मध्यप्रदेश में गड़बड़ियों का जाल, गरीबों के सपने हुए चूर? CAG ने किया पीएम आवास योजना को लेकर बड़ा खुलासा 

CAG Exposes Irregularities In PM Awas Yojna: CAG रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण (PMAY-G) को अमली जामा पहनाने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आई है. जानकारी के अनुसार  राज्य सरकार ने 15 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता 1,500 से अधिक अयोग्य लाभार्थियों को दे दी. 

India Daily Live

CAG Exposes Irregularities In PM Awas Yojna: केंद्रीय नियंत्रक और लेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण (PMAY-G) को अमली जामा पहनाने की प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा किया है. इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार ने 15 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता 1,500 से अधिक अयोग्य लाभार्थियों को दे दी. इतना ही नहीं, 8,000 से अधिक ऐसे लाभार्थियों को प्रायोरिटी दी गई जिन्हें इसकी जरूरत कम थी, जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति समुदायों के हकदार लोगों को दरकिनार कर दिया गया.

26 लाख घरों के लिए मिले थे 24,723 करोड़

2016 में गरीबी उन्मूलन के उद्देश्य से शुरू की गई पीएम आवास योजना का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले वंचित परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराना था. 2022 तक यह लक्ष्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था. CAG रिपोर्ट 2016-21 के आंकड़ों पर आधारित है, जिस दौरान 26 लाख से अधिक घरों को मंजूरी दी गई और लाभार्थियों को 24,723 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. रिपोर्ट में बताया गया है कि एलॉटेड घरों में से 82% से अधिक बनकर तैयार हो चुके हैं.

हालांकि, योजना के नियमों के अनुसार जिन परिवारों के पास वाहन या मछली पकड़ने वाली नाव है उन्हें इसमें शामिल नहीं किया जा सकता लेकिन रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि 10 जिलों में 2,000 से अधिक ऐसे लाभार्थियों को घर अलॉट कर दिए गए जिनके पास पहले से ही वाहन थे. इतना ही नहीं, इनमें से 1,500 से अधिक अयोग्य लाभार्थियों को 15.66 करोड़ रुपये की सहायता भी जारी कर दी गई.


एक ही आदमी के नाम पर 2 घर एलॉट 

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कई मामलों में एक ही व्यक्ति को दो बार घर एलॉट कर दिया गया. कुछ मामलों में तो घर पाने वाले व्यक्ति के परिवार के सदस्यों को भी योजना का लाभ दे दिया गया, जो पात्र नहीं थे. रिपोर्ट में इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया गया है कि पात्र लाभार्थियों की पहचान करने में लापरवाही बरती गई, जिसका फायदा उठाकर अयोग्य लोग योजना का लाभ उड़ाने में सफल रहे.

SC/ST आवेदकों को नहीं मिल रही प्रायोरिटी 

योजना के दिशानिर्देशों के मुताबिक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदायों को प्रायोरिटी दी जानी चाहिए लेकिन सीएजी की जांच में पाया गया कि 60 ग्राम पंचायतों में 8,000 से अधिक ऐसे लाभार्थियों को घर एलॉट कर दिए गए जिन्हें इसकी कम जरूरत थी, जबकि जरूरतमंद आदिवासी और दलित परिवारों को दरकिनार कर दिया गया.

किस्तें जारी करने में भी गड़बड़ी

इसके अलावा, रिपोर्ट में लाभार्थियों को समय पर किस्तें जारी करने में भी गड़बड़ी पाई गईं, जिसका असर निर्माण कार्यों में देरी के रूप में सामने आया. गौरतलब है कि योजना के तहत निर्माण की विभिन्न अवस्थाओं के आधार पर लाभार्थियों को चार किस्तों में सहायता राशि दी जाती है. लेकिन रिपोर्ट में बताया गया है कि 53% से अधिक लाभार्थियों को पहली किस्त में ही देरी हुई, जो एक दिन से लेकर चार साल तक लंबी थी. वहीं, 14% लाभार्थियों को तो कोई राशि ही नहीं दी गई, जबकि केवल 33% को ही समय पर सारी किस्तें मिलीं.

नाबालिगों के नाम पर भी घर एलॉट

सीएजी रिपोर्ट में नाबालिगों के नाम पर भी घर एलॉट किए जाने और उनके रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने जैसे मामले भी सामने आए हैं, जिनके नाम योजना की सूची में शामिल नहीं थे. इसके अलावा, लाभार्थियों के नाम दर्ज न होने के बावजूद कई मामलों में धनराशि जारी कर दी गई, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि योजना के अमली जामा और निगरानी में गंभीर खामियां बताती हैं.

CAG रिपोर्ट में उजागर हुई गड़बड़ियों का गरीबों के सपनों पर गहरा प्रभाव पड़ा है. जिन लोगों को योजना का लाभ मिलना चाहिए था, वे वंचित रह गए हैं, जबकि अयोग्य लोगों ने इसका अनुचित लाभ उठाया है.

1. गरीबों के लिए आवास की कमी: योजना में गड़बड़ियों के कारण गरीबों को पक्के मकान नहीं मिल पाए हैं. वे आज भी जर्जर और खतरनाक घरों में रहने को मजबूर हैं. उदाहरण के लिए, मध्य प्रदेश के एक गांव में, एक गरीब परिवार कई सालों से एक मिट्टी के घर में रह रहा था. PMAY-G के तहत उन्हें पक्के मकान के लिए आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था. उन्होंने सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया और उन्हें मकान के लिए मंजूरी भी मिल गई. लेकिन, कुछ महीनों बाद, उन्हें पता चला कि उनके नाम पर किसी अन्य व्यक्ति को घर एलॉट कर दिया गया है. 

2. भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों का माहौल: योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों ने लोगों का विश्वास कम कर दिया है. वे अब योजना में भाग लेने के लिए उत्सुक नहीं हैं, जिससे योजना का उद्देश्य ही अधूरा रह जाता है. उदाहरण के लिए, एक अन्य गांव में, कुछ ग्राम पंचायत सदस्यों ने योजना का लाभ उठाने के लिए अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के नाम पर फर्जी आवेदन जमा किए. 

3. गरीबों के सपनों पर चोट: योजना में गड़बड़ियों ने गरीबों के सपनों को तोड़ दिया है. जिन लोगों ने अपना खुद का पक्का मकान बनाने का सपना देखा था, वे अब निराश और हताश हैं.

4. सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही: यह रिपोर्ट सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही पर भी सवाल उठाती है. योजना को अमली जामा पहनाने में हुई लापरवाही और भ्रष्टाचार को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं.

  • जवाबदेही तय होनी चाहिए:  जिन अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण यह सब हुआ, उन पर जवाबदेही तय होनी चाहिए. उन पर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
  • योजना में सुधार की आवश्यकता: योजना में व्याप्त खामियों को दूर करने के लिए सुधार की आवश्यकता है. योजना की अमली जामा प्रणाली को मजबूत और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए.
  • गरीबों को लाभ पहुंचाना: यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि योजना का लाभ वास्तव में गरीबों तक पहुंचे. इसके लिए योजना में पात्रता मानदंडों को कड़ाई से लागू किया जाना चाहिए.