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यूपी में मोदी मैजिक के सामने हैं बड़ी चुनौतियां, समझिए अंतिम चरण में NDA कैसे पड़ सकता है कमजोर?

Lok Sabha Elections 2024: देशभर में 400 सीटें जीतने का दावा कर रही बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल क्षेत्र लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ है. इस बार भी आखिरी चरण में पूर्वांचल की सीटों पर बीजेपी और उसके सहयोगियों की लड़ाई काफी मुश्किल हो गई है.

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Courtesy: सोशल मीडिया

साल 2024 में हो रहा लोकसभा चुनाव अपने अंतिम पड़ाव पर है. अंतिम चरण का चुनाव 1 जून को होना है. इस चरण में पूर्वांचल की कुल 13 लोकसभा सीटों पर चुनाव होना है लेकिन इस बार के चुनाव में इन 13 सीटों में से कुछ सीटें ऐसी हैं जिनके जातीय समीकरण के चक्रव्यूह में एनडीए बहुत बुरी तरह फंस चुका है. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दमदार प्रदर्शन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी में बहुत बड़े अंतर से जीत में यह तथ्य दबकर रह गया था कि पूर्वांचल की कई प्रमुख सीटों पर बेहद करीबी अंतर से हार-जीत हुई थी. पूर्वांचल की कुछ सीटें ऐसी भी थीं. जहां साल 2019 के लोकसभा चुनाव के हार-जीत का अंतर न के बराबर था. वहीं, कुछ सीटों से बीजेपी को हाथ धोने पड़ गया था.

उत्तर प्रदेश की मछलीशहर, चंदौली, बलिया जैसी लोकसभा सीटों पर मामूली अंतर से बीजेपी कैंडिडेट जीते थे. कम से कम पांच संसदीय सीटें पार्टी हार भी गई थी. यही नहीं, साल 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी के लिए पूर्वांचल दुखती रग साबित हुआ था. आइए जानते हैं कौन सी हैं पूर्वांचल की वे चार सीटें. जिन पर नहीं चल पा रहा मोदी मैजिक.

कौन सी हैं वो चार सीटें 

पिछली बार से ज्यादा इस बार पूर्वांचल की बहुत सी सीटों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है. वहीं, कुछ सीटें ऐसी हैं कि वहां के जातीय समीकरण की थियरी कुछ अलग ही संकेत दे रही है. घोसी में एनडीए की ओर से सुभासपा के प्रत्याशी अनिल राजभर चुनाव लड़ रहे हैं जो पार्टी के मुखिया ओमप्रकाश राजभर के लड़के हैं. वहीं, समाजवादी पार्टी ने राजीव राय और बीएसपी ने बालकृष्ण चौहान को प्रत्याशी बनाकर बाजी कठिन कर दी है.

मिर्जापुर लोकसभा सीट से एनडीए कैंडिडेट अपना दल की केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल का मुकाबला समाजवादी पार्टी के रमेश बिंद से है. यहां बीएसपी के मनीष त्रिपाठी मैदान में उतरे हैं. चंदौली लोकसभा सीट से बीजेपी कैंडिडेट केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय का काम बिगाड़ रहे हैं समाजवादी पार्टी के वीरेंद्र सिंह और बीएसपी के सतेंद्र मौर्या. इन सबमें सबसे दिलचस्प मुकाबला बलिया लोकसभा सीट पर है. बलिया से बीजेपी कैंडिडेट पूर्व पीएम चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर का मुकाबला समाजवादी पार्टी के सनातन पांडेय से हो रहा है.

घोसी लोकसभा का जातीय समीकण 

घोसी में जातिगत तरीकों से वोट बिखर रहे हैं. कारण यह है कि सपा ने अपना प्रत्याशी राजीव राय को बनाया है. यही वजह है कि भुमिहार वोटर एनडीए के प्रत्याशी अनिल राजभर की ओर जाते कम दिखाई दे रहे हैं जबकि भुमिहार बीजेपी के कोर वोटर माने जाते हैं. बीएसपी के बालकृष्ण चौहान भी अनिल राजभर के वोटों में सेंध लगा रहे हैं.


मिर्जापुर लोकसभा सीट का जातीय समीकरण

मिर्जापुर लोकसभा सीट की प्रत्याशी केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने रघुराज प्रताप सिंह के खिलाफ बायन देकर अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा काम किया है. शायद यही वह वजह है कि रघुराज प्रताप ने अनौपचारिक तरीके से ही अपना समर्थन सपा प्रत्याशी रमेश बिन्द को दे दिया है. इसके साथ ही बीएसपी कैंडिडेट मनीष त्रिपाठी ब्राह्मणों का वोट अपनी ओर करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.

चन्दौली लोकसभा सीट का जातीय गणित

चंदौली में भी ब्राह्मण बनाम ठाकुर हो रहा है. यहां समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी वीरेन्द्र सिंह राजपूत बिरादरी से हैं. वीरेंद्र सिंह यूपी में मंत्री रह चुके हैं. वहीं, बीजेपी कैंडिडेट महेंन्द्र नाथ पांडेय ब्राह्मण बिरादरी से हैं. जातियों का एक तीसरा एंगल भी है. बीएसपी कैंडिडेट मौर्या बिरादरी से आते हैं और इस सीट पर इनकी संख्या भी ठीक-ठाक है.

बलिया लोकसभा सीट का जातीय गणित 

बलिया में बीजेपी से नीरज शेखर उम्मीदवार हैं जो राजपूत हैं. वहीं समाजवादी पार्टी के कैंडिडेट सनातन पांडेय हैं. यही वह वजह है कि ब्राह्मण मतदाता सपा के प्रत्याशी सनातन पांडेय की ओर जा सकते हैं. सनातन पांडेय दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं. पिछली बार मामूली वोटों से वह चुनाव हार गए थे.