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कचरे वाले गुब्बारे vs लाउडस्पीकर, आखिर ये कैसी 'जंग' लड़ रहे हैं उत्तर और दक्षिण कोरिया

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच गजब का जंग चल रहा है. सीमा पर एक तरफ से कचरे वाले गुब्बारे उड़ाए जा रहे तो एक ओर से तेज लाउडस्पीकर बजाया जा रहा है. लाउडस्पीकर्स पर पॉप के गाने बजाए जा रहे हैं.

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India Daily Live
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Courtesy: Social Media

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया दुश्मन देश हैं. दोनों के बीच हमेशा अनबन होती रहती है. इस समय ये दोनों देश एक अजीब जंग लड़ रहे हैं. उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया पर कचरे के गुब्बारों से अटैक किया है. इसके जवाब में दक्षिण कोरिया ने सीमा पर लाउडस्पीकर लगा दिया है.  बड़े-बड़े लाउडस्पीकरों का मुंह उत्तर कोरिया की तरफ है. इसमें तेज संगीत बजाया जाता है. अल जजीरा ने सोमवार को सियोल की सेना के हवाले से बताया कि उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया में 300 से अधिक कचरे से भरे गुब्बारे उड़ाए हैं, क्योंकि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है.

इसे एक मनोवैज्ञानिक युद्ध के रूप के रूप में देखा जा रहा है. यह किम जोंग उन की प्रभावशाली बहन किम यो जोंग द्वारा सियोल को अपनी तनावपूर्ण सीमा पर प्रचार प्रसारण रोकने की चेतावनी के बाद आया है. उन्होंने चेतावनी दी कि लाउडस्पीकर प्रसारण से टकराव का संकट भड़कने का खतरा है.

रविवार को राज्य मीडिया द्वारा दिए गए एक बयान में किम ने कहा, यह एक बहुत ही खतरनाक स्थिति का बुलावा है. ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (जेसीएस) ने कहा कि नए गुब्बारों में केवल स्क्रैप पेपर और प्लास्टिक था, जबकि पिछले वाले गुब्बारों में खाद, टॉयलेट पेपर और सिगरेट बट जैसी सामग्री थी. 

कचरे के गुब्बारे के जवाब लाउडस्पीकर से

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के हफ्तों में उत्तर कोरिया द्वारा 1,000 से अधिक कचरा वाले गुब्बारे भेजे जाने के जवाब में दक्षिण कोरिया ने कुछ घंटे पहले लाउडस्पीकर बजाना फिर से शुरू कर दिया. लाउडस्पीकर पर तेज पॉप गाने बाजाए जा रहे है. दक्षिण कोरिया ने अपने नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की है और कहा है कि उत्तर कोरिया कचरा ले जाने वाले गुब्बारे उड़ा रहा है. लोगों से कहा गया है कि किसी भी गुब्बारे की सूचना अधिकारियों को दें और उन्हें छूने से बचें. अगर कहीं भी कोई संदिग्ध गुब्बारा दिखाई देता है तो तुरंत इसकी सूचना अधिकारियों को दें.

सीमा पर सैन्य तनाव नहीं बढ़ना चाहिए

सियोल में इवा वूमन्स यूनिवर्सिटी में अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन के प्रोफेसर लीफ-एरिक इस्ले ने कहा कि सियोल अंतर-कोरियाई सीमा पर सैन्य तनाव नहीं चाहता है, और प्योंगयांग नहीं चाहता है कि बाहरी जानकारी किम शासन की वैधता को खतरे में डाले. उन्होंने आगे कहा, दोनों पक्षों के लिए तनाव कम करने के लिए तनाव बढ़ाना एक जोखिम भरा प्रस्ताव है. उत्तर कोरिया ने शायद पहले ही गलत अनुमान लगा लिया है, क्योंकि दक्षिण कोरिया का लोकतंत्र एनजीओ बैलून लॉन्च को उस तरह से बंद नहीं कर सकता है, जिस तरह से एक तानाशाही उम्मीद करती है.