NRI/OCI marriages Recommendation: बंद होगा शादी करने के बहाने फर्जीवाड़े का जाल, लॉ कमिशन ने तैयार किया ऐतिहासिक मसौदा
NRI/OCI marriages Recommendation: कानून आयोग की रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि कैसे जल्दबाजी में की गई शादियों और एनआरआई पति/साथी के दावों के सही सत्यापन के अभाव में महिलाएं परेशानियों का सामना करती हैं. विदेश में रहते हुए उन्हें तिरस्कार, घरेलू हिंसा और सामाजिक-पारिवारिक सहारे से दूर रहना पड़ता है.
NRI/OCI marriages Recommendation: भारतीय महिलाओं के लिए विदेशी शादी, खासकर प्रवासी भारतीय (एनआरआई) और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (ओसीआई) से होने वाली शादियां, अक्सर सुनहरे सपनों और कड़वी हकीकत के बीच झूलती रहती हैं. क्या होगा अगर शादी का सपना सजाने वाली दुल्हन को धोखा मिल जाए? जहां एक ओर इन रिश्तों में बेहतर जीवन की आस होती है, वहीं दूसरी ओर धोखाधड़ी, तिरस्कार और बेबसी का दंश भी छिपा होता है. इसी समस्या से निपटने के लिए कानून आयोग ने अपनी 287वीं रिपोर्ट में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है, जो भारतीय महिलाओं के लिए एक उम्मीद की रौशनी बनकर सामने आया है.
रिपोर्ट में सभी एनआरआई और ओसीआई शादियों को अनिवार्य रूप से रजिस्टर्ड करने की सिफारिश की गई है. यह सिफारिश उस जाल को कमजोर करती है, जिसका फायदा लेकर कई बार धोखेबाज अपना शिकार बनाते हैं. यह सिफारिश लंबे समय से चली आ रही उस समस्या का समाधान ढूंढने की दिशा में एक बड़ा कदम है जिसमें अक्सर महिलाएं एनआरआई या ओसीआई से शादी करती हैं, इस उम्मीद में कि उन्हें बेहतर जीवन मिलेगा लेकिन कई बार ये उम्मीदें टूट जाती हैं, उन्हें धोखा मिलता है और उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता है. ऐसे मामलों में कानूनी मदद लेना भी उनके लिए मुश्किल हो जाता है.
फर्जी शादियों के लिए साबित होगा ऐतिहासिक कदम
ऐसी शादियों में अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कराने से न सिर्फ विवाह वैलिड हो जाते हैं बल्कि महिलाओं को ठोस कानूनी आधार भी मिल जाता है. इसके अलावा नए रजिस्ट्रेशन प्रोसेस में जिला शादी अधिकारी को सूचना देना और उसे 30 दिनों तक सार्वजनिक करना शामिल है. ऐसे में यह नियम किसी भी गलत मंशा से की गई शादी और उसमें होने वाली धोखाधड़ी को सामने लाने का मौका देता है. यह प्रोसेस फर्जी शादियों को उजागर करने में कारगर साबित हो सकता है. हालांकि इससे बचाव के लिए सिर्फ रजिस्ट्रेशन ही काफी नहीं है.
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रिपोर्ट के अनुसार पासपोर्ट अधिनियम में बदलाव कर मैरिटल स्टेटस घोषित करना भी जरूरी कर दिया गया है. इससे ट्रांसपैरेंसी बढ़ेगी और झूठे दावों का पर्दाफाश होगा. साथ ही, गृह मंत्रालय या विदेश मंत्रालय के अंतर्गत एक केंद्रीय रजिस्ट्री बनाने का सुझाव दिया गया है, जो एनआरआई और ओसीआई शादियों का डेटा एकत्र करेगा. यह न केवल भविष्य में संभावित धोखाधड़ी को रोकने में मददगार होगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई को भी आसान बनाएगा.
समस्या से निपटने के लिए की गई ये सिफारिशें
- अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: सभी एनआरआई और ओसीआई शादियों को अनिवार्य रूप से रजिस्टर्ड कराना होगा. इससे शादी की वैधता सुनिश्चित होगी और महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मिलेगी.
- नया रजिस्ट्रेशन प्रोसेस: एनआरआई के साथ शादी रजिस्टर्ड करने के लिए एक नए प्रोसेस का सुझाव दिया गया है, जिसमें जिला शादी अधिकारी को सूचना देना और फिर उस सूचना को 30 दिनों तक पब्लिक करना शामिल है, ताकि कोई भी व्यक्ति आपत्ति दर्ज करा सके.
- पासपोर्ट अधिनियम में बदलाव: पासपोर्ट अधिनियम, 1967 में बदलाव कर पासपोर्ट में मैरिटल स्टेटस घोषित करना अनिवार्य बनाने की सिफारिश की गई है.
- केंद्रीय रजिस्ट्री: गृह मंत्रालय या विदेश मंत्रालय में एनआरआई और ओसीआई शादीों के लिए एक अलग रजिस्ट्री बनाने का सुझाव दिया गया है.
लागू करने के लिए संसद की मंजूरी का इंतजार
भले ही इन सिफारिशों को लागू करने के लिए अभी भी संसद की मंजूरी का इंतजार है. मगर कानून आयोग का यह कदम एक सही दिशा में उठाया गया कदम है. यह उम्मीद जगाता है कि आने वाले समय में भारतीय महिलाओं को विदेशी शादियों में मिलने वाले धोखे से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे. साथ ही, यह अन्य महिलाओं को भी सतर्क रहने और पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही जीवनसाथी चुनने के लिए प्रेरित करेगा.