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Lok Sabha Elections 2024: तमिलनाडु में राजनीतिक कुलबुलाहट, क्या कमल हासन और डीएमके के बीच बन पाएगी गठबंधन की बात?

Lok Sabha Elections 2024: लोकसभा चुनाव से पहले दक्षिण भारत में भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. तमिलनाडु में डीएमके की ओर से लगातार दायरा बढ़ाने की कोशिश हो रही है. पार्टी की नजर इन दिनों अभिनेता से नेता बने कमल हासन की पार्टी पर है. जानकारी के अनुसार डीएमके की ओर से एमएनएम को दो विकल्प दिए हैं. आइए जानते हैं क्या है दोनों विकल्प.

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Lok Sabha Elections 2024: तमिलनाडु में राजनीतिक कुलबुलाहट, क्या कमल हासन और डीएमके के बीच बन पाएगी गठबंधन की बात?

Lok Sabha Elections 2024: लोकसभा चुनाव की हलचल तेज होते ही दक्षिण भारत में भी राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) अपने गठबंधन का दायरा बढ़ाने की कोशिश में है. उनकी नजरें अभिनेता से नेता बने कमल हासन की पार्टी मक्कल नीधि मय्यम (एमएनएम) पर टिकी हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डीएमके ने एमएनएम को दो विकल्प दिए हैं. एक तो यह कि वे एक लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ें या चुनाव के बाद उन्हें राज्यसभा सीट दे दी जाए. बदले में, एमएनएम को पूरे राज्य में डीएमके गठबंधन के लिए प्रचार करना होगा.

सूत्रों का कहना है कि दोनों पार्टियों के बीच बातचीत लगभग अंतिम चरण में है. कमल हासन ने भी संकेत दिया है कि "खुशखबरी" जल्द ही आने वाली है. इस संभावित गठबंधन को कई कोणों से देखा जा रहा है.

डीएमके की रणनीति: डीएमके के मौजूदा गठबंधन में कांग्रेस, विदुथलाई चिरुतहैगल काच्चि (VCK) और वामपंथी पार्टियां शामिल हैं. हालांकि, 2021 विधानसभा चुनाव में गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. ऐसे में, एमएनएम के साथ गठबंधन करके राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करना डीएमके की रणनीति का हिस्सा हो सकता है. एमएनएम का 2019 के लोकसभा चुनावों में कोयंबटूर और दक्षिण चेन्नई सीटों पर अच्छा प्रदर्शन रहा था. डीएमके को उम्मीद है कि एमएनएम का समर्थन इन क्षेत्रों में उनकी जीत की संभावनाओं को बढ़ा सकता है.

एमएनएम का दांव: 2018 में स्थापित एमएनएम को अभी तक कोई बड़ी चुनावी सफलता नहीं मिली है. 2021 विधानसभा चुनाव में उनका वोट शेयर भी कम हो गया था. डीएमके के साथ गठबंधन एमएनएम को राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और पार्टी के आधार को मजबूत करने का अवसर दे सकता है. राज्यसभा सीट का प्रस्ताव एमएनएम के नेताओं के लिए आकर्षक हो सकता है.

गठबंधन की चुनौतियां: दोनों पार्टियों के बीच वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, जो भविष्य में समस्याएं पैदा कर सकते हैं. सीटों के बंटवारे को लेकर भी सहमति बनना आसान नहीं होगा. एमएनएम के भीतर ही इस गठबंधन को लेकर अलग-अलग राय हो सकती है. यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिरकार क्या होता है. क्या कमल हासन और डीएमके का गठबंधन बन पाएगा? और अगर बनता है, तो क्या यह लोकसभा चुनावों में सफल होगा? तमिलनाडु की राजनीति में अगले कुछ दिनों में काफी हलचल देखने को मिल सकती है.

सूत्रों का कहना है कि हासन लंबे समय से राजनीति में दिलचस्पी रखते हैं और 2018 में उन्होंने डीएमके और एआईएडीएमके के विकल्प के रूप में एमएनएम को एक वैकल्पिक पार्टी के रूप में शुरू किया था. हालांकि, वह एमएनएम के टॉर्चलाइट चिन्ह पर चुनाव लड़ने के लिए ज्यादा इच्छुक हैं, जिसे हाल ही में चुनाव आयोग ने मंजूरी दे दी है. हासन 2019 के लोकसभा चुनावों में कोयंबटूर (1.44 लाख वोट) और दक्षिण चेन्नई (1.35 लाख वोट) सीटों पर अपने पार्टी के प्रभावशाली प्रदर्शन के आधार पर डीएमके के साथ बातचीत में मदद पाने की उम्मीद कर रहे हैं. 

2022 में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान उन्होंने एक हिस्से में भाग लिया था. अब, कांग्रेस की स्थिति को देखते हुए, वह डीएमके को अपनी किस्मत को पुनर्जीवित करने के लिए सबसे बेहतर दांव के रूप में देख रहे हैं.