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परिवार ने समलैंगिक बेटे का शव लेने से किया मना, जानें पार्टनर पहुंचा कोर्ट

केरल के समलैंगिक शख्स ने अपने पार्टनर के शव को प्राप्त करने की अनुमति के लिए केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. शख्स ने ऐसा तब किया जब उसके पार्टनर के परिवार ने इलाज में हुए खर्च का बिल देने से इनकार कर दिया और कोच्चि के प्राइवेट अस्पताल से शव लेने से इनकार कर दिया.

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Om Pratap
kerala Family refuses receive Gay son dead body

kerala Family refuses receive Gay son dead body: केरल के एक परिवार ने अपने समलैंगिक बेटे का शव लेने से इनकार कर दिया है. जानकारी के बाद समलैंगिक के पार्टनर ने अंतिम संस्कार के लिए डेडबॉडी की मांग की है और केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, समलैंगिक शख्स ने केरल हाई कोर्ट से अपने पार्टनर के शव पर दावा करने की अनुमति मांगी है. कोर्ट में शव के लिए दावा करने वाले शख्स ने कहा कि मेरे पार्टनर की लाश को उसके परिजन ने लेने से इनकार कर दिया. साथ ही कोच्चि अस्पताल के बिल का भुगतान भी नहीं किया. 

याचिकाकर्ता ने क्या बताया?

केरल हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले जेबिन ने बताया कि वो कोच्चि में अपने साथी मनु के साथ रह रहा था. 2 फरवरी को मनु अपने घर की छत से गिर गया और बाद में उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया.

दो दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहने के बाद, 4 फरवरी की रात को मनु का निधन हो गया. मनु का शरीर दो दिनों तक लावारिस हालत में पड़ा रहा, क्योंकि उसके परिवार ने शव को लेने से इनकार कर दिया. इसके बाद उन्होंने शव के अंतिम संस्कार के लिए दावा किया तो इसकी इजाजत नहीं दी गई. 

इसके बाद जेबिन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपने पार्टनर के शव पर दावा कर अंतिम संस्कार के लिए अनुमति मांगी है. जेबिन की याचिका की तुरंत हाई कोर्ट ने समीक्षा की और निजी अस्पताल को ईमेल के जरिए नोटिस भेजा. जेबिन का प्रतिनिधित्व करने वाली केरल की पहली ट्रांसजेंडर वकील पद्मा लक्ष्मी ने कहा कि ये मामला समलैंगिक व्यक्ति के अधिकारों से संबंधित है और मनु के शरीर को हर हाल में अंतिम संस्कार प्राप्त करने का अधिकार है.