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तापमान के ताप ने तोड़ दिए सारे रिकॉर्ड, मई 2024 रहा इतिहास का सबसे गर्म महीना

May 2024 is the hottest May in history: पर्यावरण दिवस के अवसर पर विश्व मौसम विज्ञान संगठन द्वारा प्रकाशित की गई एक रिपोर्ट दुनिया के लिए चिंता विषय है. रिपोर्ट में वैश्विक तापमान को लेकर कई चेतावनियां दी गई हैं. 

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May 2024 is the hottest May in history
Courtesy: Social Media

May 2024 is the hottest May in history: तापमान के बढ़ते ताप ने इस साल अब तक कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. यूरोपीय आयोग की कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा की एक रिपोर्ट ने दुनिया को चौंका दिया है. रिपोर्ट के अनुसार इतिहास में अब तक जितने भी मई के महीने रहें उनमें मई 2024 सबसे गर्म रहा है.  वहीं, विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने एक रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात की प्रबल संभावना है कि साल 2024 से 2028 के बीच एक ऐसा साल होगा जो साल 2023 के सबसे अधिक तापमान के रिकॉर्ड को तोड़ देगा. 2023 अब तक का सबसे ज्यादा तापमान वाला साल है.

5 जून को पर्यावरण दिवस के अवसर पर जारी की गई वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि 2024 से 2028 के बीच वैश्विक औसत तापमान में भी बढ़ोतरी हो सकती है. ये संभावना है कि वैश्विक औसत तापमान में 1.5 डिग्री फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है.

वर्ल्ड एवरेज टेम्परेचर में दिनों दिन हो रही बढ़ोतरी

2023 का वर्ल्ड एवरेज टेम्परेचर पूर्व-औद्योगिक आधार रेखा से 1.45 डिग्री सेल्सियस ऊपर था. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पर्यावरण को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा था- हम सच्चाई के पल में हैं. और सच यह है कि पेरिस समझौते को अपनाए जाने के लगभग 10 साल बाद, दीर्घकालिक ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने का लक्ष्य खतरे में है.

उन्होंने कहा कि हमारी पृथ्वी हमसे कुछ कहना चाहती है. वह हमें कुछ बताना चाहती है. लेकिन हम उसकी न तो सुन रहे हैं और न ही देख रहे हैं.

पेरिस समझौते की हो रही अनदेखी

पेरिस समझौते के तहत देशों ने ग्लोबल एवरेज सरफेस टेंपरेचर को 2 डिग्री से नीचे रखने और इस शताब्दी के अंत तक इसे 1.5 डिग्री सेल्सियस के नीचे रखने पर सहमति जताई थी.

वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट दुनिया के लिए चेतावनी है. यह रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करती है  कि विश्व जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते में निर्धारित लक्ष्यों के करीब पहुंच रहा है.