menu-icon
India Daily
share--v1

क्या करें कोई रास्ता ही नहीं! पाक को पैसे देने के लिए IMF ने रख दी ऐसी शर्तें जिन्हें सुन हिल गए PM शरीफ 

Pakistan News: पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अधिकारियों के बीच हुई वार्ता बगैर किसी मुद्दे का समाधान किये बिना समाप्त हो गई. आर्थिक संकट का सामना कर रहे पाक को तत्काल राहत के लिए वित्तीय सहायता की जरूरत है.

auth-image
India Daily Live
Pak Pm IMF
Courtesy: Social Media

Pakistan News: पाक की आर्थिक हालत कैसी है, इससे पूरी दुनिया वाकिफ है. पाक कर्ज के बोझ तले सांसें ले रहा है. उसके हुक्मरान जगह-जगह से राहत पाने के लिए जोर जमाइश कर रहे हैं. एक वक्त पाक को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष IMF से राहत मिलती दिख रही थी, लेकिन अब उसने भी अपने हाथ खड़े कर लिए हैं. ऐसे में पाक को बड़ा झटका लगा है. पाक और IMF अधिकारियों के बीच हो रही बैठक बेनतीजा रही. इस बातचीत में आयकर की दरों, स्वास्थ्य और कृषि जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी. इस कारण IMF ने पाक अधिकारियों के साथ अपनी बातचीत रोक दी. 

पाकिस्तान के अंदर महंगाई सातवें आसमान पर है. पाक सरकार ऐसे में वेतनभोगी और गैर-वेतनभोगी करदाताओं से 45 फीसदी टैक्स लेने का विचार कर रही है. यह टैक्स उन लोगों पर लगाए जाने का विचार है जिनकी मासिक आय 4.67 लाख रुपये से ज्यादा है. पाक में पांच लाख से ज्यादा मासिक आय पर पहले से ही 35 फीसदी कर देने का नियम लागू है. 

पाक सरकार ने दिया प्रस्ताव 

चूंकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष अपनी शर्तों को लेकर कोई नरमी नहीं दिखा रहा है. ऐसे में पाक की गठबंधन सरकार उसकी शर्तों को मान लेती है तो उसका प्रभाव मुल्क की जनता पर पड़ना तय है. सरकार को जनता के भयानक गुस्से का भी सामना कर सकता है. IMF ने पाक के ऊपर अगले बजट में निर्यातकों के ऊपर टैक्स बढ़ाने का दबाब डाल रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, पाक सरकार इस शर्त को मानने के लिए राजी हो गई है. पाकिस्तान में इस साल निर्यातकों ने 86 अरब रुपये मुल्क भेजा है. यह वेतनभोगी कर्मियों के कर से 280 फीसदी कम है. IMF को मनाने के लिए पाक सरकार ने पेंशन पर  भी टैक्स लगाने की पेशकश की है. 

क्या चाहता है IMF? 

पाक सरकार आईएमएफ की शर्तों को मानने के लिए गैर-वेतनभोगी लोगों पर टैक्स की दर को 45 फीसदी बढ़ाने के लिए तैयार है, लेकिन वह वेतनभोगी लोगों को इस दर से बाहर रखना चाहती है. सरकार का मानना है कि गैर-वेतनभोगी लोग व्यावसायिक खर्च को छोड़कर टैक्स देते हैं जबकि,वेतनभोगी करदाता अपनी पूरी आय पर टैक्स देता है. पाक पीएम वेतनभोगी लोगों पर टैक्स बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं. आईएमएफ निम्न आय के लोगों पर भी कर की उच्च दर चाहता है जिसे पाक सरकार मानने से इंकार कर रही है.