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'15 दिन के अंदर सर्वे, 7 दिन में करना होगा क्लेम सेटलमेंट', IRDAI ने बीमाधारकों के हित में लिए कई अहम फैसले

अब बीमा कंपनियां दस्तावेज ना होने होने पर क्लेम का दावा रद्द नहीं कर सकेंगी. इसके अलावा बीमा कंपनियों को वाहनों का बीमा कराने वाले ग्राहकों को एक फिक्स प्रीमियम वाली बीमा पॉलिसी के बजाय उनकी जरूरत के हिसाब से पॉलिसी का विकल्प देना होगा ताकि उनका खर्चा कम हो. इसके अलावा IRDAI ने और भी कई अहम बदलाव किये हैं.

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IRDAI New Claim Settlement Rules
Courtesy: social media

IRDAI New Claim Settlement Rules: भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा धारकों के हित में कई नए नियम लागू किए हैं. इन नए नियमों का आपकी सामान्य बीमा पॉलिसियों जैसे मोटर, हेल्थ और होम इंश्योरेंस पर सीधा प्रभाव पड़े. नये नियमों को लागू करने का उद्देश्य बीमा पॉलिसियों को और ज्यादा प्रभावी और ग्राहकों के हित में बनाना है. IRDAI ने जो नए बदलाव किये हैं उनमें जल्द क्लेम सेटलमेंट, आकर्षक बीमा उत्पाद और बीमा धारकों के ऊपर से बोझ कम करना शामिल है.

'फ्लेक्सिबल पॉलिसी ड्यूरेशंस' महत्वपूर्ण बदलाव

IRDAI द्वारा किए गए बदलावों में 'फ्लेक्सिबल पॉलिसी ड्यूरेशंस' एक महत्वपूर्ण और गौर करने योग्य बदलाव है. अब ग्राहक अपनी सुविधा के अनुसार एक साल से कम, एक साल  और एक साल से ज्यादा समय तक का बीमा ले सकेंगे.

7 दिन के अंदर करना होगा क्लेम सेटलमेंट
बीमा का पैसा पाने के लिए अब आपको महीनों तक बीमा कंपनी के चक्कर नहीं लगाने होंगे. ग्राहक द्वारा क्लेम सेटलमेंट का दावा करते ही सर्वेक्षकों को 15 दिन के भीत अंदर अपनी रिपोर्ट कंपनी को सौंपनी होगी. सर्वे की रिपोर्ट मिलते ही कंपनी को 7 दिन के भीतर क्लेम सेटलमेंट करना होगा.

दस्तावेज न होने पर रिजेक्ट नहीं होगा क्लेम
आवेदक के पूरे दस्तावेज ना होने की स्थिति में भी क्लेम का दावा रद्द नहीं किया जा सकेगा क्योंकि सभी जरूरी दस्तावेज कंपनी को बीमा के दौरान ही जमा कराने होंगे. क्लेम सेटलमेंट के दौरान ग्राहकों को केवल क्लेम के जुड़े जरूरी दस्तावेज देने होंगे.

वहीं अगर वाहन का इंश्योरेंस कराए हुइ किसी शख्स के साथ कोई दुर्घटना होती है तो उसे क्लेम लेने के लिए खुद से जानकारी जुटाने की जरूरत नहीं होगी. सारी जानकारी बीमाकर्ता को जुटानी होगी और बिना असुविधा के बीमाधारक को क्लेम देना होगा.

क्लेम सेटलमेंट में देरी हुई तो खैर नहीं

IRDAI  ने यह भी कहा कि अगर क्लेम सेटलमेंट में किसी प्रकार की देरी होती है तो यह नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और इसके लिए बीमाकर्ता दंड का पात्र होगा.

IRDAI ने यह भी कहा कि वाहन का बीमा लेने वाले लोगों को फिक्स प्रीमियम का बीमा देने के बजाय उसकी जरूरत के हिसाब से विकल्प देने होंगे ताकि उसे पैसे की वचत हो.