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Lok Sabha Elections 2024 : क्या मुरादाबाद में कमल खिलाने में कामयाब होगी BJP? मोदी लहर में एक बार ढह चुका है सपा का गढ़

Lok Sabha Elections 2024:उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद लोकसभा सीट पर सपा के दो उम्मीदवारों ने नामांकन भर दिया है. वहीं बीजेपी ने सर्वेश सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है. अब देखना है कि मुस्लिम बहुल सीट में किसको जीत मिलती है.

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Pankaj Soni

Lok Sabha Elections 2024: लोकसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान 19 अप्रैल को होगा और पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन का आज आखिरी दिन है. इसी बीच मुरादाबाद में आज एक ही दल को दो प्रत्याशियों ने नामांकन किया है. जिसके बाद मुरादाबाद सीट चर्चा में आ गई है.

मुरादाबाद से मौजूदा सांसद एसटी हसन हैं, जिन्होंने चुनाव में नामांकन भर दिया है. इनके साथ ही मुरादाबाद से आज सपा की दूसरी प्रत्याशी रुचि वीरा ने भी नामांकन किया है. पिछले लोकसभा चुनाव 2019 में यहां से सपा के एसटी हसन ने जीत दर्ज की थी. 

मुरादाबाद सीट का परिचय

मुरादाबाद शहर पीतल के बर्तनों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. यहां पर आधुनिक कारीगरों की ओर से तैयार किए गए आधुनिक, लुभावने, और कलात्मक पीतल के बर्तन, गहने और ट्राफियां मुख्य हैं. यहां बने पीतल के बर्तन अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी और मध्य पूर्व एशिया जैसे देशों में निर्यात किए जाते हैं. मुरादाबाद में 6 विधानसभा सीटें आती हैं. इन 6 सीटों में से 5 पर सपा का कब्जा है जबकि एक सीट बीजेपी के पास है.


मुरादाबाद सीट का इतिहास

मुरादाबाद मुस्लिम बहुल संसदीय सीट है. यहां पर अब तक 11 बार मुस्लिम उम्मीदवारों को जीत मिली है. वहीं 6 बार अन्य उम्मीदवारों को जीत मिली है. यह सीट प्रदेश की उन चंद सीटों में से एक है जहां कांग्रेस को पिछले 20 सालों में एक या दो बार जीत मिली है. यह सीट 1952 से अस्तित्व में है. यहां राम सरन ने लगातार 2 बार चुनाव जीता. आगे 1962 में निर्दलीय प्रत्याशी सैयद मुजफ्फर हुसैन विजयी रहे. 1967 और 1971 के चुनाव में यह सीट भारतीय जनसंघ के खाते में गई. 1977 और 1980 में भी कांग्रेस को यहां से हार मिली.

1984 में इस सीट में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद आम चुनाव में सहानूभूति मिली और कांग्रेस विजयी हुई.1989 और1991 में जनता दल के कब्जे में यह सीट चली गई. 90 के बाद की राजनीति में 1999 का चुनाव खास रहा. कांग्रेस छोड़ने वाले जगदंबिका पाल ने अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस की स्थापना की और यहां से पार्टी के उम्मीदवार चंद्र विजय सिंह को जीत मिली मिली. 2004 के चुनाव में सपा को फिर से जीत मिली थी.

1996 और 1998 के चुनाव में भी सपा को जीत मिली थी. कांग्रेस ने 2009 के चुनाव में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन पर दांव लगाया और वह पहली बार लोकसभा के लिए यहां से सांसद बने. 2014 के चुनाव में देश में मोदी लहर का फायदा बीजेपी को मिला और मुरादाबाद सीट पर पहली बार कमल खिल गया. पिछले चुनाव में हारने वाले कुंवर सर्वेश कुमार सिंह ने इस बार जीत हासिल की और सपा के एसटी हसन को हरा दिया. लेकिन 2019 के चुनाव में इस मोदी लहर का फायदा बीजेपी को यहां पर नहीं दिखा और उसे सपा-बसपा गठबंधन के आगे हार का सामना करना पड़ा.

