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Political Crisis in Bihar: मुख्यमंत्री बनने के लिए CM पद से इस्तीफा देते हैं नीतीश,जानें क्या कहते हैं आकंड़े

Political Crisis in Bihar: भीषण ठंड के बीच बिहार में सियासी गर्मी अपने चरम पर है. नीतीश कुमार कभी भी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन में शामिल हो सकते हैं. खबरों के मुताबिक एकबार फिर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर नीतीश कुमार नई सरकार में सीएम पद की शपथ लेंगे.

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Pankaj Mishra
Political Crisis in Bihar, CM Nitish Kumar

हाइलाइट्स

  • नीतीश कुमार ने कब-कब बदला पाला?
  • नीतीश कुमार एक-दो दिन में ले सकते हैं बड़ा फैसला 
  • लोकसभा चुनाव से पहले फिर एक साथ होने की तैयारी में जेडीयू-बीजेपी
  • बीजेपी-जेडीयू के बीच गठन पर करीब-करीब बन गई है सहमति

Political Crisis in Bihar: देशभर में गणतंत्र दिवस की धूम के साथ-साथ ही बिहार की राजनीति इन दिनों काफी गरम है. पल-पल बदलते राजनीतिक समीकरण पर हर किसी की नजरें टिकी हैं. नीतीश के हालिया हाव-भाव को देखकर ये तय माना जा रहा है कि वो जल्द ही एक बार फिर पलट जाएंगे.

...तभी से शुरू हो गई थी सुगबुगाहट 

राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान बिहार में नीतीश कुमार के शामिल होने की चर्चा थी लेकिन नीतीश की पार्टी जेडीयू ने इसमें शामिल होने से साफ इनकार कर दिया. तभी से सुगबुगाहट शुरू हो गई थी कि नीतीश कुछ न कुछ बड़ा करने वाले हैं वहीं दूसरी तरफ नीतीश कुमार ने कर्पूरी ठाकुर की 100वीं जयंती पर आरजेडी से अपनी बढ़ती दूरी का भी साफ संकेत दे दिया था. 

नीतीश का परिवारवाद के बहाने लालू पर हमला  

कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर नीतीश अकेले ही कर्पूरी ठाकुर के घर चले गए जबकि उनके साथ डिप्टी सीएम और लालू के बेटे तेजस्वी यादव को भी जाना था. उसके बाद नीतीश ने कर्पूरी जयंती के अवसर पर परिवारवाद पर बड़ा हमला भी करते हुए पीएम मोदी की तारीफ कर दी. बस फिर क्या था, सियासी गलियारों में नीतीश के एक बार फिर पलटने की अटकलें शुरू हो गईं.

कई बार पहले भी पलट चुके हैं नीतीश कुमार 

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कई बार पहले भी पलट चुके हैं. इससे पहले 2013 में जेडीयू ने भारतीय जनता पार्टी से नाता तोड़कर आरजेडी और कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था. 2017 में जेडीयू ने एनडीए में बीजेपी के साथ अपना दामन जोड़ा और 2019 का लोकसभा चुनाव उसके बाद फिर 2020 का बिहार विधानसभा चुनाव एक साथ-साथ लड़ा. ठीक दो साल बाद अगस्त 2022 में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री बनने के लिए एनडीए से नाता तोड़ लिया. 

छात्र आंदोलन के राजनीति में एंट्री

नीतीश और लालू की बात करें तो तकरीबन 50 साल पहले 1974 के बिहार छात्र आंदोलन के दौरान दोनों नेताओं की राजनीति में एंट्री हुई थी. लालू प्रसाद यादव 1977 संसद सदस्य बन गए थे लेकिन नीतीश कुमार को विधानसभा पहुंचने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा था. 1985 में नीतीश कुमार पहली बार विधायक बने लेकिन बिहार की राजनीति में नीतीश की पकड़ मजबूत होती चली गई.

नीतीश ने लालू को सीएम बनाने में की थी मदद 

जानकार बताते हैं कि 1990 में लालू प्रसाद यादव जब पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे उस दौरान नीतीश कुमार ने लालू को सीएम बनाने में मदद की थी. हालांकि, इसके बाद दोनों नेताओं के रिश्तों में कई बार खटास आई लेकिन साथ ही साथ कई ऐसे मौके भी आए जब लालू और नीतीश ने एक-दूसरे का अपना भाई भी बताया.

