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कर्नाटक के किसान का कमाल, अपने बोरवेल से पानी निकालकर सूखी नदी को कर दिया लबालब

Karnataka News: सूखे की मार झेल रहे कर्नाटक के एक किसान ने कमाल कर दिया है. किसान ने अपने पास के सूखे नदी को पानी से लबालब कर दिया. लोग किसान के इस काम की जमकर तारीफ कर रहे हैं.

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India Daily Live

Karnataka News: कर्नाटक के हावेरी के रहने वाले एक किसान ने ऐसा काम किया है, जिससे उनकी जमकर तारीफ हो रही है. 50 साल के भुवनेश्वर शिदलापुर नाम के किसान ने निस्वार्थ भाव दिखाते हुए अपने बोरवेल से पानी निकालकर पास के वरदा नदी को लबालब कर दिया. किसान की ओर से पानी छोड़े जाने के बाद इलाके के पक्षियों और जानवरों को काफी मदद मिली है.

सूखाग्रस्त कर्नाटक के हावेरी जिले के संगुरु गांव के 50 फीसदी बोरवेल सूख गए हैं. कई नदियों में पानी नहीं है. ऐसे में 50 साल के भुवनेश्वर ने वो कर दिखाया, जिसकी लोग कल्पना भी नहीं कर सकते. भुवनेश्वर के पास 30 एकड़ ज़मीन है, जिसमें वे गन्ना, मक्का, सुपारी और सब्जियों की खेती करते हैं. उनके पास 3 बोरवेल हैं. इनमें से 2 का यूज फसलों के लिए, जबकि एक का यूज पशुओं और पक्षियों के लिए करते हैं.

वरदा नदी बुझाती है हजारों लोगों की प्यास

सदियों से, तुंगभद्रा की सहायक वरदा नदी हावेरी जिले में पानी का प्राथमिक स्रोत रही है. इस साल कर्नाटक में भीषण सूखे के कारण कई नदियां, झरने और नाले सूख गए, इसलिए भुवनेश्‍वर ने सूखे से जूझ रहे पशु-पक्षियों की मदद का बेड़ा उठाया. पिछले 25 वर्षों में, भुवनेश्वर ने हावेरी में इतना भीषण सूखा कभी नहीं देखा. उनका खेत नदी से लगा हुआ है.

ये देखते हुए कि पशुओं, पक्षी और अन्य जानवर पानी के लिए संघर्ष कर रहे थे, उन्होंने उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने बोरवेल से नदी में पानी छोड़ने का फैसला किया. बोरवेल का पानी आंशिक रूप से नदी में भरने से बड़ी संख्या में पक्षी और जानवर वहां आते हैं.

जनवरी की शुरुआत से ही करना पड़ा सूखे का सामना

भुवनेश्वर ने कहा कि राज्य को इस साल कम बारिश का सामना करना पड़ा है और 3 से 4 जिलों में पारा पहले ही 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है. जनवरी की शुरुआत में हावेरी जिले में अधिकांश पानी के सोर्स सूख गए थे. किसान ने कहा कि सूखे के बावजूद मेरे पास खेती के लिए बोरवेल में पर्याप्त पानी है.

किसान ने स्थानीय उपायुक्त (डिप्टी कलेक्टर) से बिजली आपूर्ति प्रतिदिन छह घंटे से बढ़ाकर 24 घंटे करने का अनुरोध किया है ताकि वे चौबीसों घंटे पशु-पक्षियों के लिए बोरवेल चालू कर सकें. एक ग्रामीण रमन्ना का कहना है कि भुवनेश्वर बिना किसी उम्मीद के नदी में पानी छोड़ कर लोगों की सेवा कर रहे हैं. नदी में उनके द्वारा पानी के छोड़े जाने से पशुओं और पक्षियों की मदद की है.

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