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मणिपुर में नहीं है यूपी की तरह 80 सीटें... इसलिए भाजपा कर रही नजरअंदाज, राघव चड्ढा का केंद्र पर बड़ा हमला

राघव चड्ढा आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा का रवैया मणिपुर में केवल दो लोकसभा सीटों के कारण ऐसा है. उन्होंने कहा कि अगर मणिपुर अधिक सीटों वाला एक बड़ा राज्य होता, जैसे यूपी, जहां 80 सीटें हैं, तो सरकार की प्रतिक्रिया अलग होती.

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Manish Pandey
मणिपुर में नहीं है यूपी की तरह 80 सीटें... इसलिए भाजपा कर रही नजरअंदाज, राघव चड्ढा का केंद्र पर बड़ा हमला

नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने भाजपा सरकार पर संविधान और संसदीय कानूनों की अवहेलना करने का आरोप लगाते हुए कड़ी आलोचना की है. उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक रूप से, जब भी विपक्ष द्वारा प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव को अध्यक्ष द्वारा स्वीकार किया जाता था, तब तक कोई अन्य विधायी कार्य नहीं किया जाता था जब तक कि प्रस्ताव पर बहस और मतदान नहीं हो जाता.

भाजपा सरकार इन नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार अपना नियमित कामकाज कर रही है और अविश्वास प्रस्ताव को संबोधित किए बिना विधेयक पारित कर रही है. उन्होंने स्पीकर से आग्रह किया कि वे लोकसभा में अन्य मामलों पर आगे बढ़ने से पहले बहस को प्राथमिकता दें और अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान करें.

उन्होंने सवाल किया कि वर्तमान मणिपुर सरकार को भंग क्यों नहीं किया गया और शांति बहाल करने और अनुच्छेद 355 व 356 जैसे संवैधानिक उपायों को क्यों नहीं अपनाया जा रहा है? AAP सांसद ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि वन संरक्षण विधेयक वनों का संरक्षण नहीं करता, डेटा प्रोटेक्शन बिल डेटा की सुरक्षा नहीं करता, जन विश्वास बिल दवाओं को सुरक्षित नहीं बनाता और कृषि कानूनों से किसानों को कोई फायदा नहीं है.

उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा का रवैया मणिपुर के अपेक्षाकृत छोटे आकार और केवल दो लोकसभा सीटों के कारण ऐसा है. उन्होंने कहा कि अगर मणिपुर अधिक सीटों वाला एक बड़ा राज्य होता, जैसे यूपी, जहां 80 सीटें हैं, तो सरकार की प्रतिक्रिया अलग होती या अगर मणिपुर में गैर-भाजपा सरकार होती तो केंद्र सरकार बहुत पहले ही राष्ट्रपति शासन लगा देती.

मणिपुर की एक वीडियो की जांच सीबीआई द्वारा अपने हाथ में लेने के मामले पर उन्होंने कहा कि इसपर कार्रवाई करने में काफी देर हो चुका है. बीजेपी को 80-85 दिन लग गए कार्रवाई करने में जबकि राज्य सरकार की निष्क्रियता के कारण लोग हर दिन परेशान हो रहे हैं.