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महिला ने इस्तेमाल किया यह टूल, त्वचा पर बने 20 ट्यूमर, हो गई ये गंभीर बीमारी

Melanoma Symptoms: अमेरिका देश के अलमाबा की रहने वाली 26 साल हेलेन बेली को गुआ शा इस्तेमाल करते दौरान शरीर में 20 ट्यूमर का पता चला. गुआ शा इस्तेमाल करते वक्त गर्दन के हिस्से पर गांठ के बारे में पता चला था. जब महिला ने इसकी जांच करवाई तो डॉक्टर ने बताया कि उन्हें स्टेज 4 का मेटास्टैटिक मेलेनोमा है जिसमें बचने की संभावना बेहद कम होती है.

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What Is Melanoma
Courtesy: Freepik

What Is Melanoma: अमेरिका देश के अलमाबा की रहने वाली 26 साल हेलेन बेली ने एक हैरान कर देने वाला खुलासा किया है. महिला रोजाना सूजन को कम करने के लिए गुआ शा का इस्तेमाल करती थी. गुआ शा इस्तेमाल करते दौरान महिला को गर्दन के हिस्से पर गांठ के बारे में पता चला. हेलेन का कहना है कि गांठ तेजी से बढ़ने लगी थी. जब उसने टेस्ट करवाएं तो पता चला कि उसके शरीर में 20 ट्यूमर मौजूद  हैं. 

यह ट्यूमर उसकी पीठ पर एक कैंसरग्रस्त मोल से पैदा हुए थे जिसे महिला ने सालों पहले हटा दिया था. डॉक्टरों के अनुसार यह कैंसर खतरनाक है और उन्हें स्टेज चार मेटास्टैटिक मेलेनोमा है जिसमें जिंदा रहने के केवल 22 प्रतिशत संभावना होती है. आइए विस्तार से मेलेनोमा नाम की बीमारी में जाते हैं.

क्या होता है मेलेनोमा

मेलेनोमा एक तरह का स्किन कैंसर है जो मेलेनोसाइट्स सेल्स में डेवलप होता है जो मेलेनिन का प्रोडक्शन करता है और स्किन को टैन या ब्राउन कलर देता है. एक्सपर्ट के मुताबिक, मेलेनोमा बाकी स्किन कैंसर के मुताबिक अलग होता है. लेकिन अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए तो खतरनाक साबित हो सकता है.  स्टडी के मुताबिक,मेलेनोमा 30  प्रतिशत से ज्यादा मौजूदा मस्सों में शुरू होता है. आंकड़ों के अनुसार मेलेनोमा सभी स्किन कैंसरों का लगभग 1 प्रतिशत है. आमतौर पर यह कैंसर 30 साल से कम युवाओं में ज्यादा नजर आती है. 

मेलेनोमा के लक्षण

एक्सपर्ट के अनुसार मेलेनोमा मस्सों, पपड़ीदार धब्बों, खुले घावों में पैदा होता है. मेलेनोमा का पता आप इन लक्षणों से पता लगा सकते हैं. जैसे की असामान्य आकार वाले तिल या मोल का शरीर पर होना, तिल या मोल के रंग में बदलाव, तिल या मोल का आकार  6 मिलीमीटर से ज्यादा होना, तिल या मोल में का शेप, कलर या साइज में बदलाव होना शामिल है.

मेलेनोमा का कारण

एक्सपर्ट के मुताबिक, मेलेनोमा का सबसे बड़ा कारण सूरज की बुरी किरणों के संपर्क में आना हो सकता है. सूरज के UV किरणें स्किन सेल्स के DNA को नुकसान पहुंचाता है जिससे जीन में बदलाव आता है जो सेल्स के बढ़ने और डिवाइड होने के तरीके को मदद करता है. समस्या गंभीर तब होती है जब स्किन का DNA डैमेज हो जाता है और सेल्स रिप्रड्यूस करना शुरू कर देता है.

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.  theindiadaily.com  इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.