Cancer Treatment :  इलाज के बाद दोबारा नहीं होगा कैंसर, बस खानी पड़ेगी ये टैबलेट

Cancer Treatment : अक्सर देखा गया है कि कैंसर इलाज के बाद फिर से शरीर में फैल जाता है. इसके समाधान के लिए टाटा संस्थान के डॉक्टर्स ने एक टैबेलेट की खोज कर ली है, जो कैंसर को दोबारा होने से रोक सकती है. 

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Cancer Treatment : अधिकतक देखा गया है कि कैंसर इलाज के बाद दोबारा शरीर में फैलने लगता है. इसको रोकने के लिए टाटा अस्पताल के डॉक्टर्स ने शोध करने के बाद एक इलाज खोजा है. 

 खारघर में स्थित टाटा अस्पताल के एडवांस सेंटर फॉर ट्रीटमेंट रिसर्च एंड एजुकेशन इन कैंसर (एक्ट्रेक) अस्पताल के डॉ. इंद्रनील मिश्रा ने नेतृत्व में 10 साल तक एक शोध किया गया. इसके बाद एक ऐसी टैबलेट की खोज की गई, जो इलाज के बाद कैंसर को दोबारा नहीं होने देती है. 

चूहों पर हुआ है शोध

डॉ. इंद्रनील मित्रा ने बताया कि यह शोध अभी चूहों पर किया गया है. इसके लिए चूहों में मनुष्यों के कैंसर सेल डाले गए. इसके बाद उनमें ट्यूमर का निर्माण हुआ. इसको ठीक करने के लिए उन्हें रेडिएशन, कीमो थेरेपी दी गई. इसके साथ ही सर्जरी से उनका इलाज किया गया. 


ऐसे होता है दोबारा कैंसर

शोध में देखा गया कि जो कैंसर सेल्स नष्ट हो गई थीं. वे कई टुकड़ों में टूट गई. इन टुकड़ों को क्रोमैटिन कहा जाता है. ये क्रोमैटिन खून के साथ शरीर के अन्य भागों में जाते हैं. इसके साथ ही ये जिन भी स्वस्थ कोशिकाओं में प्रवेश करते हैं, उन्हें भी कैंसरग्रस्त बना देते हैं. इसके साथ ही ये क्रोमैटिन  कण (cfChPs) हेल्दी सेल्स के साथ मिलकर ट्यूमर का निर्माण कर देते हैं. 

दी गईं ये टैबलेट्स

इस समस्या के समाधान के लिए डॉक्टर्स ने चूहों को रेसवेरेट्रॉल और कॉपर (तांबा) को मिलाकर प्रो-ऑक्सिडेंट टैबलेट दी. यह टैबलेट ने क्रोमोजोन को बेअसर कर दिया. 

एक दशक से कर रहे हैं शोध

करीब एक दशक से डॉक्टर्स इस पर शोध कर रहे हैं. अब इस टैबलेट को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया से मंजूरी का वेट किया जा रहा है. वहीं, टाटा मेमोरियल के पूर्व निदेशक डॉ. राजेंद्र बडवे ने बताया कि कैंसर के इलाज को बेहतर बनाने के लिए अभी और शोध की आवश्यकता है. 

घरेलू नुस्खा है कॉपर-रेसवेरेट्रॉल

टाटा मेमोरियल सेंटर के उपनिदेशक सेंटर फॉर कैंसर एपिडीमिलॉजी डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने बताया कि कॉपर रेसटवेरेट्रॉल एक घरेलु नुस्खा है. यह कैंसर के इलाज के दौरान होने वाले दुष्परिणामों को भी कम करता है. यह अंगूर, बेरीज आदि के छिलकों से मिलता है. 

कैंसर के इलाज से होने वाले साइड इफेक्ट को करता है कम

1- डॉक्टर्स के मुताबिक कैंसर के इलाज के दौरान मरीज के मुंह में छाले पड़ जाती हैं. ऐसे में ये टैबलेट इस साइड इफेक्ट को रोकन में मदद करेगी. 

2- यह टैबलेट मुंह के कैंसर की तीव्रता को भी कम करने में मदद करती है. 

3- पेट के कैंसर के इलाज के दौरान हाथ और पांव की स्किन छूटने वाले साइड इफेक्ट को भी यह दवाई कम करती है. 

4- ब्रेन ट्यूमर के इलाज में भी यह दवाई काफी असरदार है.