नई दिल्ली: भारत हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है. इस अभियान को और गति देते हुए भारत सरकार ने 84,560 करोड़ रुपये के कई प्रमुख रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है. मंजूर किए गए प्रस्तावों में अलग-अलग तरह की अत्याधुनिक रक्षा तकनीकें शामिल हैं. इनमें भूकंप सेंसर और रिमोट के जरिए डिएक्टिवेट किए जाने वाले फीचर्स से लैस एंटी टैंक बारूदी सुरंगें भी शामिल हैं. सबसे ज्यादा हवा में वायु ईंधन भरने वाले विमाने की खरीद पर जोर दिया गया है.
मंजूर प्रस्तावों में मल्टी-मिशन विमान, भारी वजन-टॉरपीडो और नई पीढ़ी के टैंक रोधी को भी तवज्जो दिया गया है. मैकेनाइज्ड बलों की क्षमता बढ़ाने के लिए कैनिस्टर लॉन्च्ड एंटी-आर्मर लोइटर म्यूनिशन सिस्टम की खरीद के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है. इसके जरिए युद्ध क्षेत्र में उन टारगेट्स पर भी निशाना साधा जा सकता है, जो नजर के सामने नहीं हैं. केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने पूंजी अधिग्रहण परियोजनाओं के लिए आवश्यकता (एओएन) की स्वीकृति प्रदान की.
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि 'आत्मनिर्भरता' की सच्ची भावना में आज दी गई मंजूरी भारतीय विक्रेताओं से विभिन्न उपकरणों की खरीद पर विशेष जोर देती है. मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने कहा कि भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों की पहुंच बढ़ाने के लिए छह मिड-एयर रिफ्यूलर की खरीद को मंजूरी अब तक का सबसे अच्छी डील है.
भारतीय वायुसेना छह रूसी मूल के इल्युशिन-78 टैंकरों का एक बेड़ा संचालित करती है जो रखरखाव की समस्याओं से जूझ रहा हैं. सेना को तत्काल कम से कम छह और ईंधन भरने वालों की आवश्यकता है. अधिकारियों ने कहा कि नौसेना और तटरक्षक बल के लिए 15 नए सी-295 विमानों को मंजूरी देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
IAF को सितंबर 2023 में एयरबस डिफेंस एंड स्पेस से अपने पहले C-295 मालवाहक विमान की डिलीवरी मिली. यह विमान IAF द्वारा अपने परिवहन बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए 21,935 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत ऑर्डर किए गए 56 विमानों में से पहला था. यूरोपीय विमान निर्माता कंपनी 16 विमानों को उड़ने की स्थिति में डिविनवरी करेगा, जबकि बाकी को भारत में गुजरात के वडोदरा में असेंबल किया जाएगा.
भारत के रक्षा खरीद नियमों के तहत एओएन सैन्य हार्डवेयर खरीदने की दिशा में पहला कदम है. भारतीय-आईडीडीएम श्रेणी रक्षा खरीद नीति के तहत स्वदेशीकरण के लिए अधिग्रहण की सबसे महत्वपूर्ण श्रेणी है. केंद्र सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत’ लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मंजूर किए गए ज्यादात्तर प्रस्तावों में सभी उपकरण भारतीय निर्माताओं से खरीदे जाने पर जोर दिया गया है. इनोवेशन को बढ़ावा देने में स्टार्ट-अप और MSMEs की भूमिका को बढ़ाने की योजना है. इसका मकसद बेंचमार्किंग, कॉस्ट कंप्यूटेशन, पेमेंट शेड्यूल और प्रोक्योरमेंट क्वांटिटी यानी खरीद मात्रा पर फोकस करना है.