China Role In Middle East: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग मध्य पूर्व में अपना दबदबा बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. वे अमेरिका और ब्रिटेन को किनारे लगा चीन को दुनिया का नया सिरमौर बनाना चाह रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जिनपिंग चीन का वैश्विक प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए वे कई देशों को साइडलाइन कर रहे हैं. जिनपिंग मध्य पूर्व में चीन के प्रभुत्व को साधने के लिए समर्थन जुटा रहे हैं. ब्रिटेन के सिक्योरिटी एक्सपर्ट ने इसको लेकर चेतावनी जारी की है.
ब्रिटेन स्थित थिंक टैंक हेनरी जैक्सन सोसायटी के सीनियर रिसर्च फेलो बराक सीनर ने बताया कि इजरायल और हमास युद्ध और लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर हमले के बाद पूरे क्षेत्र में बीजिंग की ताकत में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. जानकारों के मुताबिक चीन इस इलाके में अमेरिका के प्रभाव को खत्म करना है. तनाव से जूझ रहे क्षेत्र में चीन अमेरिका और ब्रिटेन को किनारे लगाकर मध्य-पूर्व का सरताज बनना चाह रहा है.
चीन की इस क्षेत्र पर नजर का एक अहम कारण यह भी है कि यह क्षेत्र तेल संशाधनों का विशाल स्त्रोत है. यह दुनियाभर के बाजार को जोड़ने के लिए जिनपिंग के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट BRI का हिस्सा है. चीन के प्रभाव को इस क्षेत्र में बढ़ाने के लिए ईरान भी मदद कर रहा है. बीजिंग ने अपने भू-राजनीतिक हितों को सुरक्षित करने के लिए अपनी क्रय शक्ति और कूटनीति का उपयोग किया है. जानकारों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अरब देशों में अमेरिका सहित पश्चिमी देशों का शक्तियों में ह्रास होने का खतरा है. इस क्षेत्र में अपनी स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सैन्य उपस्थिति को बढ़ाना होगा.
अब्राहम एग्रीमेंट यूएई, बहरीन, सूडान और मोरक्को द्वारा राष्ट्रों के बीच बढ़ते संबंधों के माध्यम से क्षेत्र को स्थिर करने के लिए इजरायल द्वारा हस्ताक्षरित एक शांति समझौता है. सीनर ने चेतावनी दी कि वाशिंगटन द्वारा अपना ध्यान और सैन्य संसाधनों को खाड़ी से दूर स्थानांतरित करने के साथ-साथ रूस और चीन जैसी शक्तियों के साथ सुरक्षा के नए स्रोतों की तलाश कर रहा है. हालांकि बीजिंग को अपने हितों की रक्षा के लिए सैन्य विस्तार की जरूरत होगी.