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UP News: यूपी में अखिलेश को अपनों से मिली 'दगा', तेजस्वी से लें सीख

UP News: यूपी में समजावादी पार्टी पहली बार बीजेपी के सामने बिखरी नजर आ रही है. राज्यसभा चुनाव में जो हुआ उससे अखिलेश यादव की इमेज को धक्का लगा है.

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Gyanendra Sharma
akhilesh yadav

UP News: यूपी में राज्सभा की 10 सीटों पर चुनाव हुए. नतीजा बीजेपी के पक्ष में रहा. 8 सीट पर बीजेपी और 2 सीट पर सपा के उम्मीदवार जीते. समाजवादी पार्टी ने 3 कैंडिडेट मैदान में उतारे थे, जिसमें दो ही जीत सके. पार्टी के करीब आधा दर्जन से ज्यादा विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की. क्रॉस वोटिंग करने वाले सभी सपा विधायक उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के साथ एक फोटो में विक्ट्री का साइन दिखाते हुए नजर आए हैं. जिन विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की सभी अखिलेश यादव के करीबी माने जाते रहे हैं. 

बीजेपी की आंधी में सपा मजबूती से खड़ी रही. अखिलेश हर मौके पर सत्तारूढ़ दल बीजेपी को घेरते रहे. जिस शहर में उनकी रैली होती है वहां भीड़ उमड़ पड़ती है. 7 साल  से सत्ता से दूर होने के बाद भी समर्थकों में कमी नहीं आई है. अखिलेश यादव का यूपी में जलवा है, लेकिन ये उम्मीद नहीं थी कि वही अखिलेश यादव और उनकी पार्टी राज्यसभा चुनावों की वोटिंग में बुरी तरह बिखर जाएगी. पार्टी अब जब कमजोर हुई है तो इसके कारणों पर चर्चा हो रही है. 

अखिलेश लें तेजस्वी से सीख

अखिलेश और तेजस्वी दोनों को विरासत अपने पिता से मिली है. दोनों देश के कद्दावर नेता के बेटे हैं और दोनों विपक्ष की राजनीति कर रहे हैं. यूपी की तरह बिहार में भी विपक्ष की लड़ाई बीजेपी से है. तेजस्वी लोकसभा चुनाव से पहले मैदान में है. वे सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं. बिहार में यात्रा कर रहे हैं. शहर-शहर जाकर अपनी बात रख रहे हैं. उनकी सभाओं में जबरदस्त भीड़ दिख रही है. अखिलेश यादव के पास भी मौका है कि सड़कों पर निकले और जनता के साथ संवाद करें. 

ऐसा नहीं है अखिलेश यादव ने जब मेहनत की तो उसका फल नहीं मिला. उन्होंने 2012 में पूरे प्रदेश में साइकिल यात्रा निकाली थी. पिता के जीवत रहते उन्होंने मायावती सककार के खिलाफ मोर्चा खोला दिया था. इसके अच्छे परिणाम भी मिले. 2012 में जनता ने उन्हें तख्त सौंपा. इसके बाद से ये आरोप लगता आया है कि अखिलेश यादव जनता से कट गए हैं. 

पार्टी कार्यकर्ताओं को समझा नहीं पाए अखिलेश

समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए जया बच्चन, लालजी सुमन और रिटायर्ड आइएएस अफसर आलोक रंजन को टिकट दिया था. इससे पहले पार्टी के नेताओं के साथ रायशुमारी नहीं हुई.  पार्टी में इस बात पर आलोचना हुई कि किसी पिछड़े को उन्होंने टिकट नहीं दिया. कहा गया कि जया बच्चन और आलोक रंजन को  क्यों टिकट दिया गया. अखिलेश यहां भी अपने कार्यकर्ताओं को समझाने में विफल रहे. ये बता उठी कि पार्टी लोकसभा में तो दलित और मुसलमान को टिकट देती है लेकिन राज्यसभा में नहीं पूछती.