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Uttarkashi Tunnel: फेल हुईं 'फौलाद' को काटने वाली मशीनें, तो 'रैट होल माइनर्स' ने हाथों से ही कर दिया कमाल

सुरंग में फंसे मजदूरों तक पहुंचने के लिए जब फौलाद को काट देने वाली मशीनें भी फेल हो गईं, उस वक्त रैल होल माइनर्स ने कमान अपने हाथों में ली और फिर मैनुअल ड्रिलिंग का काम शुरू किया.

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Gyanendra Sharma
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Uttarkashi Tunnel Rescue Rat Hole Miners: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सिल्कयारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने का काम अंतिम चरण में है. कुछ ही देर में सभी को सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा. इस रेस्क्यू ऑपरेशन में एक नाम की काफी चर्चाएं हैं. ये नाम है 'रैल होल माइनर्स' का. 

सुरंग में फंसे मजदूरों तक पहुंचने के लिए जब फौलाद को काट देने वाली मशीनें भी फेल हो गईं, उस वक्त रैल होल माइनर्स ने कमान अपने हाथों में ली और फिर मैनुअल ड्रिलिंग का  काम शुरू किया. रैल होल माइनर्स के योद्धाओं ने हाथों से ही पहाड़ को काट डाला और मजदूरों की लोकेशन के पास पहुंच गए.

कौन हैं रैट होल माइनर्स?

रैट होल माइनर्स मेघालय में प्रचलित दुर्लभ सीमों से कोयला निकालने की एक विधि है. रैट होल यानी 'चूहे का बिल' जमीन में खोदने की स्टाइल का दर्शाता है. आमतौर पर एक व्यक्ति के उतरने और कोयला निकालने के लिए पर्याप्त स्थान है.  

एक बार गड्ढे खोदने के बाद कोयले की परतों तक पहुंचने के लिए रस्सियों या बांस की सीढ़ियों का उपयोग करके उतरते हैं. फिर कोयले को गैंती, फावड़े और टोकरियों जैसे उपकरणों का उपयोग करके मैन्युअल रूप से निकाला जाता है.

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दो तरह की होती है रैट होल माइनिंग

शिलांग में नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी (एनईएचयू) में पर्यावरण अध्ययन के प्रोफेसर ओपी सिंह ने 2018 में एक मीडिया रिपोर्ट में बताया कि रैट-होल माइनर्स मोटे तौर पर दो प्रकार का होता है। साइड-कटिंग प्रक्रिया में पहाड़ी ढलानों पर नैरो सुरंगें खोदी जाती हैं और श्रमिक कोयले की परत मिलने तक अंदर जाते हैं. मेघालय की पहाड़ियों में कोयले की परत बहुत पतली है.

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दुर्लभ पहाड़ों से ऐसे निकालते हैं कोयला

दूसरे प्रकार के चूहे के बिल की तरह खनन किया जाता है. जिसे बॉक्स-कटिंग भी कहा जाता है. एक आयताकार शुरुआत की जाती है, जो 10 से 100 वर्गमीटर तक होती है. उसके माध्यम से 100 से 400 फीट गहरा एक ऊर्ध्वाधर गड्ढा खोदा जाता है. एक बार कोयले की परत मिल जाने के बाद चूहे के बिल के आकार की सुरंगें खोदी जाती हैं, जिसके माध्यम से श्रमिक कोयला निकाल सकते हैं.

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First Published : 29 November 2023, 01:08 AM IST