ISRO Warning On Hiamalayan Region Glaciers: बर्फ से ढके होने के कारण हिमालय क्षेत्र को तीसरा ध्रुव कहा जाता है लेकिन अब इसे नजर लग गई है. चरम मौसमी दशाओं और जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फीले हिमालय का पारिस्थितिक तंत्र ढहता जा रहा है. भारतीय अनुसंधान संगठन इसरो ने सोमवार को इससे जुड़ी एक वॉर्निंग जारी की है. इसरो ने कहा कि वर्षों की सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि हिमालय क्षेत्र के ग्लेशियर बेहद तेजी से फैल रहे हैं जिस कारण बहुतायत में हिमनद झीलों का निर्माण हो रहा है.
दुनिया भर में किए गए शोधों से पता चला है कि 18वीं शताब्दी कीऔद्योगिक क्रांति की शुरुआत के बाद से दुनिया भर में ग्लेशियरों के पीछे हटने और पतले होने की दर में भारी वृद्धि हुई है. इस घटना के कारण हिमालय क्षेत्र में नई झीलों का निर्माण हुआ है. ग्लेशियर से पिघल कर बनने वाली जलराशि को हिमनदी के रूप में जाना जाता है. ये हिमनद हिमालय क्षेत्र में बहने वाली नदियों के मीठे पानी का प्रमुख स्रोत होते हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे ग्लेशियर तेजी से पिघलते हैं वैसे ही बड़े आकार वाली झीलें बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय परिवर्तनों का संकेत देती हैं. हिमनद झील के फटने से बाढ़ का खतरा भी बढ़ जाता है जिससे मैदानी इलाकों और पर्वतीय समुदायों में बाढ़ आने का खतरा बना रहता है.
इसरो ने सोमवार को अपने बयान में कहा कि हमनें अपने अध्ययन में साल 1984 से लेकर 2023 तक सैटेलाइट डेटा का यूज किया है. इस स्टडी में पता चला है कि 2016-17 में यहां 2431 हिमनद थे जिनमें 676 हिमनद में व्यापक विस्तार हुआ है. इसमें भारत के भीतर ही 130 झीलें शामिल हैं. 601 झीलों का आकार दोगुने से भी ज्यादा हो गया है.