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लोकसभा में होंगी 181 महिला सांसद, 15 साल तक रिजर्वेशन, जानें महिला आरक्षण बिल की क्या हैं बड़ी बातें?

Women's Reservation Bill: महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिलाने वाला बिल लोकसभा में पेश हुआ. इस बिल में महिलाओं के लिए विधानसभा और लोकसभा में 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है.

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Avinash Kumar Singh
लोकसभा में होंगी 181 महिला सांसद, 15 साल तक रिजर्वेशन, जानें महिला आरक्षण बिल की क्या हैं बड़ी बातें?

Women's Reservation Bill: महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिलाने वाला बिल लोकसभा में पेश हुआ. इस बिल में महिलाओं के लिए विधानसभा और लोकसभा में 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है. इस बिल के कानून बनने के बाद लोकसभा की 181 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हो जाएंगी.

लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या बढ़कर 181

विधेयक को सदन के पटल पर पेश करते हुए कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह विधेयक महिला सशक्तिकरण करेगा. संविधान के अनुच्छेद 239ए में संशोधन करके महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाएंगी. अनुच्छेद 330ए के तहत सदन में एससी/एसटी महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की जाएंगी. इस विधेयक के पारित होने के बाद लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या बढ़कर 181 हो जाएगी. इसके साथ ही दिल्ली विधानसभा में भी महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिलेगा .इस बिल के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण 15 साल के लिए मिलेगा. 15 साल बाद महिलाओं को आरक्षण देने के लिए फिर से बिल लाना होगा।'

"नीति निर्माण में महिलाओं की होनी चाहिए भूमिका"

नारी शक्ति वंदन विधेयक को लेकर संसद में पीएम मोदी ने कहा कि "महिला आरक्षण को लेकर संसद में पहले भी प्रयास हुए है. आज हमारी सरकार संविधान संशोधन बिल पेश करने जा रही है. लोकसभा और विधानसभा में महिला को आरक्षण  मिलेगा. जब यह बिल कानून बनेगा तो इसकी ताकत और हो बढ़ जाएगी. मैं दोनों सदन के सांसदों से अपील करता हूं कि यह सबकी सहमति से पारित हो. आज महिला हर एक क्षेत्र में आगे जा रही है. नीति निर्माण में महिला की भूमिका होनी चाहिए"

महिला आरक्षण विधेयक मोदी सरकार का बड़ा मास्टर स्ट्रोक

महिला आरक्षण विधेयक 27 सालों से पेंडिंग है. पूर्व पीएम एच डी देवगौड़ा की सरकार में इस विधेयक में 12 सितंबर 1996 को संसद में पेश किया गया था. बिल का मुख्य 15 साल के लिए लक्ष्य महिलाओं के लिए लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें आरक्षित करना है. वाजपेयी सरकार ने लोकसभा में इस विधेयक को आगे बढ़ाया (1998), लेकिन यह फिर भी पारित नहीं हुआ. ऐसे में केंद्र सरकार संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण पर बिल पेश करके बड़ा मास्टर स्ट्रोक खेला हैं.

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