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कहीं फिर न फैल जाए महामारी! क्या है एवियन फ्लू जिसने रांची में मचाया है कोहराम

Avian flu outbreak in Ranchi: झारखंड प्रशासन ने रांची के मोरहाबादी में राम कृष्ण आश्रम द्वारा संचालित पोल्ट्री फार्म में एवियन इन्फ्लूएंजा का पता चलने के बाद चेतावनी जारी की है और इसको लेकर अब तक 770 बत्तखें और उनके 4,300 अंडों को नष्ट किया जा चुका है.

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Avian influenza
Courtesy: freepik

Avian flu outbreak in Ranchi: झारखंड प्रशासन ने रांची में एवियन इन्फ्लूएंजा को लेकर अलर्ट जारी किया है. रांची में एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, बुधवार को रांची स्थित एक पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा) के मामले सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने चेतावनी जारी की है.

अधिकारी ने बताया कि "मोराबादी स्थित रामकृष्ण आश्रम द्वारा संचालित पोल्ट्री फार्म - दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र में 920 पक्षियों, जिनमें 770 बत्तख शामिल हैं, उन्हें मार दिया गया."

इसके अलावा, अधिकारी ने बताया कि एहतियात के तौर पर कुल 4,300 अंडों को भी नष्ट कर दिया गया. भोपाल स्थित आईसीएआर- राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (निह्साद) को भेजे गए सैंपलों में H5N1 वायरस की मौजूदगी की पुष्टि हुई है, जो एवियन इन्फ्लूएंजा ए वायरस का एक प्रकार है. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर ये वायरस क्या है और क्या ये इंसानों के लिए महामारी जैसा खतरा बन सकती है.

एवियन इन्फ्लूएंजा क्या है?

एवियन इन्फ्लूएंजा, जिसे बर्ड फ्लू के नाम से भी जाना जाता है, एक वायरल संक्रमण है जो प्राथमिक रूप से पक्षियों को प्रभावित करता है. यह इन्फ्लूएंजा ए वायरस के कई प्रकारों में से एक है, जो जंगली जल पक्षियों में पाया जाता है. ये जंगली पक्षी आमतौर पर बीमार नहीं होते हैं, लेकिन वे वायरस को अपने मल और लार के माध्यम से फैला सकते हैं.

एवियन इन्फ्लूएंजा का विभिन्न प्रकार के पक्षियों पर प्रभाव पड़ सकता है, जिनमें मुर्गियां, बत्तख, टर्की, और शिकारी पक्षी शामिल हैं. वायरस का प्रकार और पक्षी की प्रजाति इस बात को निर्धारित करती है कि संक्रमण कितना गंभीर होगा. कुछ पक्षियों में हल्के लक्षण हो सकते हैं, जबकि अन्य में गंभीर बीमारी या मृत्यु हो सकती है.

H5N1 वायरस खतरनाक क्यों है?

H5N1 एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस का एक उप प्रकार है जो विशेष रूप से चिंताजनक है. यह वायरस पक्षियों के लिए अत्यधिक संक्रामक और घातक हो सकता है. संक्रमित पक्षी बीमार दिखाई दे सकते हैं, उनकी श्वास लेने में तकलीफ हो सकती है, उनके चेहरे और टांगें नीली पड़ सकती हैं, और वे अंडे देना बंद कर सकते हैं. अचानक मृत्यु भी आम है.

H5N1 वायरस कुछ स्थितियों में मनुष्यों को भी संक्रमित करने की क्षमता रखता है. हालांकि यह आम नहीं है, लेकिन जो लोग संक्रमित पक्षियों के सीधे संपर्क में आते हैं, उनके बीमार होने का खतरा अधिक होता है. मनुष्यों में H5N1 के लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और सांस लेने में तकलीफ शामिल हो सकते हैं. कुछ मामलों में, यह गंभीर श्वसन संक्रमण और यहां तक ​​कि मृत्यु भी हो सकती है.

अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदम

जिला प्रशासन की ओर से बर्ड फॉर्म में पाए गए H5N1 वायरस को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • संक्रमित पक्षियों को मारना: यह दुखद कदम है, लेकिन यह वायरस के प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक है. मृत पक्षियों को सुरक्षित रूप से निपटाया जाता है ताकि वायरस आगे न फैले.
  • संक्रमित फार्म के आसपास के क्षेत्र को कीटाणु रहित करना: इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि वायरस आसपास के खेतों या पक्षियों तक न फैले.
  • आवागमन पर रोक: संक्रमित फार्म के आसपास आवागमन को प्रतिबंधित करने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि लोग या वाहन वायरस को न फैलाएं.
  • पड़ताल: पशुपालन विभाग के अधिकारी आसपास के क्षेत्रों में अन्य पोल्ट्री फार्मों की निगरानी कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं और वायरस फैला है या नहीं.

आप क्या कर सकते हैं?

यदि आप जारखंड में रहते हैं, खासकर रांची के आसपास, तो एवियन इन्फ्लूएंजा के प्रसार को रोकने में आप अपनी भूमिका निभा सकते हैं. यहां कुछ युक्तियाँ दी गई हैं:

  • बीमार या मृत जंगली पक्षियों को न छुएं: यदि आप बीमार या मृत जंगली पक्षियों को देखते हैं, तो उन्हें न छुएं. इसके बजाय, अपने निकटतम वन विभाग के कार्यालय को सूचित करें.
  • मुर्गियों या अन्य पक्षियों को पकाते समय सावधानी बरतें: सुनिश्चित करें कि मुर्गियों या अन्य पक्षियों को हमेशा सुरक्षित आंतरिक तापमान पर पकाया जाता है.
  • संदिग्ध मामलों की रिपोर्ट करें: यदि आप अपने मुर्गियों या अन्य पक्षियों में किसी भी असामान्य लक्षण को देखते हैं, तो तुरंत अपने निकटतम पशु चिकित्सक से संपर्क करें.

एवियन इन्फ्लूएंजा एक गंभीर बीमारी हो सकती है, लेकिन सतर्कता और सावधानी बरतने से इसके प्रसार को रोका जा सकता है.