OLA Rude Driver: हैदराबाद के एक जिला उपभोक्ता अदालत ने ओला कंपनी पर एक लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है. ओला कंपनी ने यह आदेश ड्राइवर की ओर से ग्राहक के साथ अभद्र व्यव्हार करने के बाद लगाया है जिसके चलते उसे बीच रास्ते में ही राइड कैंसिल कर के उतरना पड़ा.
जैबिज सैमुअल नाम के शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने एक ओला कैब 4 घंटों के लिए बुक की थी और इस दौरान उसे अपने निजी कार्यों के चलते कई जगह जाना था. सुबह 10 बजे करीब उसने अपनी पत्नी और हेल्पर के साथ कैब में एंट्री की, लेकिन जैसे ही ये सफर शुरु हुआ उसने नोटिस किया कि गाड़ी गंदी, बदबूदार और अस्त व्यस्त नजर आ रही थी.
इसे देखते हुए सैमुअल ने ड्राइवर को एसी चलाने की रिक्वेस्ट की लेकिन ड्राइवर ने बेरुखी से बात करते हुए ऐसा करने से इंकार कर दिया. शिकायतकर्ता ने आगे बताया कि 4 से 5 किमी तक जब ऐसे ही उसका चलता रहा तो ड्राइवर ने धमकाते हुए उन्हें गाड़ी से बाहर निकल जाने को कहा. ड्राइवर के दुर्व्यव्हार और सख्त रवैए से परेशान सैमुअल को बीच रास्ते में ही उतरना पड़ा. उन्होंने कहा कि वो ड्राइवर की बेरुखी और अड़ियल रवैए से मानसिक रूप से परेशान हुए और किसी भी तरह की लड़ाई से बचने के लिए उतरकर दूसरा साधन बुलाया.
जैबिज ने बताया कि इसको लेकर उन्होंने ओला के कस्टमर केयर एक्जिक्यूटिव से मेल के जरिए बात की और पूरी घटना के बारे में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने बताया कि इसके बाद भी उन्हें लगातार बिल देने के लिए फोन आते रहे और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता रहा. जब खुद के पक्ष में कुछ नहीं हो रहा था तो उन्होंने चुपचाप बिल पे कर दिया और इस पूरे वाक्ये के चलते जितना मानसिक उत्पीड़न एवं मुश्किलें झेलनी पड़ी उसके रिफंड और हर्जाने के लिए शिकायत दर्ज करा दी.
वहीं कंपनी ने अपने लिखित जवाब में साफ किया है कि शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में ड्राइवर को पक्षकार नहीं बनाया है जो कि इस पूरे मामले में सबसे जरूरी है और उसी ने उनके साथ गलता है. कंपनी ने कहा कि ओला कैब एक इंटरनेट आधारित एप्लिकेशन का नाम है और उसकी कोई कानूनी इकाई नहीं है और इसी को आधार बनाते हुए केस खारिज करने की मांग कर रहे थे.
कंपनी ने दावा किया कि उसके प्लेटफॉर्म पर हजारों ड्राइवर रजिस्टर्ड हैं और उनसे हर किसी की जांच करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती. हालांकि जिला उपभोक्ता अदालत ने कंपनी की बात सुनने से इंकार कर दिया और ड्राइवर के चलते सेवाओं में दी गई कमी और गलत तरीके से व्यापार करने के चलते 5000 का रिफंड और एक लाख रुपए तक का हर्जाना देने की मांग की है.