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World Cup 2023: 1996 का विल्स वर्ल्ड कप, जिसमें रोलर कोस्टर से कम नहीं थी टीम इंडिया की राइड

World Cup 2023: वनडे वर्ल्ड कप 2023 भारत में होने जा रहा है. भारत इसका मेजबान है. इस वर्ल्ड कप तक भारत एक बहुत बड़ी टीम के तौर पर अपनी यात्रा पूरी कर चुका है. 1996 के वर्ल्ड कप में भी भारत से सह-मेजबान के तौर पर बड़ी उम्मीदें थी. जानिए उस दौरान क्या हुआ और कैसे वह मेगा इवेंट इतना खास था.

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Antriksh Singh
World Cup 2023: 1996 का विल्स वर्ल्ड कप, जिसमें रोलर कोस्टर से कम नहीं थी टीम इंडिया की राइड

ODI World Cup 2023: वनडे वर्ल्ड कप फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. क्रिकेट की दुनिया में इस विश्व कप का इतिहास सबसे पुराना है. वनडे वर्ल्ड कप ने इस खेल को बहुत करीब से बदलते हुए देखा है. भारत में 5 अक्टूबर से शुरू होने जा रहे इस मेगा इवेंट के मौके पर एक ऐसे विश्व कप की कहानी याद आती है जिसमें भारतीय क्रिकेट टीम की जर्नी किसी रोलर कोस्टर राइड से कम नहीं थी.

1996 का विल्स वर्ल्ड कप

यह था 1996 का वह विश्व कप जिसने भारत में क्रिकेट के माहौल को पूरी तरह से बदल कर रख दिया था. वैसे तो 1983 के विश्व कप को जीतने के बाद से ही क्रिकेट इस देश के लोगों के लिए एक मजहब, एक जुनून की तरह रहा. तब रेडियो पर इसकी दीवानगी देखने के लिए मिलती थी. 90 के दशक के अंत में आते-आते क्रिकेट दुनिया के किसी भी कोने से आपके घर पर टीवी के जरिए मौजूद था.

1996 के विश्व कप का प्रसारण भी धड़ल्ले से हुआ और देश को क्रिकेट फीवर ने अपनी जकड़ में लिया. इस मेगा इवेंट की मेजबानी भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ने की थी. इस इवेंट के लिए लोगों की दीवानगी देखते ही बनती थी. क्रेज ऐसा था कि गली के नुक्कड़ के पनवाड़ी की दुकान पर लगे छोटे-छोटे टीवी में मैच देखने के लिए जमावड़ा लगा रहता था.

भारत के कोहिनूर सचिन तेंदुलकर

वर्ल्ड कप में भारतीय क्रिकेट टीम के पास सचिन तेंदुलकर जैसा कोहिनूर था. और उनके ओपनिंग जोड़ीदार थे वे नवजोत सिंह सिद्धु जो तब काफी शर्मीले और कम बोलने वाली शख्सियत थे. बोलते सचिन भी बहुत नहीं थे लेकिन तब उनके बल्ले की हनक सुनने के लिए पूरा देश खामोश हो जाता था. टीम इंडिया के मिडिल ऑर्डर में मोहम्मद अजहरूद्दीन, अजय जडेजा जैसे भरोसेमंद खिलाड़ी मौजूद थे.

दो नॉकआउट से बदल गई पूरी कहानी

इस वर्ल्ड कप की असली भारतीय क्रिकेट कहानी शुरू हुई थी नॉकआउट स्टेज से जहां भारत का मुकाबला कट्टर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के साथ एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में था. इस मैच में सिद्धु ने 93 रनों की पारी खेली थी. लेकिन असली इनिंग खेली अजय जडेजा ने. जडेजा ने भारतीय क्रिकेट के इतिहास में खेले गए सबसे बेहतरीन कैमियो में एक को खेलकर दिखाया और वकार युनिस की बैंड बजा दी थी. यूनुस उस धुनाई पर पुराने फैंस आज भी मजे लेते हैं.