नीतीश के लिए साल 1994 टर्निंग प्वाइंट

साल 1994 नीतीश के लिए टर्निंग प्वाइंट था जब नीतीश ने पटना के गांधी मैदान में कुर्मी अधिकार रैली का आयोजन किया. इसके कुछ दिन बाद वो तत्कालीन जनता दल से अलग हो गए. साल 1994 में ही नीतीश कुमार ने समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडीस, ललन सिंह के साथ मिलकर समता पार्टी का गठन किया. 1995 के चुनाव में उन्होंने वामदलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें इसमें कुछ खास हासिल नहीं हुआ. इसके बाद नीतीश ने वामदलों से गठबंधन तोड़ एनडीए का हिस्सा बन गए.

नीतीश 1996 से 2010 तक रहे NDA हिस्सा

1996 लोकसभा चुनाव से कुछ समय पहले ही नीतीश कुमार एनडीए का हिस्सा बने थे और बीजेपी के साथ उनका ये संबंध 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव तक चलता रहा. एनडीए को इस चुनाव में बड़ी जीत हासिल हुई थी. इसी दौरान राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहा था. साल 2012 के आसपास गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का राजनीतिक कद बढ़ना शुरू हो चुका था. जिसका असर नीतीश पर भी पड़ा और खुद को एनडीए के अंदर असहज महसूस करने लगे और यही वजह रही कि 2014 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान तक कर दिया. 

नीतीश कुमार ने ऐसे दिया बीजेपी को झटका

इस लोकसभा चुनाव का यह परिणाम हुआ कि नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया क्योंकि जेडीयू की करारी हार हुई थी और उसे केवल दो सीटों से ही संतोष करना पड़ा था. इस हार के बाद नीतीश और लालू एक बार फिर करीब आए और दोनों ने साथ मिलकर महागठबंधन बनाया. 2015 के विधानसभा चुनाव में इस महागठबंधन को बड़ी जीत हासिल हुई.

नीतीश कुमार ने एक बार फिर से सबको चौंकाया

लेकिन तकरीबन ढाई साल बाद 2017 में नीतीश कुमार ने एक बार फिर से सबको चौंका दिया. ये वही समय था जब डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव का IRCTC घोटाले में नाम आया और इसी के बाद नीतीश ने महागठबंधन के मुंह मोड़ लिया और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. सीएम पद छोड़ने के तुरंत बाद वे एनडीए में शामिल हो गए और उनके साथ गठबंधन करके फिर से सरकार बना ली.

सिर्फ 43 सीट, लेकिन फिर CM नीतीश कुमार

इसके बाद 2020 में बिहार में विधानसभा के चुनाव हुए. नीतीश कुमार ने एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की.  243 सीट वाले विधानसभा में नीतीश की पार्टी जेडीयू को महज 43 सीटें हासिल हुईं जबिक बीजेपी को 74 सीटों पर जीत मिली. उधर आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसने 75 सीटों पर जीत हासिल की. लेकिन इन सबके बावजूद नीतीश कुमार ही फिर से बिहार के मुख्यमंत्री बने. लेकिन दो साल बाद ही 2022 में नीतीश कुमार ने एक बार फिर पलटी मार दी. नीतीश को अब बीजेपी से परेशानी होने लगी थी. नीतीश कुमार ने कई वजहें गिनाते हुए सीएम पद से इस्तीफा दे दिया और बीजेपी से अपना रिश्ता खत्म कर लिया.

अब लोकसभा चुनाव से पहले पलटी मारने की तैयारी

इसके बाद नीतीश ने आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट के साथ मिलकर सरकार बना ली और राज्य का डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव को बनाया. अब एक बार फिर आरजेडी से उनकी दूरी उस समय बढ़ रही है जब लोकसभा चुनाव नजदीक है ऐसे में कयास ये लगाए जा रहे हैं कि नीतीश एक बार फिर पलटी मार सकते हैं.