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भारत में हो रहा रिवर्स माइग्रेशन, 3 कारणों से हैदराबाद, बेंगलुरु, दिल्ली चुन रहे हैं प्रोफेशनल्स

Reverse Migration In India: आपने हमेशा देखा होगा की लोग विदेशों में पढ़ाई और जॉब के लिए जाते हैं. इसके पीछे कई कारण होते हैं की वहां उनको बेहतर अवसर मिलते हैं और सैलरी भी भारत के मुकाबले अच्छी मिलती है. हालांकि, अब धीरे-धीरे ये वक्त बदल रहा है. इन दिनों देखने को मिल रहा है कि भारत में रिवर्स माइग्रेशन बढ़ रहा है. आइये समझें इसके कारण क्या हैं?

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Reverse Migration In India
Courtesy: hrmasia

Reverse Migration In India: विदेश में पढ़ाई और नौकरी का सपना लगभग हर भारतीय युवा का होता है. इसके पीछे कारण वहां मिल रहे अच्छे पैकेज और सुविधाएं होती हैं. इसी कारण लोग अपना देश छोड़ परदेश में नौकरी के लिए जाते हैं. हालांकि, अब वो दौर बीत रहा है. इन दिनों भारत में रिवर्स माइग्रेशन हो रहा है. विदेश छोड़ युवा भारतीय शहरों का चयन कर रहे हैं. आइये समझते हैं वो 3 कारण जिसकी वजह से प्रोफेशनल्स अब दिल्ली, हैदराबाद और बेंगलुरु की चयन कर रहे हैं.

सिकुड़ते विदेशी नौकरी बाजार के कारण हैदराबाद, बेंगलुरु और दिल्ली विदेश गए लोगों की पसंद बन रहे हैं. आर्थिक और करियर के लिए अब डिजिटल हो रहे भारत को चुन रहे हैं. आइये समझते हैं इसके पीछे कौन-कौन से कारण हैं?

सर्वे में सामने आया सच

रिवर्स माइग्रेशन खास तौर पर अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा हो रहा है. बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की रिपोर्ट में बताया गया कि विदेश में काम करने वाले भारतीयों की संख्या 2020 में 78% से घटकर 2023 में 54% हो गई है. ऐसा अब विदेशों में कम हो रही जॉब के कारण हो रहा है. 52% नौकरी के अवसरों, 37% आय और जीवन की लागत और 29% नवाचार और डिजिटलीकरण के लिए भारत का चुनाव कर रहे हैं. इसके साथ ही बहुत से लोग परिवार के लिए भारत लौट रहे हैं.

पहला कारण

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए हैदराबाद लौटे प्रोफेशनल एस सुदर्शन राव ने कहा कि मैं 2020 में स्टूडेंट वीजा पर यूके गया. तब उम्मीद थी कि पढ़ाई के बाद अच्छी नौकरी मिल जाएगी. कोर्स पूरा करने के बाद कोई अच्छी जॉब नहीं मिली. मेरी पत्नी मेरे साथ सफर करती रही. काम चलाने के लिए छोटे-छोटे स्टोर में काम करना पड़ा. इसके बाद मैने फैसला किया कि हैदराबाद लौट जाउंगा. कम से कम यहां मेरी 6 अंक की सैलरी में जीवन तो बेहतर चल जाएगा. 

हैदराबाद लौटने के बाद एस सुदर्शन राव ने कहा कि मैं यूके के मुकाबले इंडिया में अच्छी नौकरी पा ली. इसके लिए मेरे काम मेरी विदेशी डिग्री काम आई. मुझे एहसास हुआ कि यहां विदेशों के मुकाबले अधिक काम है. इसमें आईटी, वित्त, फार्मा आदि क्षेत्र शामिल हैं.

दूसरा कारण

कनाडा से लौटे खेतान कुरैशी ने बताया कि संघर्ष के दिनों मुझे अजीब नौकरियां करनी पड़ी. मैं अपनी ज़रूरतें पूरी नहीं कर पा रहा था. कनाडा में मेरा खर्च मेरी आय से ज्यादा था. इसके लिए मुझे कर्ज लेने पड़े. सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में नौकरी करने के लिए मैं हैदराबाद पहुंच गया. अब मैं अपनी आय का 40 फीसदी बचा पा रहा हूं. ये किसी विदेशी नौकरी से बेहतर है.

तीसरा कारण

दो कारणों के साथ कुछ रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि सामाजिक व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा, राजनीतिक स्थिरता या अधिक स्वीकार्य समाज भी नौकरी के लिए जरूरी है. अगर आप काम कर रहे हैं तो आपका परिवार आपके लिए महत्व रखता है. ये विदेश में नहीं मिल पा रहा. इस कारण भी कई लोग भारत लौट रहे हैं.