Lok Sabha Election 2024: Modi ka Parivar पर रार, बिहार में इन परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती है प्रदेश की सियासत
Lok Sabha Election 2024: बिहार की राजनीति में कुछ परिवारों ने कब्जा कर रखा है. बिहार की राजनीति इन परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती है. राजनीति में परिवारवाद की सीरीज में आज हम आपको बता रहे हैं कि बिहार की राजनीति में कौन से परिवार हावी हैं.
Lok Sabha Election 2024 : लोकसभा चुनाव 2024 में 'मोदी का परिवार' रार मच गई है. पीएम मोदी भी हमेशा परिवारवाद की राजनीतिक को लेकर विपक्ष पर हमला बोलते रहे हैं. पीएम मोदी अपने स्पीच में हमेशा कहते हैं कि करीब-करीब हर राज्य की राजनीति में कुछ परिवारों ने कब्जा कर रखा है.आज हम आपक बिहार के उन परिवारों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके इर्द-गिर्द बिहार की राजनीति घूमती है. या दूसरे शब्दों में कहें तो जिन परिवारों ने बिहार की राजनीतिक में कब्जा जमा रखा है उनके बारे में हम आपको बता रहे हैं.
लालू यादव फैमिली
बिहार कि राजनीति में लालू यादव और उनका परिवार बड़ी धुरी हैं. लालू यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी दोनों राज्य में मुख्यमंत्री रह चुके हैं. लालू यादव के दो बेटे और सात बेटियां हैं. दोनों बेटे राजनीति में हैं. चार बेटियां राजनीतिक बैंकग्राउंड वाले परिवारों में हैं. बिहार के साथ ही केंद्र की सत्ता में भी इस परिवार का समर्थन अहम साबित होता रहा है. अब लालू और राबड़ी के छोटे बेटे तेजस्वी यादव इस परिवार को फ्रंट फेस हैं. 2023 में वो नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम रहे चुके हैं.
पासवान फैमिली
केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान अब दुनिया में नहीं हैं लेकिन पासवान परिवार मौजूदा समय में बिहार के दूसरे सबसे सशक्त राजनीतिक परिवारों में एक हैं. रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान, भाई पशुपतिनाथ पासवान और भतीजा प्रिंस पासवान तीनों लोग सांसद हैं. रामविलाश पासवान की पत्नी रीना पासवान को चुनाव में उतारने की चिराग तैयारी कर रहे हैं. इस परिवार में राम विलास के भाई राम चंद्र पासवान और पशुपति कुमार पारस भी पार्टी की राजनीति में सक्रिय भूमिकाओं में हैं.
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सिन्हा फैमिली
आज यह परिवार बिहार की राजनीति में सक्रिय नहीं है, लेकिन एक समय में यह परिवार किंगमेकर हुआ करता था. इस परिवार की राजनीति में एंट्री डॉ. अनुग्रह नारायण सिन्हा के साथ हुई जो 1946 से 1957 तक बिहार के उप मुख्यमंत्री रहे. बाद में उनके बेटे सत्येंद्र नारायण सिन्हा बिहार के मुख्यमंत्री बने. सत्येंद्र नारायण की पत्नी किशोरी सिन्हा सांसद रह चुकी हैं. वहीं निखिल को केरल का गवर्नर बनने का गौरव हासिल हुआ. निखिल की पत्नी श्यामा सांसद रहीं और भतीजे डॉ. विजय कुमार बिहार सरकार में मंत्री रहे. इस परिवार के रामेश्वर प्रसाद सिन्हा, एनके सिंह, उदय सिंह, माधुरी सिंह भी राजनीति रूप से अभी भी सक्रिय हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में उदय सिंह बिहार के सबसे धनी उम्मीदवारों में पहले नंबर पर थे.
मिश्रा फैमिली
बिहार की राजनीति में पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा का परिवार सक्रिय राजनैतिक परिवारों में एक है. हालांकि वर्तमान में इस परिवार की राजनीतिक सक्रियता कम है. ललित नारायण के पोते ऋषि मिश्रा जनता दल यूनाइटेड के सक्रिय नेता और विधायक हैं. पोती पूजा मिश्रा ब्रिटेन में राजनीतिक रूप से बेहद सक्रिय हैं. इस परिवार से ललित नारायण की पत्नी कामेश्वरी देवी के बाद उनके पुत्र विजय कुमार मिश्रा की गिनती उस वक्ति के बेहद सक्रिय और जुझारू नेताओं में होती थी. विजय कुमार पूर्व सांसद के साथ तीन बार विधायक भी रह चुके हैं. ललित नारायण के भाई जगन्नाथ मिश्रा को केंद्रीय मंत्री और बिहार के मुख्यमंत्री तक रह चुके हैं. जगन्नाथ मिश्रा के पुत्र नितीश मिश्रा और इसी परिवार से जुड़े गौरी शंकर राजहंस भी राजनीतिक रूप से सक्रिय सदस्य हैं.
ठाकुर जुगल किशोर सिन्हा फैमिली
बिहार की राजनीति में डॉ. अनुग्रह नारायण सिन्हा के अलावा एक और सिन्हा फैमिली का समय हुआ करता था. इस परिवार के अग्रज देश में सहकारिता आंदोलन के प्रणेता ठाकुर जुगल किशोर सिन्हा थे. वह देश की पहली लोकसभा के सदस्य भी थे. उनकी पत्नी राम दुलारी सिन्हा भी बड़ी राजनेता थीं. बाद में बेटे मधुरेन्द्र कुमार सिंह और इसके बाद मधुरेन्द्र के बेटे मृगेन्द्र कुमार सिंह अपने अपने समय में कांग्रेस के धुंरधर नेताओं के रूप में प्रचलित हुए.
जगजीवन राम फैमिली
भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम भी बिहार के रहने वाले थे. उनके बाद उनकी राजनीतिक विरासत बेटी मीरा कुमार संभाल रही हैं. वरिष्ठ कांग्रेस नेता मीरा कुमार को लोकसभा में पहली महिला स्पीकर बनने का अवसर भी प्राप्त हुआ था.
चंद्रशेखर सिंह फैमिली
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रशेखर सिंह केंद्रीय मंत्री भी रहे थे. उनकी पत्नी मनोरमा सिंह लोकसभा सांसद भी बनीं. इसके बाद इस परिवार से किसी को कोई बड़ी राजनीतिक उपलब्धि नहीं मिली.
जगदेव प्रसाद फैमिली
स्वतंत्रता सेनानी रहे और कांग्रेस के दिग्गज नेता जगदेव प्रसाद के परिवार में उनके समधी सतीश प्रसाद सिंह को बिहार का मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला. जबकि जगदेव के बेटे नागमणि केंद्रीय मंत्री रहे.