menu-icon
India Daily
share--v1

 रूस से दोस्ती भारत के लिए बन सकती है बड़ी मुसीबत! कहीं साथ ना छोड़ दे ये मजबूत देश

India Russia Relation: भारत और रूस की दोस्ती की पूरी दुनिया में मिसाल दी जाती है. रूस ने संकट के समय भारत की मदद की तो भारत ने भी रूस की दोस्ती का कर्ज चुकाया है. यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए और उसकी संपत्तियों को जब्त कर लिया. प्रतिबंधों के कारण रूस पूरी दुनिया से अलग-थलग पड़ गया. हालांकि इस दौरान उसे भारत का भरपूर साथ मिला है, भारत ने यूएन से लेकर तमाम वैश्विक मंचों पर रूस का साथ दिया है. कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है रूस के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों के चलते भारत अपना एक अहम सहयोगी खो सकता है.

auth-image
Shubhank Agnihotri
India Japan Relation
Courtesy: Social Media

India Russia Relation: भारत ने दुनियाभर के देशों के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को सहज रूप में चलाने की भरपूर कोशिश की है. भारत के दुनिया के हर शक्तिशाली देश के साथ अच्छे संबंध हैं. जी 7 समूह का सदस्य देश ना होने के बाद भी भारत को शिखर सम्मेलन में बुलाया गया. नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें दुनिया के लगभग सभी शक्तिशाली देशों के प्रमुखों से शुभकामनाएं भी मिलीं. इनमें से कई तो भारतीय प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल थे.  भारत की वैश्विक कूटनीति के गलियारों में खूब तारीफ होती है लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में भारत के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है. इस मुसीबत के पीछे की बड़ी वजह है भारत का रूस को लगातार समर्थन. रूस से दोस्ती भारत को खतरे में डाल सकती है. 

व्यापारिक मोर्चे पर हो सकता है बड़ा नुकसान 

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है भारत के रूस के साथ हालिया संबंधों को देखते हुए जापान कड़ा कदम उठा सकता है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जापान भारत की कुछ कंपनियों पर प्रतिबंध लगा सकता है. इससे भारत को व्यापारिक मोर्चे पर बड़ी हानि का सामना करना पड़ सकता है. भारत और जापान के बीच हमेशा से ही बहुत अच्छे रिश्ते रहे हैं, हालांकि अब जापान सरकार इन पर प्रतिबंध लगाने का विचार कर रही है. खबर है कि यह प्रतिबंध रूस प्रशासन और रूसी संगठनों से संबंध रखने वाली कंपनियों पर लगाया जाएगा. 

प्रतिबंधों की लिस्ट में शामिल हैं ये देश 

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जापान सरकार के चीफ सेक्रेटरी योशिमासा हयाशी ने हाल ही में जी 7 देशों के शिखर सम्मेलन में प्रतिबंधों को लेकर भारत पर चर्चा की थी. इन प्रतिबंधों में चीन, यूएई, उजबेकिस्तान, और भारत की कंपनियों का जिक्र है. इन देशों की कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद है. हालांकि जापान सरकार ने आधिकारिक पर इन प्रतिबंधों के बारे में कुछ भी नहीं कहा है. हालांकि ये प्रतिबंध सिर्फ भारतीय कंपनियों पर ही नहीं अन्य देशों की कंपनियों पर भी लगाए जाएंगे. 
 

पूरी दुनिया से अलग-थलग पड़ गया रूस 

रूस यूक्रेन के खिलाफ फरवरी 2022 से युद्ध लड़ रहा है. इस युद्ध को होते हुए दो साल से ज्यादा समय बीत चुका है फिर भी इसके रुकने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं. वैश्विक स्तर पर कई देशों ने इस जंग को रोकने के प्रयास किए हैं लेकिन दोनों देशों के हटी रवैये के कारण इसका समाधान अब तक ढाक के तीन पात जैसा ही रहा है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि वे युद्धविराम की राह चुन सकते हैं, लेकिन इससे पहले यूक्रेन को उनकी शर्तों को मानना होगा. शर्तों में शामिल है कि यूक्रेन सैन्य समूह NATO का सदस्य बनने का अपना सपना छोड़ दे. हालांकि यूक्रेन ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.  यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर तमाम तरह के प्रतिबंध लगाकर उसे पूरी दुनिया से अलग-थलग कर दिया है. 

रूस के खिलाफ नहीं अपनाया सख्त रवैया 

चूंकि भारत के अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों के साथ भी बढ़िया संबंध हैं. हालांकि भारत का रूस के प्रति रुख इन देशों के रुख से अलग रहा है. भारत ने कभी भी रूस के यूक्रेन हमले का कड़ा विरोध नहीं किया है और ना ही रूस के खिलाफ कोई प्रतिबंध लगाए हैं. भारत ने हाल ही स्विट्जरलैंड में हुई यूक्रेन शांति सम्मेलन में भाग तो लिया लेकिन इसके घोषणापत्र से हस्ताक्षर करने पर दूरी बना ली. सामरिक मामलों के जानकारों का कहना है कि भारत ने यह कदम रूस के साथ अपने संबंधों की चल रही परिपाटी को ध्यान में रखते हुए उठाया है. भारत के इस फैसले को रूस के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों को बनाए रखने के रूप में देखा जा रहा है. 

भारत के लिए क्यों अहम है रूस? 

भारत का रूस के प्रति अटूट समर्थन के कई कारण हैं. एक कारण तो रक्षा सुरक्षा से ही जुड़ा है. भारत 60 प्रतिशत से ज्यादा रूसी सैन्य उपकरणों का इस्तेमाल करता है. भारत यदि रूस के खिलाफ गया तो इससे उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के सामने खतरा पैदा हो सकता है. भारत सैन्य साजो सामान के अलावा रूस से सस्ता तेल, उर्वरक, भी आयात करता है. कूटनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि इस स्थिति में भारत का रूस के खिलाफ जाना मुश्किल है.