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बर्ड फ्लू के H5N2 वेरिएंट से हुई पहली मौत, WHO ने की पुष्टि, जानें कितना घातक है ये स्ट्रेन

First death due to H5N2: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बर्ड फ्लू के नए वेरिएंट एच5एन2 से पहली मौत की पुष्टि की है. ये मौत मैक्सिको में हुई है. बर्ड फ्लू का ये नया स्ट्रेन कितना खतरनाक है आइए जानते हैं.

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bird flue variant H5N2
Courtesy: Social Media

First death due to H5N2: बर्ड फ्लू के नए वैरिएंट H5N2 से पहली मौत की पुष्टि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कर दी है. मैक्सिको के एक आदमी की बर्ड फ्लू के इस नए वेरिएंट से मौत हुई है. इससे पहले ये वैरिएंट किसी इंसान में नहीं पाया गया था. इस स्ट्रेन से ये पहली इंसानी मौत है. आमतौर पर फ्लू पक्षियों में होता लेकिन ये वायरस पक्षियों से इंसानों में भी ट्रांसफर हो सकता है. 5 जून को  WHO ने बताया कि 24 अप्रैल को मौत से पहले मैक्सिको के एक 59 साल के व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. मरीज को बुखार, सांस की समस्या, दस्त, मतली के साथ एवियन फ्लू के लक्षण थें.  

बर्ड फ्लू के ने वैरिएंट H5N2 से ये पहली वैश्विक इंसानी मृत्यु है.  बीते 23 मई को मैक्सिकन हेल्थ मिनिस्ट्री ने यूएन की हेल्थ बॉडी को इस संक्रमण से हुई पहली मौत के बारे में बताया था.

मुर्गी पालन मे मिला था नया वेरिएंट 

बर्ड फ्लू का नया वेरिएंट एच5एन2 इंसानों तक कैसे पहुंचा अभी तक इसके सोर्स की पुष्टि नहीं हो सकी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि मेक्सिको में इस वैरिएंट से कई लोग संक्रमित हो चुके हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो मार्च में मैक्सिको के मिचोआकेन के मुर्गी पालन में बर्ड फ्लू का नया वेरिएंट एच5एन2 पाया गया था.

क्या है बर्ड फ्लू और कितना खतरनाक है H5N2?

"एवियन इन्फ्लूएंजा या बर्ड फ्लू, एवियन (पक्षी) इन्फ्लूएंजा (फ्लू) टाइप ए वायरस के संक्रमण से होने वाली बीमारी है. ये वायरस स्वाभाविक रूप से दुनिया भर में जंगली जलीय पक्षियों में फैलते हैं और घरेलू मुर्गी और अन्य पक्षी और पशु प्रजातियों को संक्रमित कर सकते हैं. बर्ड फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस के वे प्रकार जो मुख्य रूप से पक्षियों को संक्रमित करते हैं, लेकिन मनुष्यों को भी संक्रमित कर सकते हैं या करते हैं. 

इलिनोइस विश्वविद्यालय के शिकागो स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की महामारी वैज्ञानिक कैटरिन वालेस ने कहा कि H5N2 से सार्वजनिक स्वास्थ्य को कम खतरा है, क्योंकि इसने मनुष्यों के बीच संचारित होने की क्षमता बहुत कम है.