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उम्र बढ़ने से क्यों कमजोर हो जाती है हमारी याददाश्त, रिसर्च में पता चला कारण

Human Brain: वैज्ञानिकों ने उम्र के साथ कमजोर होती याददाश्त लिए जिम्मेवार केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के बारे में रिसर्च की और इसके पीछे की वजह का पता लगाया.

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Gyanendra Tiwari
उम्र बढ़ने से क्यों कमजोर हो जाती है हमारी याददाश्त, रिसर्च में पता चला कारण

नई दिल्ली. पृथ्वी पर मनुष्य ही एक ऐसी प्रजाति जिसने अपनी बौद्धिक क्षमताओं के दम पर दुनिया में अपना एक अलग स्थान हासिल किया है. भले ही हम अन्य जानवरों की अपेक्षा ज्यादा विकसित हैं लेकिन बढ़ती उम्र के साथ हमारी हमारा दिमाग कमजोर होने लगता है. हम चीजों को भूलने लगते हैं. इसके पीछे क्या कारण है उसका पता वैज्ञानिकों ने लगा लिया है. आइए आपको बताते हैं कि बढ़ती उम्र के साथ आखिर हमारी याददाश्त कमजोर क्यों हो जाती है.

यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो के अंसचुट्ज मेडिकल कैंपस के वैज्ञानिकों ने उम्र के साथ कमजोर होती याददाश्त, ज्ञान-संबंधी गिरावट के लिए जिम्मेवार केंद्रीय तंत्रिका तंत्र  के बारे में रिसर्च की और इसके पीछे की वजह का पता लगाया.

शोध में क्या कहा गया?
यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो स्कूल ऑफ मेडिसिन में फार्माकोलॉजी के वैज्ञानिक ने अपनी रिसर्च में खुलासा करतेह हुए बताया कहा कि इस तंत्र में कामकी (सीएएमकेआईआई) नामक पाए जाने वाले प्रोटीन का गलत तरीके से काम करना शामिल है. यह चीजों को याद रखने और नई चीज सीखने में सहायक होता है.

कामकी (सीएएमकेआईआई) प्रोटीन की वजह से हमारी याददाश्त को प्रभावित करती है. ये  सूक्ष्म चीजों को याद रखने वाले काम होते हैं.
कैल्शियम आयन में आने वाली  स्टीमुलाई इसके तंत्रिका कोशिकाओं  (nerve cells) के बीच सिनैप्स और कैल्शियम आयन की इंडपेंडेंट एक्टिविटी में लंबे समय तक चलने वाली वृद्धि पर असर डाल सकती हैं. इसके चलते कुछ समय बाद कैल्शियम आयन से याददाश्त मिट जाती है.

इंसानों और चूहों की उम्र
शोध में कहा गया कि इंसानों और चूहों में उम्र बढ़ने के साथ एस-नाइट्रोसिलेशन (S-nitrosylation) नामक प्रक्रिया कम हो जाती है. इसके कम होने की वजह से कामकी (सीएएमकेआईआई) सहित मस्तिष्क में पाए जाने वाले एक विशेष प्रोटीन में बदलाव आ जाता है. रिसर्च में कहा गया कि इसकी वजह से उम्र बढ़ने के साथ इंसानी दिमाग की याददाश्त  की शक्ति कमजोर हो जाती है.

आयु के बढ़ने से नाइट्रिक ऑक्साइड की मात्रा कम हो जाती है, जिसके चलते नाइट्रोसिलेशन कम हो जाता है जिससे याददाश्त और सीखने की क्षमता में गिरावट आ जाती है. वैज्ञानिकों द्वारा किया गया यह शोध साइंस सिग्नलिंग नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

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