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इस मार्मिक वजह के कारण भगवान भोलेनाथ के इस मंदिर में हर साल 15 अगस्त को फहराया जाता है तिरंगा

भारत के झारखंड में एक ऐसा मंदिर भी है जहां पर 15 अगस्त और 26 जनवरी पर भगवान के ध्वज के साथ तिरंगा फहराया जाता है. इसकी वजह काफी मार्मिक है.

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Mohit Tiwari
इस मार्मिक वजह के कारण भगवान भोलेनाथ के इस मंदिर में हर साल 15 अगस्त को फहराया जाता है तिरंगा

नई दिल्ली. भारत देश 15 अगस्त 1947 में आजाद हुआ था. इस दिन को आज भी पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन प्रधानमंत्री लाल किले पर तिरंगा फहराते हैं. इसके साथ ही सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों और शिक्षण संस्थानों में भी तिरंगा फहराया जाता है. वहीं, एक ऐसा मंदिर भी है, जिसमें हर 15 अगस्त और 26 जनवरी पर तिरंगा फहराया जाता है.

कौन सा है यह मंदिर

यह मंदिर झारखंड राज्य के रांची जिले में स्थित है. यह देश का पहला ऐसा मंदिर है, जहां दोनों राष्ट्रीय पर्वों पर तिरंगा फहराया जाता है. इस मंदिर को पहाड़ी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. यह भगवान शिव का मंदिर है. इसके अलावा कुछ लोग इसको फांसी टुंगरी के नाम से भी जानते हैं.

क्या है इसकी वजह

इसकी वजह काफी मार्मिक है. पहाड़ पर स्थित यह मंदिर आजादी से पहले अंग्रेजी हुकूमत के कब्जे में था. कहा जाता है कि अंग्रेजों के द्वारा यहां पर क्रांतिकारियों को फांसी दी जाती थी. इसी कारण इस जगह का नाम फांसी टुंगरी पड़ा.  स्वतंत्रता मिलने के बाद सबसे पहले रात के 12 बजे इस पहाड़ी की चोटी पर भगवान शिव के पताका के साथ तिरंगा फहराया गया था. उस दिन से यह सिलसिला जारी है. कहा जाता है कि 1947 में सबसे पहले आधी रात इसी मंदिर की गुंबद पर तिरंगा फहराया गया था. बीते 23 जनवरी 2016 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर 30.17 मीटर लंबे और 20.12 मीटर चौड़े तिरंगे को यहां पर फहराया गया था. इसे तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने पहाड़ी मंदिर के नीचे बने समारोह स्थल से बटन दबाकर फहराया था.  

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