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ISRO की दूरबीन ने किया कमाल, 8 साल में  600 से अधिक गामा-किरण विस्फोट किए रिकॉर्ड, 5 साल का था जीवनकाल   

ISRO Telescope Astrosat:एस्ट्रोसैट दूरबीन की एक बड़ी कामयाबी बताई जा रही है. गामा रे किरणें अत्यधिक ऊर्जा वाली किरणें होती हैं. ऐसा कहा जाता है कि सूर्य  सूर्य अपने पूरे जीवनकाल में जितनी ऊर्जा पैदा करेगा, उतनी गामा रे विस्फोट  एक सेकंड में पैदा कर सकती हैं. 

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Gyanendra Tiwari
isro telescope Astrosat

हाइलाइट्स

  • इसरो की दूरबीन ने रिकॉर्ड की 600 से अधिक गामा रे विस्फोट
  • 5 साल थी दूरबीन की लाइफ, 8 साल से कर रही है काम

ISRO Telescope Astrosat: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो की दूरबीन ने कमाल कर दिया है. दरअसल,  एस्ट्रोसैट स्पेस टेलीस्कोप ने 600 से ज्यादा गामा-रे बर्स्ट (GRB) को रिकॉर्ड किया है. यह एस्ट्रोसैट दूरबीन की एक बड़ी कामयाबी बताई जा रही है. गामा रे किरणें अत्यधिक ऊर्जा वाली किरणें होती हैं. ऐसा कहा जाता है कि सूर्य अपने पूरे जीवनकाल में जितनी ऊर्जा पैदा करेगा, उतनी गामा रे विस्फोट एक सेकंड में पैदा कर सकती हैं. 

तारों की मौत या फिर न्यूट्रॉन तारों के विलय से होती है ये घटना

गामा किरणें विस्फोट का मतलब है कि किसी विशाल स्टार की डेथ या फिर न्यूट्रॉन तारों का विलय हुआ होगा. गामा रे विस्फोट की 600 से ज्यादा घटनाओं  को रिकॉर्ड कर का पता लगाकर इसरो की इस दूरबीन ने कमाल कर दिया है.  एस्ट्रोसैट स्पेस टेलीस्कोप के जीवनकाल का यह एक बड़ा प्रदर्शन है. इस दूरबीन को 5 साल के लिए बनाया गया था लेकिन बीते 8 सालों से ये जस का तस काम कर रही है.


इसरो ने एस्ट्रोसैट दूरबीन को साल 2015 में लॉन्च किया था. इस टेलिस्कोप की लाइफ 5 साल थी. क्योंकि इसे सिर्फ पांच साल तक के हिसाब से ही डिजाइन किया गया था. 8 साल बाद भी यह टेलिस्कोप वर्किंग कंडीशन में है. इसलिए इसे एक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है. 

गामा रे विस्फोट यानी मिनी बिग-बैंग

गामा रे विस्फोट यानी ब्रह्मांड में होने वाला सबसे ऊर्जावान विस्फोट 8 साल में 600 विस्फोट रिकॉर्ड कर अपने आप में किसी उपलब्धि से कम नहीं है. गामा रे विस्फोट को मिनी बिग-बैंग कहा जाता है.  ब्रह्मांड के निर्माण के पीछे बिग बैंग थ्योरी का उदाहरण दिया जाता है. इसका मतलब यह हुआ कि जब भी कोई गामा रे का विस्फोट होता है तो समझ लीजिए एक छोटे ब्रह्मांड का निर्माण हो रहा है. 

एस्ट्रोसैट दूरबीन के सीजेडटीआई डिटेक्टर ने 600वें गामा रे विस्फोट का पता बीते 22 नवंबर को लगाया था. इस घटना की जानकारी बारे में विश्व के अनेकों खगोलवादियों से साझा किया गया ताकि वो इसे अपने शोध में इस्तेमाल कर सकें. 

 'दक्ष को बनाने का प्रस्ताव

एस्ट्रोसैट को लेकर IIT बॉम्बे के एसोसिएट प्रोफेसर वरुण भालेराव ने कहा है, एस्ट्रोसैट ने जो उपलब्धि हासिल की उस पर देश को नाज है. ये और भी इसी तरह सफलता की नई उपलब्धियां हासिल करता रहे इसके लिए कई संस्थान एक साथ  मिलकर काम करेंगे. नेक्स्ट जेनरेशन GRB स्पेस टेलीस्कोप 'दक्ष' को बनाने के लिए प्रस्ताव रखा गया है. यह दूरबीन सैटेलाइट से कहीं अधिक बेहतर होगा. उन्होंने कहा कि एस्ट्रोसैट ने बीते 8 साल में क्या काम किया उसे पता करने के लिए 1 साल का समय लगा.