मुरादाबाद सीट का जातिगत समीकरण

2011 की जनगणना के मुताबिक, जिले की कुल आबादी 4,772,006 थी जिसमें पुरुषों की संख्या 2,503,186 थी तो महिलाओं की संख्या 2,268,820 थी. अगर धर्म के आधार पर देखें तो हिंदुओं की आबादी 52.14% थी मुस्लिम बिरादरी की संख्या 47.12% थी. संसदीय सीट की कई जगहों पर मुस्लिम बिरादरी बेहद निर्णायक भूमिका में हैं. इनके अलावा यहां अनुसूचित जाति (SC) के जाटव वोटर्स की संख्या करीब 1.80 लाख, वाल्मीकि वोटर्स की संख्या करीब 43000 थी. इस सीट पर यादव बिरादरी के वोटर्स अहम भूमिका रखते हैं. 1.50 लाख ठाकुर वोटर्स, 1.49 लाख सैनी वोटर्स के अलावा करीब 74 हजार वैश्य, 71 हजार कश्यप और करीब 5 हजार जाट वोटर्स थे. इसके साथ ही प्रजापति, पाल, ब्राह्मण, पंजाबी और विश्नोई समाज के वोटर्स की अच्छी मौजूदगी है. 

कौन हैं बीजेपी उम्मीदवार सर्वेश सिंह?

भाजपा ने मुरादाबाद सीट से सर्वेश सिंह को मैदान में उतारा है. वह वर्ष 2019 को इसी सीट से चुनाव हार गए थे. भाजपा के कुंवर सर्वेश कुमार सिंह ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट से वर्ष 1991, 1993, 1996, 2002 और 2012 में (पांच बार) विधायक निर्वाचित हो चुके हैं. सर्वेश सिंह 2014 में सांसद भी रह चुके हैं. 2019 में उन्हें सपा के एसटी हसन ने हरा दिया था. उनका बेटा सुशांत सिंह बिजनौर जिले की बड़ापुर विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं.

कौन हैं एसटी हसन?

मुरादाबाद सीट से समाजवादी पार्टी से दो उम्मीदवारों ने नामांकन भरा है. पहले उम्मीदवार एसटी हसन हैं, जो मुरादाबाद सीट से मौजूदा सांसद हैं. इसके पहले एसटी हसन मुरादाबाद जिला परिषद के सदस्य और अध्यक्ष रह चुके हैं. मुरादाबाद में लोकसभा मुस्लिम बहुल सीट है और यहां पर एसटी हसन की अच्छी पकड़ है. 
 

कौन हैं रुचि वीरा?

रुचि वीरा यूपी के बिजनौर जिले की ही रहने वाली है. उन्होंने महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय से कला स्नातक की डिग्री प्राप्त की है. साल 2023 में बहुजन समाज पार्टी ने उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए पार्टी से निष्कासित कर दिया था, जिसके बाद वो सपा में शामिल हो गईं. वहीं सपा से ही दूसरी प्रत्याशी रुचि वीरा हैं, जो बिजनौर विधानसभा सीट से विधायक रह चुकी हैं. 2014 के चुनाव में मौजूदा विधायक कुंवर भारतेंद्र सिंह के 16वीं लोकसभा का चुनाव में जीत दर्ज की थी, जिसके बाद हुए उपचुनाव में रुचि वीरा ने बिजनौर से जीत दर्ज की थी.

वो बिजनौर से 2014 से 2017 के बीच विधायक रही. 28 दिसंबर 2015 को उन्हें सपा ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निलंबित कर दिया था. 2022 में बसपा ने उन्हें बिजनौर से प्रत्याशी बनाया, लेकिन इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. 2023 में बसपा ने उन्हें निष्कासित कर दिया, जिसके बाद वो फिर से सपा में शामिल हो गईं. 

मुराबाद लोकसभा में कौन कौन जीता

वर्ष                                पार्टी                                             विजेता

1952               भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस                                 राम सरन

1957               भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस                                 राम सरन

1962                     निर्दलीय                                       सैयद मुजफ्फर हुसैन

1967                     जनसंघ                                             ओमप्रकाश त्यागी

1971                    जनसंघ                                                 वीरेंद्र अग्रवाल

1977                  जनता पार्टी                                            गुलाम मुहम्मद खान

1980                 जनता पार्टी                                             गुलाम मुहम्मद खान

1984                    कांग्रेस                                              हाफिज मोहम्मद सिद्दीक

1989                    कांग्रेस                                                 गुलाम मुहम्मद खान

1991                जनता दल                                               गुलाम मुहम्मद खान

1996                   सपा                                                      शफीकुर्रहमान बर्क

1999    लोकतांत्रिक कांग्रेस                                               चंद्र विजय सिंह

2004              सपा                                                          शफीकुर्रहमान बर्क

2009            कांग्रेस                                                        मोहम्मद अजहरुद्दीन

2014            भाजपा                                                          कुंवर सर्वेश सिंह

2019              सपा                                                            डॉ. एसटी हसन

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