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'अन्य पर नजर नहीं डालेंगे', ज्ञानवापी, मथुरा को लेकर बोले राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष

आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया यानी ASI ने पिछले महीने एक रिपोर्ट जारी की थी. हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि ASI के रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण पहले से मौजूद भव्य मंदिर के अवशेषों पर किया गया था.

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Om Pratap
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Sri Ram Janmabhoomi Trust On Gyanvapi issues: श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि महाराज ने विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए मुस्लिम पक्ष से ज्ञानवापी और मथुरा मस्जिद को छोड़ने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानवापी और कृष्ण जन्मभूमि मुद्दे सौहार्दपूर्ण ढंग से हल हो गए तो हिंदू अन्य मंदिरों की ओर नहीं देखेंगे.

पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम में गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि अगर तीन मंदिर मुक्त हो गए तो हमें दूसरे मंदिरों की ओर देखने की भी इच्छा नहीं है क्योंकि हमें भविष्य में रहना है, अतीत में नहीं. उन्होंने कहा कि देश का भविष्य अच्छा होना चाहिए और अगर ये तीन मंदिर (अयोध्या, ज्ञानवापी और कृष्ण) हमें मिल जाएं तो अच्छा होगा. 

मंदिरों का विध्वंस आक्रमणकारियों के हमलों का सबसे बड़ा दाग

गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि अयोध्या, ज्ञानवापी और मथुरा में मंदिरों का विध्वंस आक्रमणकारियों के हमलों का सबसे बड़ा दाग है और मुस्लिम पक्ष को इस दर्द को समझना चाहिए. उन्होंने कहा कि मैं इन तीनों मंदिरों (अयोध्या, ज्ञानवापी और कृष्ण जन्मभूमि) के बारे में हाथ जोड़कर अपील करता हूं... क्योंकि ये आक्रमणकारियों द्वारा किए गए हमलों के सबसे बड़े निशान हैं. लोग दर्द में हैं, क्या वे (मुस्लिम पक्ष) इस दर्द को ठीक कर सकते हैं, अगर वे ऐसा करते हैं तो भाईचारा बढ़ाने में मदद मिलेगी.

पिछले महीने हिंदू वादियों ने दावा किया था कि ASI सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्ञानवापी मस्जिद एक भव्य हिंदू मंदिर के अवशेषों पर बनाई गई थी. हिंदू पक्ष का दावा है कि ज्ञानवापी और मथुरा मस्जिदों का निर्माण मुगलों ने भव्य हिंदू मंदिरों को तोड़कर किया था. 

पिछले हफ्ते तहखाने में कोर्ट ने पूजा की दी थी अनुमति

पिछले हफ्ते, वाराणसी की एक अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद के एक तहखाने के अंदर पूजा की अनुमति दी थी. ज्ञानवापी मस्जिद वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित है. मथुरा मस्जिद कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के निकट स्थित है. पिछले हफ्ते, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास ने वाराणसी जिला अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त की थी.

उन्होंने कहा था कि आदेश दिया गया है कि वहां प्रार्थना की जाती थी और उसे जारी रखा जाना चाहिए. ये अच्छा है कि पूजा करने का अधिकार दिया गया है. सच्चाई सामने आ गई है. जिन लोगों ने पूजा रोकी, वो गलत था. अब कोर्ट की ओर से पूजा करने का अधिकार देने के लिए मैं अदालत को धन्यवाद देता हूं. यह खुशी की बात है. पूजा रोकना गलत था, लेकिन अब गलती सुधार ली गई है.

 

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First Published : 05 February 2024, 10:35 AM IST