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मणिपुर हिंसा का सच आया सामने, लोकसभा में अमित शाह ने इस मुद्दे पर दिया बड़ा बयान

No Confidence Motion Debate : विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में चर्चा जारी है.केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन के चर्चा में हिस्सा लेते हुए मणिपुर हिंसा को लेकर बड़ा बयान दिया है.

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Avinash Kumar Singh
मणिपुर हिंसा का सच आया सामने, लोकसभा में अमित शाह ने इस मुद्दे पर दिया बड़ा बयान

नई दिल्ली: विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में चर्चा जारी है.केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन के चर्चा में हिस्सा लेते हुए मणिपुर हिंसा को लेकर बड़ा बयान दिया है.अमित शाह ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट राज्यों में हिंसक घटनाओं में कमी आई है. देश में ऐसे भी पीएम रहे हैं जो अपने 15-18 साल के कार्यकाल में एक बार भी नॉर्थ ईस्ट नहीं गए इसके बावजूद इसके विपक्षी दलों को उन पर नाज है. वहीं पीएम मोदी 9 साल में 50 से ज्यादा बार नॉर्थ ईस्ट का दौरा किया है.

अमित शाह ने अपने संबोधन में आगे कहा कि मैं विपक्ष की इस बात से सहमत हूं कि मणिपुर में हिंसा का तांडव हुआ है. हमें भी दुख है.जो घटनाएं वहां हुई वो शर्मनाक है लेकिन उसपर राजनीति करना और भी ज्यादा शर्मनाक. ये भ्रम फैलाया गया कि सरकार मणिपुर पर चर्चा नहीं करना चाहती. हम पहले दिन से चर्चा पर तैयार थे, विपक्ष चर्चा नहीं हंगामा चाहता था.

अमित शाह ने मणिपुर की नस्लीय हिंसाओं को लोगों को समझना होगा. करीब छह साल से मणिपुर में बीजेपी की सरकार है. एक दिन भी वहां कर्फ्यू नहीं लगाना पड़ा. उग्रवादी घटनाएं नहीं हुई.उग्रवादी हिंसा करीब-करीब खत्म हो गई. हमारी छह साल का यह अनुभव रहा है.2021 में पड़ोसी देश म्यांमार में सत्ता परिवर्तन हुआ. वहां लोकतांत्रिक सरकार गिर गई और मिलिट्री का शासन आ गया. इस बीच वहां कुकी डेमोक्रेटिक फ्रंट ने लोकतंत्र के लिए आंदोलन शुरू किया. फिर वहां की सेना ने इनपर दबाव बनाना शुरू किया. इसके बाद वहां कुकी समुदाय पर शिकंजा कसा जाने लगा फिर वहां से भारी संख्या में मिजोरम और मणिपुर में कुकी आदिवासी लोग आने लगे. वे जंगल में बसने लगे. इसके बाद मणिपुर के बाकी हिस्सों में असुरक्षा की भावना ने जन्म लिया. इसके बाद हमने इसे समझा और बॉर्डर को बंद करने का काम किया. हमने किलोमीटर बॉर्डर की फेंसिंग कर दी है. 600 किलोमीटर का सर्वे जारी है. यह काम कांग्रेस ने कभी नहीं किया हमने किया.

हमने वहां आए शरणार्थियों परिचय पत्र बनवाया गया. थंब और आई इंप्रेशन लिया गया. इनको वोटर लिस्ट और आधार कार्ड की नेगेटिव लिस्ट में डाला गया. 29 अप्रैल को एक अफवाह फैली कि 58 जो शरणार्थियों की बसावट हैं उनको गांव घोषित कर दिया गया है. इससे मैतई नाराज हो गए. लोगों को लगा ये स्थाई तौर पर यहीं बस जाएंगे. फिर मणिपुर हाईकोर्ट के फैसले ने आग में तेल डाल दिया. इसने सालों से पेंडिंग पड़ी याचिका पर सुनवाई की और कह दिया कि पहले मैतई को आदिवासी घोषित कर दिया जाएगा. इसके बाद हिंसा हो गई.

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