USA-China Relation: अमेरिकी सांसदो के एक समूह ने गुरुवार को ताइवान के राष्ट्रपति से मुलाकात की. अमेरिका के इस कदम से चीन का खफा होना लाजिमी है.अमेरिकी सांसदों की इस यात्रा से वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच बेहतर होते संबंध पटरी से उतर सकते हैं साथ ही क्षेत्र में ताइवान के लिए भी संकट की स्थिति पैदा कर सकते हैं. बीजिंग ताइवान के अंदर इस तरह की यात्राओं को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे के तौर पर देखता है. अमेरिका का कदम यह चीन के उस दावे के विपरीत है जिसमें वह प्रायद्वीपीय देश पर अपना दावा करता है.
अमेरिकी कांग्रेसी सांसदों के दल की यह यात्रा हाउस स्पीकर नेंसी पेलोसी की यात्रा के दो वर्षों बाद हो रही है. नेंसी की ताइपे यात्रा के दौरान द्वीपीय देश के साथ चीन के संबंध बेहद तनावग्रस्त हो गए थे. चीन ने अमेरिका के इस कदम से नाराज होकर ताइवान के चारों ओर युद्धस्तर की तैयारी कर दी थी. बीजिंग ने ताइपे के चारों ओर बैलिस्टिक मिसाइल, टैंकर, सागर में मिसाइलें दाग और उसके ऊपर सैन्य विमान उड़ाकर विरोध दर्ज कराया था.
BREAKING: Chairman @RepGallagher announces his arrival in Taiwan, leading a congressional delegation featuring Ranking Member @CongressmanRaja, @RepMoolenaar, @RepDustyJohnson, and @RepMoulton. pic.twitter.com/gxdscOcVEU
— Select Committee on the Chinese Communist Party (@committeeonccp) February 22, 2024
रिपब्लिकन पार्टी के माइक गैलाघेर के नेतृत्व में ताइवान पहुंचे अमेरिकी दल ने राष्ट्रपति त्साई इंग वेन के साथ बैठक की. दल ने अमेरिका और ताइवान के बीच मजबूत संबंधों और साझेदारी के नए आयाम विकसित करने पर वार्ता की. गैलाघेर ने कहा कि हमारे संबंध पहले की तुलना में कहीं ज्यादा भरोसेमंद और मजबूत हुए है. माइक के साथ ताइवान गए दल में राजा कृष्णमूर्ति, जॉन मूलेनर, अन्य सदस्यों में प्रतिनिधि जॉन मूलेनार, डस्टी जॉनसन, आर-एस.डी और सेठ मौलटन, डी-मास भी शामिल हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के अधिकांश देशों की तरह, अमेरिका औपचारिक रूप से ताइवान को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता है, लेकिन द्वीप के साथ मजबूत अनौपचारिक संबंध बनाए रखता है . इसके अलावा ताइवान की रक्षा के लिए कानून के मुताबिक आवश्यक हथियार मुहैया कराता है.