menu-icon
India Daily
share--v1

कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर... क्या है दोनों में अंतर? मरीज की जान बचाने के लिए कौनसा ट्रीटमेंट जरूरी, पढ़ें

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के अनुसार दुनियाभर में 60 प्रतिशत हृदय रोगी अकेले भारत में हैं. डॉक्टरों की मानें तो ज्यादातर हृदय रोगियों की जान केवल इसलिए नहीं बच पाती क्योंकि बीमारी की सही जानकारी के अभाव में उन्हें समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता.

auth-image
Manish Pandey
कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर... क्या है दोनों में अंतर? मरीज की जान बचाने के लिए कौनसा ट्रीटमेंट जरूरी, पढ़ें

Llifestyle News:  कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर आज के समय की एक आम समस्या बनता जा रहा है, सबसे ज्यादा डराने वाली बात ये है कि अब नौजवानों में भी हार्ट फेलियर और कार्डियक अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जबकि कुछ सालों पहले हार्ट से संबंधित बीमारियां केवल 50-55 या उससे ज्यादा उम्र के लोगों में ही देखने को मिलती थीं.

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के अनुसार दुनियाभर में 60 प्रतिशत हृदय रोगी अकेले भारत में हैं.
जिस तेजी के साथ कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर के मामले जिस तेजी के साथ बढ़ रहे हैं, उन्हें लेकर हमें उतना ही सावधान रहने की जरूरत है. दरअसल ज्यादातर मामलों में दिल के रोगी की मौत सिर्फ इसलिए हो जाती है क्योंकि लोगों को पता ही नहीं होता है कि उसे कार्डियक अरेस्ट हुआ है या उसका हार्ट फेल हुआ है और वो दोनों को एक ही बीमारी समझकर उनको गलत ट्रीटमेंट देने लगते हैं.

पुणे स्थित मणिपाल हॉस्पिटल में एचओडी और कंसल्टेंट- कार्डियोलॉजी डॉक्टर अभिजीत जोशी ने बताया कि ये दोनों बीमारियां सुनने में भले ही एक जैसी लगती हैं लेकिन इन दोनों के लक्षण बिल्कुल अलग हैं. उन्होंने कहा कि रोगी की जान बचाने के लिए हमें रोग के लक्षणों को तुरंत जानने की जरूरत होती है.

कार्डियक अरेस्ट
दरअसल कार्डियक अरेस्ट में हार्ट अचानक काम करना बंद कर देता है. इस स्थिति में दिल की धड़कन रुक जाती है और शरीर खून को पंप करना बंद कर देता है.  कार्डियक अरेस्ट में व्यक्ति बेहोश हो सकता है और इस स्थिति में वह सामान्य रूप से सांस लेना बंद कर देत है. यदि उसे तुरंत ऑक्सीजन न मिले तो ऑक्सीजन की कमी से उसके दिमाग के सेल काम करना बंद कर सकते हैं और उसकी मौत हो सकती है.

वहीं यदि हम बात हार्ट फेलियर की करें तो हार्ट फेलियर की हमारा दिल शरीर को जरूरत के अनुरूप खून पंप नहीं कर पाता और समय के साथ यह समस्या और बढ़ सकती है और फिर यह बीमारी हार्ट अटैक जैसी घटना के रूप में सामने आती है. हार्ट फेलियर के आम कारणों में हाई ब्लड प्रेशर, कोरोनरी आर्टरी रोग और डायबिटीज शामिल हैं.

कार्डियक अरेस्ट के लक्षण

. अचानक बेहोश हो जाना
. पल्स या सांस का चलना बंद हो जाना.
. कोई प्रतिक्रिया न देना.
. सायनोसिस के लक्षण दिखाई देना, सायनोसिस में  शख्स की त्वचा ऑक्सीजन की कमी से फीकी, नीली या ग्रे पड़ जाती है.
. अपने शरीर से नियंत्रण खो देना.

हार्ट फेलियर के लक्षण
. सांस फूलना
. हार्ट बीट तेजी से बढ़ना या अनियमित हो जाना.
. खांसी या घबराहट बने रहना.
. सूजन और शरीर में पानी जमा हो जाना.

कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेल में अंतर
. कार्डियक अरेस्ट अचानक होता है और इसका कोई पूर्व संकेत नहीं मिलता, जबकि हार्ट फेलियर समय के साथ-साथ धीरे-धीरे बढ़ता है, जिसका कारण हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज हो सकते हैं.

. कार्डियक अरेस्ट में तुरंत इलाज न मिलने पर व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है.

हार्ट फेलियर में थकान, पैरों में सूजन और सांस लेने में परेशानी हो सकती है.

कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर में ऐसे दें मरीज को प्राथमिक इलाज

कार्डियक अरेस्ट आने पर कार्डियोपल्मोनरी रिस्यूसाइटेशन (CPR) मरीज के लिए सबसे अधिक लाभदाय होता है.  इसके अलावा मरीज को डिफाईब्रिलेशन (बिजली का झटका) दिया जाना बहुत जरूरी है ताकि शरीर में खून बहता रहे.

वहीं हार्ट फेलियर में दवाइयों के साथ-साथ जीवनशैली में परिवर्तन किया जाना शामिल है. हार्ट फेलियर के मरीज को कम नमक खाने, नियमित व्यायाम करने, धूम्रपान न करने, शराब न पीने आदि की सलाह दी जाती है.