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जानिए क्या है संविधान की छठी अनुसूची? जिसकी डिमांड कर रहे लद्दाखी

सोशल मीडिया पर लद्दाख में प्रदर्शन रैलियों के फोटो और वीडियो वायरल हो रहे हैं. सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर कर नारेबाजी और हाथों में तख्तियां लेकर जाते दिखाई दे रहे हैं.

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Naresh Chaudhary
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Sixth Schedule of Constitution:  लद्दाख के लेह जिले में बड़े पैमाने पर लोग रैलियां निकाल रहे हैं. इस दौरान लेह और कारगिल समेत पूरा लद्दाख बंद रखा गया. इन रैलियों और बंदी के पीछे स्थानीय लोगों की चार प्रमुख मांगे हैं. इनमें लद्दाख को राज्य का दर्जा, लद्दाख को आदिवासी दर्जा देते हुए संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना, स्थानीय लोगों के लिए नौकरी में आरक्षण और लेह व कारगिल के लिए एक-एक संसदीय सीट की मांग प्रमुख है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में बड़ी संख्या में लोग नारे लगाते और हाथों में तख्तियां लेकर चलते नजर आ रहे हैं. इस क्षेत्र में बंद का आह्वान लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) ने किया था, जिसने 23 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक ज्ञापन सौंपा था. इस ज्ञापन में लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत दर्जा देने की मांग की गई थी.

यहां के स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने लद्दाख को राज्य का दर्जा देने के लिए जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 में संशोधन के लिए एक विधेयक का मसौदा भी पेश किया था. यह तब हुआ है जब गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति लद्दाख के दो क्षेत्रों लेह और कारगिल का प्रतिनिधित्व करने वाले निकाय प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कर रही है. मंत्रालय ने 4 दिसंबर को अपनी आखिरी बैठक के दौरान दोनों निकायों से लिखित रूप में मांगों की एक सूची मांगी थी.

मिजोरम, त्रिपुरा, सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों का किया जिक्र

उधर, ज्ञापन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया फैसले में कहा है, जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल किया जा रहा है, लेकिन उन प्रावधानों को लद्दाख तक नहीं बढ़ाया जा रहा है, जो केंद्र शासित प्रदेश बना रहेगा. लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग में मिजोरम, त्रिपुरा, सिक्किम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों जैसे राज्यों का जिक्र किया गया है. बताया गया है कि ये राज्य भी भारत के संविधान की छठी अनुसूची और अनुच्छेद 371 के तहत संरक्षित हैं.

नौकरी के लिए लद्दाख लोक सेवा आयोग के गठन की भी मांग

छठी अनुसूची की मांग उठाते हुए ज्ञापन में बताया गया कि बाल्टी, बेडा, बोट, बोटो, ब्रोकपा, ड्रोकपा, दर्द, शिन, चांगपा, गर्रा, मोन और पुरीग्पा जैसे आदिवासी समुदाय लद्दाख में आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं. इसने लद्दाख लोक सेवा आयोग की भी मांग की गई है, जिसमें कहा गया कि लद्दाख के छात्रों के लिए राजपत्रित पदों के मौके सीमित हो गए हैं, क्योंकि वर्तमान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. 

ज्ञापन में जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 में संशोधन के लिए एक मसौदा विधेयक भी है, जिसमें क्षेत्र से दो सांसदों लेह और कारगिल से एक-एक का प्रावधान शामिल है. कहा गया है कि उन्हें उम्मीद है, सिक्किम जैसे राज्यों की तर्ज पर राज्य को भी राज्यसभा की एक सीट भी मिलेगी. 

लद्दाख के लोग क्यों कहते हैं, हमारी शक्तियां छिन गई हैं

न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के कानूनी सलाहकार हाजी गुलाम मुस्तफा ने बताया है कि जब से लद्दाख केंद्र शासित राज्य बना है, तभी से एपेक्स बॉडी और केडीए चार सूत्री मांग कर रही है. हमारी सभी शक्तियां जो जन-केंद्रित थीं, वो अब कमजोर हो गई हैं. जब हम जम्मू-कश्मीर का हिस्सा थे, तो हमारे पास विधानसभा में 4 और विधान परिषद में 2 सदस्य थे.

उन्होंने कहा कि अब विधानसभा में हमारा कोई प्रतिनिधित्व नहीं है. हमारी हमेशा से यही मांग रही है कि विधानसभा में लद्दाख के लोगों का प्रतिनिधित्व हो और हमें राज्य का दर्जा मिले. वजह ये है कि लद्दाख रणनीतिक तौर पर बेहद अहम जगह है. यह एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है. इसमें वे सभी विशेषताएं हैं जो उत्तर-पूर्वी राज्यों में हैं.

क्या कहती है संविधान की छठी अनुसूची, क्या-क्या हैं प्रावधान?

संविधान के अनुच्छेद 244(2) और अनुच्छेद 275 (1) के तहत छठी अनुसूची में विशेष प्रावधान हैं. इसका विषय असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम जैसे राज्यों के जनजाति इलाकों का एडमिनिस्ट्रेशन है. संविधान में इस अनुसूची को बारदलोई कमिटी की सिफारिशों के बाद स्थान दिया गया था.

छठी अनुसूची में जनजातीय इलाकों या क्षेत्रों में स्वतंत्र जिले बनाने का प्रोवीजन है. इसके बाद इन जिलों को अपनी विधायिका, न्यायिक और प्रशासनिक स्वतंत्रता मिलती है. वहीं राज्यपाल को अधिकार होता है कि वे इन जिलों का परिसीमन कर सकते हैं. साथ ही यदि किसी जिले में कई जनजातियां रहती हैं तो उन्हें अलग-अलग स्वतंत्र जिला बनाया जा सकता है. 

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First Published : 04 February 2024, 10:45 AM IST