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Patliputra Lok Sabha Seat 2024: पाटलिपुत्र की 'रानी' बनीं मीसा भारती, कांटे की टक्कर में BJP के रामकृपाल को दी करारी शिक्सत

Patliputra Lok Sabha Seat Election Results 2024: लालू परिवार की लाडली बेटी मीसा भारती पाटलिपुत्र से चुनावी मैदान में थी. उन्होंने इस बार चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है. पहली दफा वो संसद जाएंगी.

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Patliputra Lok Sabha Seat Election Results 2024
Courtesy: IDL

Patliputra Lok Sabha Seat:  बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से वैसे तो कई ऐसी सीटें थी, जो लोकसभा चुनाव के लिहाज से हॉट सीट थी. लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा जिस सीट की हुई वो पाटलीपुत्र लोकसभा सीट थी. ये राजधानी पटना की दो लोकसभा सीटों में से एक है. ये सीट खास इसलिए भी क्योंकि लगातार तीसरी बार इस सीट पर भाजपा नेता रामकृपाल यादव और लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती के बीच मुकाबला था.  कांटे के इस मुकाबले में मीसा भारती ने 85174 मतों के अंतर से जीत दर्ज की. उन्हें 613283 वोट मिले जबकि राम कृपाल यादव को 528109 वोट मिले. 

रामकृपाल यादव  ने 2014 और 2019 में मीसा भारती को हराया था. 1 जून को 7वें और आखिर चरण की वोटिंग के बाद आए एग्जिट पोल में इस बार मीसा भारती, NDA के कैंडिडेट और भाजपा नेता रामकृपाल यादव को टक्कर देती दिख रहीं थीं. अगर इस सीट पर पिछले दो चुनावों की बात की जाए तो 2014 में रामकृपाल यादव को 3 लाख 83 हजार 262 वोट मिले थे, जो मीसा भारती को 3 लाख 42 हजार 940 मिले थे, जो रामकृपाल को मिले वोट से 4.2 फीसदी कम था. वहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव में रामकृपाल यादव को 5 लाख, 9 हजार, 557 वोट मिले थे, जबकि मीसा भारती को 4 लाख 70 हजार 236 वोट मिले थे, जो रामकृपाल को मिले वोट से  3.7 फीसदी कम था.

पाटलिपुत्र के चुनावी मुद्दे

पाटलिपुत्र में राज्य की अन्य लोकसभा सीटों की तरह ही में सरकारी रिक्त पदों पर भर्तियों का न होना, आज भी सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है. यहां युवा बेरोजगारी से बेहाल हैं. युवाओं को इस बात की नाराजगी है कि सरकारें उनके लिए कुछ नहीं करती हैं. प्रवासी मजदूरों का एक तबका इस बात से नाराज है कि राज्य में अभी तक व्यापक विकास नहीं हुए हैं, जिसकी वजह से लोगों को पलायन करना पड़ता है.रोजगार के लिए न उद्योग हैं, न ही सरकारों की मंशा ऐसी रही है.जातिवाद भी यहां एक बड़ा सियासी मुद्दा है. पारा शिक्षक, स्कूल कॉलेजों की कमी, बदहाल अस्पताल भी यहां बड़ा चुनावी मुद्दा था.

पाटलिपुत्र लोकसभा सीट का जातीय समीकरण

पाटलिपुत्र लोकसभा सीट पर रजिस्टर्ड मतदाताओं की संख्या 16.5 लाख है. इनमें सबसे ज्यादा संख्या यादव मतदाताओं की है. यहां करीब 4 लाख मतदाता यादव समाज के हैं. इसके अलााव, 3 लाख मतदाता भूमिहार हैं, जबकि 1.7 लाख कुर्मी, 1.7 लाख कोइरी, 1.5 लाख मुस्लिम और 1 लाख ब्राह्मण वोटर्स हैं.

आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो ये यादव बहुल सीट है. अगर मीसा भारती को यादव और मुस्लिम मतदाताओं का एकतरफा सपोर्ट मिलता है, तो फिर वे लगातार दो बार के हार के सिलसिले को तोड़ सकती हैं. हालांकि, मीसा फिलहाल एग्जिट पोल में रामकृपाल को टक्कर देती दिख रही हैं, अंतिम नतीजों के लिए 4 जून का इंतजार करना होगा.

क्या है पाटलिपुत्र लोकसभा सीट का इतिहास?

पाटलिपुत्र लोकसभा सीट के इतिहास की बात करें तो ये सीट 2009 में अस्तित्व में आई. 2009 के पहले इस सीट का अस्तित्व नहीं था. 2009 के पहले पटना जिले में सिर्फ एक लोकसभा सीट हुआ करती थी. 2008 में हुए पुनर्गठन में इसे दो हिस्सों में बांटा गया. पहली सीट पटना साहिब, जबकि दूसरी सीट का नाम पाटलिपुत्र रखा गया.

2009 में इस सीट पर पहली बार हुए लोकसभा चुनाव में जेडीयू प्रत्याशी रंजन प्रसाद यादव ने राजद चीफ लालू प्रसाद यादव को हराया था. दोनों प्रत्याशियों के बीच जीत का अंतर 23 हजार से ज्यादा का था. जेडीयू प्रत्याशी को 42.9 फीसदी, जबकि लालू यादव को 39.1 फीसदी वोट मिले थे.

2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में एनडीए प्रत्याशी रामकृपाल यादव ने यूपीए प्रत्याशी मीसा भारती को हराया है. बिहार के पाटलिपुत्र लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से 2019 के आम चुनाव में  भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार रामकृपाल यादव ने बाजी मारी.  इन्हें कुल 509,557 वोट मिलें जो कुल डाले गये वोट का 47.28 फीसदी है. वहीं विरोधी पार्टी आरजेडी से मिसा भारती को कुल वोट का 43.63 फीसदी वोट मिलें.

कैसा था साल 2019 का चुनाव?

बिहार के पाटलिपुत्र लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से 2019 के आम चुनाव में  भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार रामकृपाल यादव ने बाजी मारी.  इन्हें कुल 509,557 वोट मिले जो कुल डाले गए वोट का 47.28 फीसदी है. वहीं विरोधी पार्टी आरजेडी से मीसा भारती को कुल वोट का 43.63 फीसदी वोट मिलें.