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'कमजोर' मोदी सरकार पर खुश क्यों हो रहा है चीन? समझ लीजिए सारी वजह

India China Relation: चीन भारत के लोकसभा चुनाव के नतीजों से बेहद उत्साहित है. सीपीसी के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि केंद्र में गठबंधन सरकार होने की वजह से भारत की विकास नीतियां प्रभावित हो सकती हैं.

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China Modi
Courtesy: Social Media

India China Relation: चीन भारत में हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के नतीजों से बेहद खुश है. इस खुशी का कारण है भारत में किसी भी राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत ना मिलना. चीनी नेतृत्व को लग रहा है इससे भारत की विकास नीतियां प्रभावित होंगी क्योंकि लगातार दो बार पूर्ण बहुमत से सरकार चलाने वाली BJP को अब अपने सहयोगी घटक दलों की मदद से सरकार चलाने के लिए मजबूर होना होगा. चीन यह बात भली-भांति जानता है कि एशिया के अंदर उसके प्रभाव को काउंटर करने की शक्ति भारत रखता है. चीनी विशेषज्ञ इस बात पर खुशी जता रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की ताकत कम हो गई है और इससे भारत की विकास और विनिर्माण नीतियों में बड़ा परिवर्तन आएगा. 

भारत के लिए अब होगी मुश्किल

चीन सरकार के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भारत के लोकसभा चुनावी नतीजों पर लिखा 'मोदी गठबंधन को चुनाव में मामूली बहुमत से मिली जीत.'  इस स्टोरी के सबहेड में लिखा गया  'मोदी के तीसरे कार्यकाल में आर्थिक सुधार एक मुश्किल कदम: एक्सपर्ट ' . ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि चीनी एक्सपर्ट को लगता है कि भारत अब चीन के साथ विनिर्माण प्रतिस्पर्धा करने और कारोबारी माहौल को सुधारने में मोदी को अब मुश्किलों का सामना करना होगा. 

आर्थिक संकट का दौर 

चीन के एक अन्य अखबार चाइना डेली ने भी मोदी की गठबंधन सरकार पर अपनी प्रतिक्रिया दी. चाइना डेली ने लिखा कि बीजेपी को बड़ा नुकसान होने के बाद भी मोदी ने जीत की घोषणा की. चाइना डेली की मुख्य बातें अर्थव्यवस्था पर केंद्रित थीं.  इसमें कहा गया कि ताजा लोकसभा चुनाव परिणाम वोटर्स की प्राथमिकताओं में बड़े बदलाव का संकेत हैं, क्योंकि भारत आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है. 

चीन को हो रहा है नुकसान 

चीन इस बात से बेहद चिंतित है कि मजबूत सरकार से भारत ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग का पावर हाउस बन जाएगा जिससे चीन की आर्थिक संभावनाओं और प्रगति को बड़ा नुकसान पहुंचेगा.  मोदी सरकार की मेक इन इंडिया स्कीम के अंतर्गत हाल के कुछ वर्षों में भारत ने चीन के मेड इन चाइना प्रोजेक्ट को बड़ी चुनौती दी है. कारोबारी माहौल को आसान बनाने के लिए मोदी सरकार ने अपने पहले और दूसरे कार्यकाल में ग्लोबल मैन्यूफैक्चर्स को चीन से दूर कर दिया. कई प्रमुख कंपनियां चीन से अपना कारोबार समेट कर पड़ोसी देशों ताइवान, हांगकांग या भारत में शिफ्ट कर रही हैं. एप्पल उत्पादों का निर्माण करने वाली कंपनी फॉक्सकॉन अपना प्रोडक्शन चीन से ट्रांसफर करके भारत शिफ्ट कर रही है. फॉक्सकॉन को भारत में अपना कारोबार करने के लिए सरकार से लाखों डॉलर की सब्सिडी सहायता दी गई है. 

क्या नीति-निर्माण में होगा बदलाव? 

भारत ने ग्लोबल प्रोडक्शन कंपनियों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की शुरुआत की है और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तरीकों को आसान किया है. इसके अलावा सरकार ने मंजूरी देने के लिए रेड टेपिस्म कल्चर पर भी लगाम लगाई है.दुनियाभर की कंपनियां चीन में अपना कारोबार इसलिए करना चाहती हैं क्योंकि वहां योजनाओं को त्वरित मंजरी मिलती है और सस्ते कौशल श्रमिक भी मिलते हैं. भारत सरकार की इन योजनाओं से चीन को नुकसान पहुंचा है. केंद्र में गठबंधन सरकार  होने से चीनी नीति निर्माता खुश हो रहे हैं, उन्हें लगता है कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था नीतियों में परिवर्तन आएगा.