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मॉनसून में देरी ने बढ़ाई चावल किसानों की परेशान, धान कटाई में देरी से आगे की फसलें होंगी लेट

Paddy Farmers Upset Due To Delay In Monsoon: चावल की खेती दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पर निर्भर है। बारिश में देरी का असर केला जैसे फसलों पर भी पड़ा है। अब केरल के किसान चावल के बजाय दूसरे फसलों का रुख कर रहे हैं, क्योंकि चावल की खेती घाटे का सौदा है। केरल में किसानों को बुवाई और कटाई के समय मजदूरों की कमी की परेशानी भी झेलनी पड़ रही है।

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Abhiranjan Kumar
मॉनसून में देरी ने बढ़ाई चावल किसानों की परेशान, धान कटाई में देरी से आगे की फसलें होंगी लेट

नई दिल्ली: केरल में चावल उगाने वाले किसान परेशान हैं। मॉनसून आने में देरी हो चुकी है। अब वे शायद ही अगस्त में धान की कटाई कर पाएं। धान की कटाई में देरी का मतलब है, आगे की सारी फसलों में लेतलतीफी से नुकसान झेलना।

केरल के एक किसान सिवनकुट्टी ने कहा, "पारंपरिक ज्ञान के मुताबिक जैसे-जैसे बारिश में देरी होगी, पौधों के साथ बुरा होगा। थलवेल्लम, जिसका अर्थ है ऊपर से नीचे तक गीला करना। इसलिए पौधों का विकास नहीं होता है। इसी तरह कीटों के हमले और बीमारियों की संभावना भी बढ़ जाती है। आमतौर पर हम विशु के आधार पर बीज बोते हैं। इस साल बारिश देरी से होने की वजह से बुआई में देरी हुई। हमारे यहां बारिश भी कम हुई है।"

नाडाथुरक्कल कलाथरक्कल पैडी फार्मर्स एसोसियेशन के अध्यक्ष श्रीकुमारन नायर ने कहा "हम अमूमन मार्च-अप्रैल में बीज बोते हैं और अगस्त में कटाई करते हैं। ये पहली फसल के लिए है। इस साल इसमें एक महीने की देरी होगी।" किसानों का कहना है कि चावल की अच्छी फसल और उसमें लगने वाली बीमारियों पर काबू पाने के लिए काफी पानी की जरूरत होती है।

नाडाथुरक्कल कलाथरक्कल पैडी फार्मर्स एसोसियेशन अध्यक्ष श्रीकुमारन नायर, "नय्यर बांध से पानी नहीं आ रहा था। इसलिए हमें अधिकारियों से अनुरोध करना पड़ा और खेती के लिए नय्यर बांध से पानी लेना पड़ा। अब निर्धारित फसल एक महीने बाद होगी। हमें फिर से बारिश का सामना करना पड़ेगा। अगर हम कर सकते तो चिंगम में इसकी कटाई करें, नुकसान कम होगा और उपज अधिक होगी।”

ये परेशानी सिर्फ केरल के किसानों की ही नहीं। मॉनसून में देरी का खामियाजा पूरे देश के चावल किसानों को भुगतना पड़ सकता है। चावल की खेती दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पर निर्भर है। बारिश में देरी का असर केला जैसे फसलों पर भी पड़ा है। अब केरल के किसान चावल के बजाय दूसरे फसलों का रुख कर रहे हैं, क्योंकि चावल की खेती घाटे का सौदा है। केरल में किसानों को बुवाई और कटाई के समय मजदूरों की कमी की परेशानी भी झेलनी पड़ रही है।