जब पाकिस्तान की टीम भारत द्वारा सेट किए गए 288 रनों का पीछा करने उतरी तो आमिर सोहेल और वेंकटेश प्रसाद के बीच की तनातनी ने माहौल को और गर्मा दिया. वेंकटेश प्रसाद पर चौके मारने के बाद सोहेल ने बड़ी अकड़ में भारतीय गेंदबाज को दोबारा सीमा रेखा के पार पहुंचाने की हेकड़ी दिखाई थी और अगली ही गेंद पर प्रसाद ने पाकिस्तानी ओपनर का डंडा उड़ाकर मैच का रोमांच 7वें आसमान पर पहुंचा दिया. यह भारत और पाकिस्तान के बीच की क्रिकेट प्रतिद्वंदता का आज भी सबसे आइकोनिक पल है.

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सेमीफाइनल ने निकाल दिए आंसू, दिल में रह गया दर्द

भारत ने पाकिस्तान से मुकाबला शान से जीता. देश भर में खुशियां मनाई गई. पटाखे फोड़े गए. लेकिन इसके बाद सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ जो मैच हुआ वो वनडे वर्ल्ड कप के इतिहास में भारतीय क्रिकेट के सबसे लोएस्ट प्वाइंट के तौर पर भी गिना जा सकता है.  भारत के सामने वो श्रीलंका थी जिसने अपने खेल से सबको हैरान कर रखा था. भारतीय टीम  ऐतिहासिक मैदान कोलकाता के ईडन गार्डन में हुआ ये मैच पूरा खेले बगैर ही हार गई.  और ये हार उनको किसी और ने नहीं बल्कि खुद उनके ही फैंस ने दी थी.

तब ईडन गार्डन ने खेल के मैदान पर भावुकता को अपने चरम पर इस कदर देखा कि फैंस अपनी चहेती टीम को हारते देखकर मानो अपना आप ही खो बैठे थे. भारत ने श्रीलंका को इस मुकाबले में 50 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 251 रनों पर सीमित किया था. इसके जवाब में सचिन तेंदुलकर ने शानदार अर्धशतक लगाया लेकिन बाकी बल्लेबाजों का हाल बेहाल था. देखते ही देखते टीम इंडिया 8 विकेट के नुकसान पर 120 रनों पर सिमट गई.

दर्द जो गुस्से में तब्दील हो गया

वर्ल्ड कप को इतनी बुरी तरह से अपने हाथ से निकलता देख भारतीय फैंस बेकाबू हो गए. उन्होंने कोलकाता के ऐतिहासिक मैदान की बाउंड्री को अराजकता की सड़क में तब्दील कर दिया. जो भी उनके हाथ में जो आया वो ही मैदान पर फेंकना शुरू कर दिया. हंगामा इतना ज्यादा था कि मैच अधिकारियों ने इस मुकाबले को वहीं पर रोकना ठीक समझा और श्रीलंका बाई डिफ़ॉल्ट मैच का विनर घोषित कर दिया गया.

भारत भली ही वह विश्व कप नहीं जीत पाया लेकिन विल्स वर्ल्ड कप ने क्रिकेट के तमाम उतार-चढ़ाव, जोश, जुनून, और खेल को धर्म की तरह पूजे जाने को लेकर जो अभिव्यक्ति दी उसने इस खेल को कई नए फैंस दिए.  एक बहुत बड़ी पीढ़ी विल्स वर्ल्ड कप के जरिए क्रिकेट से कनेक्ट हुई थी.

जिंदगी और क्रिकेट के बीच का फर्क बहुत कम हो जाता था

तो यह थी 1996 के वनडे विश्व कप की वह दास्तां जब फैंस के पास किसी फ्रेंचाइजी T20 या किसी फेंटेसी क्रिकेट के विकल्प नहीं थे.  वे मुकाबलों को देखने के लिए अपनी पूरी एनर्जी लगा देते थे और खेल में इतना रच-बस जाते थे कि जिंदगी और क्रिकेट के बीच का फर्क बहुत ही कम हो जाता था.