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जीत के लिए नहीं बल्कि अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रही है कांग्रेस, जानें क्यों राहुल की न्याय यात्रा भी होगी फ्लॉप?

Lok Sabha Elections 2024: लोकसभा चुनाव 2024 का चुनाव इस बार कई मायनों में रोमांचक है, क्योंकि भाजपा अपने तीसरे कार्यकाल के लिए पूरे जोश में है, वहीं कांग्रेस के सामने अपने अस्तित्व को बचाने की चुनौती है.

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Lok Sabha Elections 2024: लोकसभा चुनाव 2024 काफी रोमांचक होने वाला है. हालांकि 2019 का पिछले लोकसभा चुनाव भी काफी हद तक रोचक था, लेकिन इस बार कांग्रेस के लिए ये चुनाव जीतने के लिए बल्कि अपना अस्तित्व बचाने के लिए हैं. इसी को ध्यान में रखकर कांग्रेस चुनावी मैदान में उतर रही है. ये चुनाव कांग्रेस के 138 साल पुराने इतिहास का भविष्य भी तय करेगा. 

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2014 के बाद से कांग्रेस की राजनीतिक अपील में एक चिंताजनक कमी देखी गई है. कांग्रेस की प्रमुख चुनौती राष्ट्रीय राजनीति में बने रहना है. दशकों तक देश पर राज करने, 2004-14 के बीच अपनी प्रधानता में लौटने के बाद 2014 में 44 सीटों की संख्या और पांच साल बाद 52 सीटों की जीरो वृद्धि के साथ कांग्रेस के सिर पर अस्तित्व की तलवार लटकी हुई है. अब पार्टी को के सामने अपने राजनीतिक अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे से निपटने की चुनौती है. 

कांग्रेस ने अपने विरोधियों से मिलाया हाथ

आगे की चुनौती को महसूस करते हुए कांग्रेस चुनाव से पहले राष्ट्रीय गठबंधन (INDIA) पर सहमत हो गई. AAP और समाजवादी पार्टी को गले लगाकर समझौता किया. ये दोनों दल यूपीए-दो के बाद से दुश्मन रहे थे. 

तीन महीने पहले तक पार्टी की उम्मीदें काफी ऊंची थीं, जब मई 2023 में कर्नाटक में बीजेपी पर जीत हासिल की थी. इसी जीत को देखकर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद धी. अनुमान था कि दोनों हिंदी भाषी राज्यों में कांग्रेस फिर से अपना अच्छा प्रदर्शन दोहराएगी, लेकिन जीत के आंकड़ों ने होश फाख्ता कर दिए. दोनों ही राज्यों में हाल के बाद बेशक कांग्रेस को अपनी शक्ति हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगा.  

कांग्रेस के सामने एक नहीं कई चुनौतियां

इसके अलावा कांग्रेस के सामने और भी कई बड़ी चुनौतियां हैं. अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में न जाना, अस्ख्य मस्जिदों की खुदाई के लिए कोर्ट के आदेश और अब सीएए... ये सभी ऐसे मुद्दे हैं, जिन्होंने बहुसंख्यकवादी (हिंदुओ) की भावनाओं को भी प्रभावित किया है. हालांकि कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने बहुत पहले से ही लोकलुभावनवाद, किसानों, नौकरियों, पिछड़े वर्गों के मुद्दे और गरीब बनाम अमीर की तर्ज पर चलने की योजना बनाई है. हालांकि संसाधन की कमी के कारण भी विपक्ष प्रचार अभियान में बहुत पीछे है.

... तो संसद और जनता के बीच रहे एक पहचान

चुनावी बांड पर हालिया खुलासे और कांग्रेस की ओर से भाजपा शासन को जबरन वसूली रैकेट कहना, भाईचारे और बड़े भाई के रवैये जैसे अभियान को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है. पार्टी को पूरी उम्मीद है कि इससे लोगों के एक वर्ग का दिल जीतने में मदद मिलेगी. कांग्रेस के लिए यह संभवतः जीतने की नहीं, बल्कि लड़ने के लिए जीने की लड़ाई है. इसके लिए एक ऐसी संख्या की जरूरत होगी जो संसद और जनता में एक विपक्षी नेता के रूप में अपनी स्थिति को बरकरार रख सके.