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Six Day War: इजरायल का वह भीषण युद्ध, 6 दिन में ही घुटने पर आ गए थे बड़े-बड़े देश

Six Day War: 57 साल पहले इजरायल ने एक ऐसा युद्ध लड़ा कि दुनिया का नक्शा बदलकर रख दिया था. 6 दिन के अंदर ही इजरायल ने कई देशों को घुटने पर ला दिया था और अपनी सैन्य ताकत

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India Daily Live
Israel Hamas war
Courtesy: Social Media

हाल ही में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फिलिस्तान के चरमपंथी गुट हमास को चेतावनी देते हुए कहा है कि उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाएगी कि वे सपने में भी इजरायल पर हमला करने के बारे में नहीं सोचेंगे. साथ ही, इजरायल के राष्ट्रपति रियूवेन रिवलिन ने इजरायल की जनता को चौकन्ना रहने की बात कही है. इजरायली सेना ने दावा किया है कि 10 मई से अब तक हमास ने एक हजार से ज्यादा रॉकेट हमले किए हैं. दुनिया के लगभग सभी मुस्लिम मुल्क फिलिस्तीनियों के पक्ष में खड़े हैं और इजरायल के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग कर रहे हैं.

सवाल ये उठता है कि क्या अरब के देश इजरायल का मजबूती से मुकाबला कर पाएंगे क्योंकि पहले भी ऐसा हो चुका है कि इजरायल अरब देशों को जंग में मात दे चुका है. इजरायल और अरब देशों के बीच 1967 में हुए युद्ध ने मध्य पूर्व के भौगोलिक नक्शे को ही बदल दिया था. 

6 दिन का युद्ध

पहले भी इजरायल और अरब देशों के बीच युद्ध हो चुका है. जिसमें मिस्र, सीरिया और जॉर्डन जैसे देश शामिल थे. यह युद्ध 1967 के जून महीने में हुआ था. 6 दिन चली इस जंग के नतीजे ऐतिहासिक रहे थे. मात्र छह दिनों में इजरायल ने इस जंग को जीत कर विश्व का नक्शा बदल दिया था. साल 1967 के युद्ध को टालने के लिए दोनों देशों के बीच काफी खींचतान चली लेकिन यह युद्ध नहीं रुक सका था.

साल 1967 के युद्ध में इजरायल के हमले ने मिस्र और उसके सहयोगी देशों की एयरफोर्स को तबाह कर दिया. इस जंग में इजरायल को जीत मिली थी. उसने मिस्र से सिनाई प्रायद्वीप, गाजा पट्टी, जॉर्डन से वेस्ट बैंक, पूर्वी यरुशलम और सीरिया से गोलान हाइट्स छीन लिया था. छह दिन चला यह युद्ध संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप और संघर्षविराम समझौते के बाद खत्म तो हुआ लेकिन तब तक कुछ तबाह हो चुका था.

कैसा रहा 6 दिन का युद्ध?

5 जून 1967

काफी प्रयासों के बाद भी अरब के देश इजरायल को युद्ध के लिए उकसाने से बाज नहीं आ रहे थे. अंत में जब अरब के देशों ने सारी हदें पार कर दीं, तब इजरायल ने 5 जून 1967 को अपना ऑपरेशन फोकस शुरू किया और मिस्र के हवाई ठिकानों पर अटैक कर दिया. इजरायल के करीब 200 लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी और मिस्र की वायुसेना के ठिकानों को निशाना बनाया. जिसमें इजरायल ने मिस्त्र के 18 अलग-अलग ठिकानों पर अटैक किया और मिस्त्र की लगभग 90 प्रतिशत वायुसेना को तबाह कर दिया था.

5 जून 1967 की शाम तक इजरायली वायुसेना ने मध्य पूर्व के आसमान पर अपना कब्जा जमा लिया था. वहीं, मिस्र में जमीनी युद्ध 5 जून से शुरू हुआ था. हवाई हमलों के साथ, इजरायली टैंक और सेना सीमा पार कर सिनाई प्रायद्वीप और गाजा पट्टी में घुस गई थी. 

6 जून 1967

जमीनी स्तर पर मिस्त्र की सेना काफी हद तक मुकाबला कर रही थी लेकिन बाद में मिस्त्र के फील्ड मार्शल अब्देल हकीम आमेर की तरफ से मोर्चे से पीछे हटने के आदेश से सेना के जवान खफा हो गए. उसके बाद भी इजरायली सेना बम बरसाती रही जिसमें काफी लोग हताहत हुए. जिसे देखकर जॉर्डन ने यशरुलम में इजरायली ठिकानों पर हमला कर काफी देर तक गोलीबारी की थी. 

7 जून 1967

इसे देखते हुए इजरायल ने पूर्वी यरुशलम और वेस्ट बैंक पर जॉर्डन के विनाशकारी पलटवार का जवाब दिया. 7 जून को इजरायली जवानों ने यरुशलम की पवित्र धरती पर कब्जा जमा लिया और वेस्टर्न वॉल पर प्रार्थना करके अपनी जीत का जश्न मनाया. 

8 जून 1967

युद्ध अपने अंतिम चरण पर था. वहीं इजरायल की उत्तरी सीमा से सीरिया ने हमला शुरू कर दिया था. जिसकी वजह से 8 जून 1967 को इजरायली सेना दल बल के साथ सीरिया के उत्तरी सीमा की ओर रवाना हो गई थी.  

9 जून 1967

जंग के अंतिम चरण में इजरायली सेना 9 जून 1967 को सीरिया की उत्तरी सीमा पर पहुंच गई. भारी बमबारी के बाद इजरायल ने इस इलाके पर कब्जा जमा लिया जिसे गोलन हाइट्स के नाम से जाना जाता है.

10 जून 1967

यह इस युद्ध का अंतिम दिन था. यह वही दिन था. जब इजरायल ने यह साबित कर दिया था कि वह कभी-भी किसी का भी सामना कर सकता है. 10 जून 1967 संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप के बाद संघर्ष विराम के समझौते के साथ यह जंग खत्म हुई लेकिन इस युद्ध ने मध्यपूर्व का नक्शा बदल दिया. अपनी हार से अरब के नेता आश्चर्यचकित थे. मिस्र के राष्ट्रपति नासिर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.