Pakistan News: पाकिस्तान नेशनल असेंबली के अपर हाउस ने मंगलवार को उस बिल को खारिज कर दिया जिसमें रेप के दोषियों और यौन अपराधियों को सार्वजनिक स्थान पर फांसी देने की मांग की गई थी. समाचार पत्र एक्सप्रेस ट्रिब्यून की खबर के मुताबिक, जमात ए-इस्लामी (JI) पार्टी के सीनेटर मुश्ताक अहमद खान ने सोमवार को इस बिल को सदन के विदाई सत्र में पेश किया था.
सीनेटर मुश्ताक अहमद खान ने सदन में कहा कि मुल्क के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत में ही अकेले 1122 रेप के मुकदमों को बीते पांच सालों में दर्ज किया गया है. इसमें पुलिस मात्र 581 दोषियों को ही पकड़ने में कामयाब रही है जबिक सजा की दर उससे भी ज्यादा चौंकाने वाली है.
पकड़े गए दोषियों में से केवल 87 लोगों को ही सजा का सामना करना पड़ा है. सीनेटर ने बताया कि बच्चों से बलात्कार के आरोपी 152 लोगों को बरी कर दिया गया, जबकि अदालतों ने उनमें से केवल 64 लोगों को ही सजा सुनाई. एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2023 के पहले छह महीनों में हर महीने 12 बच्चों को यौन उत्पीड़न का निशाना बनाया गया.
सीनेटर ने मांग की मुल्क में रेप जैसे जघन्य अपराध को खत्म करने के लिए सार्वजनिक स्थान पर यदि चार लोगों को मौत की सजा दी जाए तो यह अपराध मुल्क में हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा. हमें भी अमेरिका और यूरोप जैसे देशों से सीख लेनी चाहिए जो अपराध खत्म करने के लिए कठोर नियम बनाते हैं और उनका पालन होता रहे यह सुनिश्चित करते हैं.
पाकिस्तान मुस्लिम लीग ( क्यू ) के सीनेटर कामिल आगा खान ने इस बिल का समर्थन किया. उन्होंने अमेरिका के उन नियमों का हवाला देते हुए कहा कि अपराध के खात्मे के लिए किस तरह अमेरिकी अधिकारी आरोपियों को खतरनाक इंजेक्शन देने का वीडियो जारी करते हैं. सऊदी अरब में भी सार्वजनिक स्थान पर फांसी की सजा दी जाती है. इस्मामिक देश होने के नाते हमें उन चीजों पर अधिक ध्यान देना चाहिए जो हमारे लिए सही हैं न कि उन तथ्यों पर बहस करनी चाहिए जो दुनिया में चल रहे हैं. पीटीआई के सीनेटर ने भी इस बिल का समर्थन किया. हुमायूं मोहम्मद ने कहा कि जहां पब्लिक स्पेस में सजा सुनाए जाने का प्रावधान है वहां अपराध की दर भी अन्य देशों की तुलना में बेहद कम है.
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज ने इस बिल का विरोध किया. दोनों दलों के प्रतिनिधियों ने कहा कि देश में वर्तमान में लागू सजा देने का नियम तर्कसंगत है. सार्वजनिक स्थान पर सजा देने से हमारे न्यायतंत्र में कोई खास परिवर्तन नहीं आएगा. हालांकि हमें अपने पुराने न्याय और कानूनी तंत्र में सुधार करने की जरूरत है.
बिल पर मतदान के लिए सादिक संज्र ने जब अनुमति दी तब इसके समर्थन में 14 वोट पड़े जबकि विरोध में 24 वोट पड़े. इस तरह यह बिल सदन से पारित नहीं हो सका. इसके बाद स्पीकर ने इस बिल को खारिज कर दिया.