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Supreme Court: क्या डिप्टी सीएम का पद असंवैधानिक है? सुप्रीम कोर्ट ने किया साफ

Supreme court: सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी. इसमें कहा गया था कि संविधान में कोई प्रविधान नहीं होने के बावजूद विभिन्न राज्य सरकारों ने उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति की है.

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India Daily Live
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Supreme court: सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों में डिप्टी सीएम की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका का खारिज कर दिया है. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षा वाली बेंच ने कहा कि यह पद संविधान में तो नहीं है, लेकिन इससे किसी नियम का उल्लंघन नहीं होता है. शीर्ष अदालत ने कहा कि डिप्टी सीएम का पद देकर सत्ताधारी दल या फिर गठबंधन में वरिष्ठ नेताओं को थोड़ा अधिक महत्व देने की प्रक्रिया का पालन किया जाता है.

सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि उपमुख्यमंत्री संविधान के तहत सिर्फ सीएम की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद के सदस्य हैं और इससे ज्यादा कुछ नहीं.  उपमुख्यमंत्री की नियुक्ति संविधान के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं करती है. कई राज्यों में उपमुख्यमंत्री पद देने की परंपरा चली आ रही है. इसलिए ये असंवैधानिक नहीं है.  

जनहित याचिका में कहा गया था कि संविधान में कोई प्रविधान नहीं होने के बावजूद विभिन्न राज्य सरकारों ने उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति की है. संविधान के अनुच्छेद 164 में केवल मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति का प्रविधान है. देशभर के 14 राज्यों में इस वक्त 26 डिप्टी सीएम है. वकील मोहनलाल शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि डिप्टी सीएम की नियुक्ति का राज्य के नागरिकों से कोई लेनादेना नहीं है. न ही कथित उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति होने पर राज्य की जनता का को ई अतिरिक्त कल्याण होता है.

 

First Published : 13 February 2024, 09:10 AM IST