म होगी. धीरे-धीरे करके ये बाहर आएंगे.

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Gyanendra Tiwari
लाखों सालों से बर्फ में कैद ये खतरनाक वायरस छूटने वाले हैं, इनके आगे कोविड-19 कुछ भी नहीं, अब दुनिया में मचेगी तबाही!

नई दिल्ली. दुनिया ने कोविड-19 जैसे महामारी का सामना किया. करोड़ों लोगों ने अपनी जान गंवाई. इस महामारी ने अनेको दर्द दिए हैं लेकिन पृथ्वी पर इससे खतरनाक वायरस मौजूद है. लाखों सालों से वो सो रहे थे. बताया जा रहा है कि इन वायरस की उत्पत्ति इंसानों से पहले हुई थी.

पृथ्वी पर ऐसे कई वायरस मौजूद हैं जो अगर बाहर आ गए तो इंसानों के जीवन में तबाही आ जाएगी. बताया जाता है कि डायनासोर की मृत्यु के बाद जब हिमयुग आया तो ये खतरनाक वायरस बर्फ में दब गए थे. इनमें से ज्यादातर वायरस आर्कटिक में दबे हैं. ग्लेशियरों पर रिसर्च कर रहे वैज्ञानिकों का मानना है कि आर्कटिक में लाखों खतरनाक वायरस दबे हुए है. धीरे-धीरे करके ये बाहर आएंगे. जैसे-जैसे जलवायु गर्म होगी. बर्फ पिघलेगी तो इनके बाहर निकलने का समय आ जाएगा. रिसर्च में ऐसी बातें कहीं गई हैं कि इंसान का शरीर इतना मजबूत नहीं है कि वह इन खतरनाक वायरस से लड़ सके. ये वायरस इंसानों को तबाह कर सकते  हैं.

वैज्ञानिक ने कही ये बात
वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में पाया है कि आर्कटिक के पर्माफ्रॉस्ट में कई घातक वायरस दबे हैं. जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी और बर्फ पिघलेगी तो यह जिंदा हो जाएंगे. दरअसल, 2015 में वैज्ञानिकों ने बर्फ की चोटियों में दबे जॉम्बी नाम के एक वायरस को जिंदा किया था, दो बर्फ में सालों पहले दब गया था. पीएलओएस कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट की मानें तो साल पुराने वायरस और आधुनिक बैक्टीरिया के  प्रभाव को डिजिटल रूप से तैयार किया गया था. इससे पता चला कि ये लाखों साल पहले ये वायरस बर्फ में दब गए थे. पृथ्वी पर कुछ ऐसी परिस्थिति बन रही है जिससे ये जिंदा हो सकते हैं.

नासा की शोध में खुलासा
आर्कटिक के क्षेत्र में पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से धरती पर कैसा प्रभाव पड़ेगा इसे समझने के लिए कई सालों से वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं. नासा भी इस पर शोध कर रहा है. उसने अपने एक शोध में पाया था कि पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से जो कार्बन रिलीज हो रहा है उससे बर्फ में लाखों सालों से कैद (दबे) वायरस आजाद हो जाएंगे.

कई वैज्ञानिकों का तो ये मानना है कि अगर ये वायरस मनुष्य तक पहुंच गए तो भारी तबाही आ सकती है. इसका एक छोटा सा उदाहरण दुनिया ने कोविड-19 के रूप में देख लिया है. बर्फ में कैद वायरस अगर जीवित होकर आते हैं तो ये इंसानों के जीवन में तबाही लाने का काम करेंगे.

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