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India Daily
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क्या स्विस Peace Summit रोक देगा यूक्रेन की तबाही! या यूंही गरजते रहेंगे रूसी टैंक? 

Ukraine Peace Summit: स्विट्जरलैंड में रूस यूक्रेन जंग को रोकने के लिए यूक्रेन शांति सम्मेलन की आज से शुरुआत हो रही है. इस समिट में भाग लेने के लिए दुनियाभर के देशों के नेता और प्रतिनिधि पहुंचे हैं. सम्मलेन की शुरुआत से पहले ही इसके उद्देश्य को बड़ा झटका लगा है क्योंकि इस पीस समिट में कई बड़े देशों ने भाग लेने से इंकार कर दिया है. इससे पहले भी यूक्रेन जंग को लेकर तीन शांति सम्मेलन हो चुके हैं जो बेनतीजा रहे हैं.

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Shubhank Agnihotri
Ukraine Peace Summit
Courtesy: Social Media

Ukraine Peace Summit: दुनियाभर के देशों के नेता स्विट्जरलैंड में होने वाले यूक्रेन शांति सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहुंच रहे हैं. इस शांति वार्ता का अहम लक्ष्य रूस पर दबाव डालकर यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध को रोकना है. यह समिट स्विट्जरलैंड के बर्जनस्टॉक रिसॉर्ट में होगा. दो दिवसीय यह सम्मेलन युद्ध रोकने के प्रयास में चौथा समिट होगा. इससे पहले रूस -यूक्रेन जंग को रोकने के लिए कोपेनहेगन, जेद्दा और माल्टा में तीन समिट हो चुके हैं. यह समिट बेनतीजा रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, इस समिट में 160 देशों को न्योता भेजा गया था, जिसमें भारत सहित कुल 90 देशों के प्रतिनिधि ही भाग लेंगे.

कई बड़े देशों ने इस समिट में शामिल होने से पहले ही मना कर दिया था. रूस को इस समिट में आमंत्रित नहीं किया गया था.इस वार्ता में लेकिन रूस के सबसे प्रमुख सहयोगी चीन ने शामिल होने से मना कर दिया है. वहीं, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने भी इस सम्मेलन से दूर रहने का फैसला लिया है. यूक्रेन के बड़े समर्थक अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन भी इस समिट में हिस्सा नहीं लेंगे. बाइडन की जगह  उप राष्ट्रपति कमला हैरिस इस समिट में शरीक होंगी. चीन का शांति वार्ता में ना शामिल होना इस वार्ता के लक्ष्य को जरूर कमजोर करेगा. वैश्विक नेताओं की सुरक्षा के लिए 4 हजार सैनिकों को तैनात किया गया है. 

पश्चिम के प्रयास को लगा बड़ा धक्का 

रूस के सहयोगी देशों में भारत, हंगरी, तुर्की इस वार्ता में शामिल हो रहे हैं. वहीं, चीन ने इसमें हिस्सा लेने से मना कर दिया है. चीन के इसमें शामिल ना होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को रूस पर दबाव डालने में परेशानी का सामना करना होगा. चीन ने इसे व्यर्थ का प्रयास कहकर भाग इसमें भाग लेने से इंकार कर दिया. चीन के इस समिट में ना शामिल होने पर यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की की प्रतिक्रिया सामने आई है. जेलेंस्की ने चीन पर आरोप लगाया कि वह सम्मेलन में भाग ना लेकर रूस की मदद कर रहा है. हालांकि, चीनी विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों का खंडन कर दिया. रूस पर दबाव डालने के लिए हो रहे इस सम्मेलन में कई देशों ने भाग लेने से इंकार कर दिया है. ऐसे में पश्चिमी दुनिया के रूस को अलग-थलग करने के प्रयास को भी बड़ा झटका लगा है. 

पुतिन ने जंग रोकने के लिए रखी शर्तें 

स्विट्जरलैंड में होने वाले पीस समिट से पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भी बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि यूक्रेन के खिलाफ जंग तभी रुक सकती है जब यूक्रेनी आर्मी उन चारों इलाकों से पीछे हट जाए जिन पर रूस ने दावा किया है. इसके अलावा यूक्रेन को नाटो में शामिल होने की अपनी जिद को भी त्यागना होगा. पुतिन ने इस दौरान कहा कि यूक्रेन को सीमाओं से अपनी सेना को भी हटाना होगा साथ ही पश्चिमी देशों को रूस से पाबंदियां हटानी होंगी.  यूक्रेन के साथ जंग के बाद यह पहली बार था जब रूसी राष्ट्रपति ने जंग को खत्म करने के पहलू पर खुलकर बात की थी और अपनी शर्तें सामने रखी थीं. हालांकि यूक्रेन ने रूसी शर्तों को नकार दिया है.