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India Top 5 Teachers: देश ही नहीं पूरी दुनिया में कमाया है भारत के इन शिक्षकों ने नाम, जानिए कौन हैं ये टीचर्स

आज हम आपको भारत के उन 5 शिक्षकों के बारे में बताएंगे जिन्होंने गुरु के रूप में दुनिया भर में नाम कमाया है.

Gyanendra Tiwari
Courtesy: Teachers Day 2023

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन: राधाकृष्णन के जन्मदिवस को भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. बतौर शिक्षक जिन्होंने देश के हजारों युवाओं को एक बेहतर भविष्य दिया है. शिक्षा के क्षेत्र में अपना जीवन न्योछावर करने वाले डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति भी रहे हैं. वो एक महान लेखक, दार्शनिक भी थे. 1954 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से  सम्मानित किया गया था.

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन: राधाकृष्णन के जन्मदिवस को भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. बतौर शिक्षक जिन्होंने देश के हजारों युवाओं को एक बेहतर भविष्य दिया है. शिक्षा के क्षेत्र में अपना जीवन न्योछावर करने वाले डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति भी रहे हैं. वो एक महान लेखक, दार्शनिक भी थे. 1954 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से  सम्मानित किया गया था.

Courtesy: Teachers Day 2023

रामकृष्ण परमहंस : रामकृष्ण परमहंस का नाम भारत के महान शिक्षकों में से एक हैं. उन्होंने बतौर गुरु हजारों युवाओं को चमकता हुआ भविष्य दिया है. उनका नाम देश के महान संतों और आध्यात्मिक गुरुओं में भी गिना जाता है. रामकृष्ण परमहंस दी स्वामी विवेकानंद के आध्यात्मिक गुरु थे. उनका जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल में हुआ था.

रामकृष्ण परमहंस : रामकृष्ण परमहंस का नाम भारत के महान शिक्षकों में से एक हैं. उन्होंने बतौर गुरु हजारों युवाओं को चमकता हुआ भविष्य दिया है. उनका नाम देश के महान संतों और आध्यात्मिक गुरुओं में भी गिना जाता है. रामकृष्ण परमहंस दी स्वामी विवेकानंद के आध्यात्मिक गुरु थे. उनका जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल में हुआ था.

Courtesy: Teachers Day 2023

सावित्रीबाई फुले: सावित्रीबाई फुले देश की पहली महिला शिक्षिका के रूप में जानी जाती हैं. जब देश में लड़कियों के पढ़ने-लिखने पर पाबंदी थी उस समय सावित्रीबाई ने भारत की नारियों में शिक्षा की ऐसी अलख जलाई जो कभी बुझी नहीं. उनका जन्म 3 जनवरी 1831 में नायगाव में हुआ था.

सावित्रीबाई फुले: सावित्रीबाई फुले देश की पहली महिला शिक्षिका के रूप में जानी जाती हैं. जब देश में लड़कियों के पढ़ने-लिखने पर पाबंदी थी उस समय सावित्रीबाई ने भारत की नारियों में शिक्षा की ऐसी अलख जलाई जो कभी बुझी नहीं. उनका जन्म 3 जनवरी 1831 में नायगाव में हुआ था.

Courtesy: Teachers Day 2023

रवींद्रनाथ टैगोर : अपने लेखन से मशहूर भारत के महान शिक्षकों में से एक रवींद्रनाथ टैगोर ने अपनी शिक्षा से हजारों युवाओं को एक नया जीवन दिया. एक शिक्षक होने के साथ वो कवि और चित्रकार भी थे. रवींद्रनाथ टैगोर बच्चों के पठन-पाठन के लिए अलग सिद्धांत विकसित किए और उन्हीं सिद्धांतों के आदार पर उन्होंने शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय की स्थापना भी की थी. रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म  7 मई 1861 को पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में हुआ था. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में एक अमिट छाप छोड़ी है.

रवींद्रनाथ टैगोर : अपने लेखन से मशहूर भारत के महान शिक्षकों में से एक रवींद्रनाथ टैगोर ने अपनी शिक्षा से हजारों युवाओं को एक नया जीवन दिया. एक शिक्षक होने के साथ वो कवि और चित्रकार भी थे. रवींद्रनाथ टैगोर बच्चों के पठन-पाठन के लिए अलग सिद्धांत विकसित किए और उन्हीं सिद्धांतों के आदार पर उन्होंने शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय की स्थापना भी की थी. रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म  7 मई 1861 को पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में हुआ था. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में एक अमिट छाप छोड़ी है.

Courtesy: Teachers Day 2023

डॉ. अब्दुल कलाम : मिसाइल मैन के नाम से मशहूर भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम की गिनती महान शिक्षकों में होती है. वैज्ञानिक कार्यों के साथ उन्होंने शिक्षक के रूप में महान कार्य किया है. राष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा करने के बाद डॉ. अब्दुल कलाम अन्ना यूनिवर्सिटी में बतौर शिक्षक के रूप में पढ़ाने लगे थे. वो कहते थे कि उन्हें एक शिक्षक के रूप में जाना जाए. उनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 में रामेश्वरम में हुआ था.

डॉ. अब्दुल कलाम : मिसाइल मैन के नाम से मशहूर भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम की गिनती महान शिक्षकों में होती है. वैज्ञानिक कार्यों के साथ उन्होंने शिक्षक के रूप में महान कार्य किया है. राष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा करने के बाद डॉ. अब्दुल कलाम अन्ना यूनिवर्सिटी में बतौर शिक्षक के रूप में पढ़ाने लगे थे. वो कहते थे कि उन्हें एक शिक्षक के रूप में जाना जाए. उनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 में रामेश्वरम में हुआ था.