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अंतरिक्ष से कैसा दिखता है रामसेतु? यूरोपियन एजेंसी ने दिखाई ऐसी तस्वीर कि नहीं हटेंगी नजरें

Ram Setu News: हिंदू धर्म में रामसेतु की बड़ी मान्यता है. हमारे धार्मिक ग्रंथों में भी इसका जिक्र किया गया है. य़ह चर्चा में इसलिए आया है क्योंकि यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने रामसेतु की एक खूबसूरत तस्वीर भी शेयर की है. तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप से श्रीलंका तक फैली यह चूना पत्थर की एक श्रंखला है. इसके बारे में कहा जाता है कि 15वीं सदी तक इसका इस्तेमाल होता था. इसके बाद के आए तूफानों में यह धीरे-धीरे नष्ट हो गया.

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Ram Setu
Courtesy: Social Media

Ram Setu News: हिंदू धर्म में रामसेतु का बड़ा महत्व है. कन्याकुमारी से लेकर श्रीलंका तक बने इस सेतु को एडम ब्रिज भी कहा जाता है.लंबे समय से इसे राष्ट्रीय धरोहर बनाए जाने की मांग की जा रही है. यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी ने अपने कॉपर्निकस सेंटिनल-2 सैटेलाइट से इसकी खूबसूरत तस्वीर ली है. यह भारत के रामेश्वरम द्वीप और श्रीलंका के मन्नार द्वीप के बीच प्राकृतिक चूना पत्थर की एक श्रंखला है. कहा जाता है कि 48 किमी लंबा यह पुल 15वीं शताब्दी तक चलने लायक था. 

रामायण महाकाव्य के अनुसार, जब भगवान श्रीराम ने रावण की लंका पर आक्रमण किया था तब उनकी वानर सेना ने इस पुल का निर्माण किया था.वाल्मीकि रामायण में भी बताया गया है कई दिनों के बाद वानरों ने इस बात का पता लगाया था कि पुल कहां बनाया जाना चाहिए ताकि कम दूरी तय करके लंका पहुंचा जा सके. ईसाई धर्म के लोगों का मानना है कि इस पुल को आदम ने बनवाया था. इसी वजह से इसे एडम ब्रिज भी कहा जाता है. नासा की ओर से जारी की गई तस्वीरों के बाद वैज्ञानिकों ने इस पर ध्यान देना शुरु किया. इसके बाद ही रामसेतु पर चर्चा  तेज हुई. 

 

तूफानों की वजह से नष्ट हुआ पुल 

इस पुल का निर्माण कैसे हुआ, इस बारे में कई मान्यताएं हैं. हालांकि पुरातात्विक साक्ष्यों से पता चलता है कि ये चूना पत्थर की चट्टानें उस भूमि की अवशेष हैं जो कभी भारत को श्रीलंका से जोड़ती थीं. अभिलेखों के अनुसार, यह पुल 15वीं सदी तक इस्तेमाल करने लायक था, लेकिन तूफानों के कारण यह धीरे-धीरे नष्ट हो गया. 

चैनल बनाने पर लगी रोक

साल 2005 में यूपीए की सरकार में यहाँ पर एक चैनल बनाने की बात हुई थी. इसके लिए रामसेतु का एक हिस्सा तोड़ा जाना था. इस प्रोजेक्ट का काफी विरोध हुआ था.इस प्रोजेक्ट का समर्थन करने वाले लोगों का कहना था कि रामसेतु के कारण जहाजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. यदि इसके बीच से चैनल खोला जाता है तो 780 किमी की दूरी कम हो जाएगी. हालांकि 2007 में कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी.