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Keystroke Technology: कीबोर्ड पर कुछ भी किया टाइप तो मिनटों में हैक हो जाएगा डाटा, जानिए क्या है ये नई बला

Keystroke Technology: क्या आपको पता है कि कोई आपके सारी जानकारी आपकी कीबोर्ड की टाइपिंग के जरिए ही चुरा सकता है? अगर नहीं तो यहां हम आपको keystroke टेक्नोलॉजी के बारे में सब बता रहे हैं. 

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Shilpa Srivastava
Keystroke Technology

Keystroke Technology: आपने भी कभी न कभी वर्क फ्रॉम होम किया होगा. आपकी कंपनी ने भी जब आपको लैपटॉप दिया होगा तो कुछ रेस्ट्रिक्शन लगाई होंगी. क्या आप आपने उन रेस्ट्रिक्शन्स को तोड़ा है? क्या कभी ये सोचा है कि अगर आपने कभी ऐसा किया तो क्या होगा? शायद नहीं सोचा होगा. हाल ही में एक मामला सामने आया है जिसमें एक ऑस्ट्रेलियन रिमोट वर्कर को उसकी जॉब से निकाल दिया गया.

सुजी शेखो इंश्योरेंस ऑस्ट्रेलिया ग्रुप (आईएजी) में नौकरी कर रही थीं और उनकी कंपनी कीस्ट्रोक टेक्नोलॉजी के जरिए उनकी एक्टिविट ट्रैक करती थीं. हालांकि, उनकी परफॉर्मेंस सही नहीं थी जिसके चलते उन्हें नौकरी से निकल दिया गया. कंपनी ने बताया कि उनकी एक्टिविटी को 49 दिनों तक ट्रैक किया गया जिसमें काफी कम कीस्ट्रोक एक्टिविटी मिली. इसी के चलते कंपनी ने उन्हें निकाल दिया. चलिए जानते हैं कि कीस्ट्रोक टेक्नोलॉजी क्या है और यह किस तरह से किसी इम्प्लॉई की एक्टिविटी ट्रैक करती है. 

क्या है keystroke टेक्नोलॉजी?
कीस्ट्रोक लॉगर, जिसे कीलॉगर या कीबोर्ड कैप्चर भी कहा जाता है एक सर्विलेंस टेक्नोलॉजी है जो किसी स्पेसिफिक कंप्यूटर पर प्रेस की गई हर Key पर ध्यान रखती है. वैसे तो इसका इस्तेमाल कंपनियां करती हैं जिससे उन्हें यह पता चल पाए कि उनका इम्प्लॉय काम ठीक से कर रहा है या नहीं. 

इसके अलावा इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल साइबर क्रिमिनल्स भी करते हैं. इस तकनीक की मदद से साइबर क्रिमिनल्स आपकी जासूसी करते हैं या आपके स्मार्टफोन के माइक्रोफोन का एक्सेस हासिल कर लेते हैं. साइबर क्रिमिनल्स आपके पास एक फिशिंग ईमेल भेजते हैं जिसमें कहा जाता है कि एक क्रिटिकल अपडेट दिया गया है जिसे यूजर को इंस्टॉल करना है जिससे वो कंपनी की ऑनलाइन सर्विसेज का इस्तेमाल कर पाए. इसी अपडेट में कीस्ट्रोक डाल दिया जाता है जिससे यूजर की डिवाइस का एक्सेस अटैकर के पास पहुंच जाता है. 

कितने तरह के होते हैं कीस्ट्रोक लॉगर? 

  • हार्डवेयर कीस्ट्रोक लॉगर

  • सॉफ्टवेयर कीस्ट्रोक लॉगर

हार्डवेयर कीस्ट्रोक लॉगर: यह एक छोटी-सी डिवाइस होती है जो कीबोर्ड और कंप्यूटर को कनेक्ट करती है. यह दिखने में कीबोर्ड कनेक्टर जैसी ही होती है. ऐसे में इसे छिपाना आसान होता है और लोगों को इसका पता भी नहीं चलता है. 

सॉफ्टवेयर कीस्ट्रोक लॉगर: यह एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जिसे किसी यूजर द्वारा डाउनलोड किया जाता है जिससे यूजर की सारी एक्टिविटी हैकर्स के पास पहुंच जाती हैं. 

यह टेक्नोलॉजी कैसी करती है काम: 
एक कीस्ट्रोक लॉगर आपके कंप्यूटर में ट्रोजन, फिशिंग ईमेल या किसी दूसरे मैलवेयर के अंदर छिपा होता है. यह लॉगर आपके कंप्यूटर के कीस्ट्रोक्स सेव करता है जिससे अटैकर उन्हें देख पाए. यह फाइल लगातार साइबर क्रिमिनल को भेजी जाती है. वहीं, कई अटैकर हार्डवेयर कीस्ट्रोक लॉगर का इस्तेमाल करते हैं जिसके तहत कंप्यूर में फाइल्स तब तक सेव रहती हैं जब तक हैकर्स उन्हें रिट्रीव न कर लें. 

कीस्ट्रोक लॉगर आपके द्वारा लिखी गई सभी बातों की निगरानी और रिकॉर्ड करता है जिससे आपकी जानकारी की प्राइवेसी को खतरा रहता है. आजकल, लगभग हर कोई इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल से लेकर आधार कार्ड नंबर तक सभी जानकारी कंप्यूटर में इक्ट्ठा करके रखते हैं. साइबर क्रिमिनल्स आपकी इस जानकारी को चुरा लेते हैं और फिर इनका गलत इस्तेमाल करते हैं. इन्हें डार्क वेब पर बेचा जाता है. 

कीस्ट्रोक लॉगर से कैसे बचें?

  • आपको यह ध्यान रखना होगा कि किसी भी पॉप-अप पर क्लिक न करें. अचानक से अगर कोई पॉप-अप आ जाता है तो उसे इग्नोर करना है. अगर आपने इस पॉप-अप पर क्लिक किया तो आपकी डिवाइस में कीस्ट्रोक लॉगर घुस सकता है. 

  • किसी भी सॉफ्टवेयर को आधिकारिक सोर्स से ही डाउनलोड करें. थर्ड पार्टी डाउनलोड करने से आपकी डिवाइस में गलत सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल किया जा सकता है. 

  • किसी भी अनजान व्यक्ति के जरिए आई हुई किसी अटैचमेंट पर क्लिक न करें. इससे आपके सिस्टम में मैलवेयर आ सकता है. 

  • हमेशा ऐप्स और सॉफ्टवेयर को अप टू डेट रखें. इससे बग फिक्स हो जाते हैं और सिक्योरिटी पैचेज मिलते हैं. 

  • डिवाइस में हमेशा एंटीवायरस सॉफ्टवेयर रखें. इससे कोई भी मैलवेयर आपकी डिवाइस में रुक नहीं पाएगा.