भारत को लग सकता है बड़ा झटका! सऊदी में इस देश में लगातार गिर रहा है निर्यात, जान लें कारण
सरकार के वरिष्ठ अधिकारी की ओर से कहा गया है कि करीब डेढ़ साल पहले उम्मीद थी कि अमेरिका ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटा लेगा और कोई महत्वपूर्व समझौता करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
नई दिल्लीः आने वाले दिनों में भारत के निर्यात क्षेत्र को झटका लग सकता है. इस्लामिक देश ईरान के लिए भारत से होने वाले निर्यात में कमी देखी जा रही है. हालांकि इसके लिए कई वैश्विक मुद्दे जिम्मेदार हैं, लेकिन पश्चिमी एशिया की अर्थव्यवस्था में भारतीय रुपये की गिरती स्थिति को देखते हुए ये चिंता का विषय है. जानकारों का मानना है कि वर्तमान में चल रहे इजराइल-हमास युद्ध और रूस-यूक्रेन युद्ध इसके प्रमुख कारण हैं.
ईरान जाने वाला शिपमेंट में करीब 44 फीसदी की कमी
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के लिए भारत की ओर से होने वाले निर्यात में कमी दर्ज की गई है. जनवरी से अक्टूबर 2023 के बीच ईरान जाने वाला शिपमेंट में करीब 44 फीसदी की कमी देखी गई है. यानी निर्यात अब घटकर 88.8 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है. बताया जाता है कि भारत से बासमती चावल, हाई क्वालिटी चाय, चीनी, ताजे फलों के साथ बोनलैस मांस भेजा जाता है, जिसमें कमी आई है.
भारत से प्रीमियम क्वालिटी का बासमती चावल जाता है ईरान
भारत से अच्छी गुणवत्ता वाला बासमती चावल काफी मात्रा में ईरान भेजा जाता है. दावा किया जाता है कि भारत का करीब 62 प्रतिशत चावल अकेले ईरान के लिए जाता है. फाइनेंशियल ईयर 2023 के अनुसार, इरान को भारत से बासमती चावल का 5वां हिस्सा भेजा जाता था.
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रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका की ओर से मध्य पूर्व के कुछ देशों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भारत ने ईरान से क्रूड ऑयल खरीदना बंद कर दिया था. इसके कारण ईरान के मुद्रा भंडारण में कमी आई है. लिहाजा अब भारत को ईरान के साथ खुले तौर पर व्यापार करने में दिक्कत आ रही हैं.
भारत के अधिकारियों ने कही ये बात
इसी बीच फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) के महानिदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजय सहाय ने कहा है कि भारत को इस्लामिक देश ईरान के साथ दवाइओं और कृषि उत्पादों का व्यापार करने में कोई प्रतिबंध नहीं है.
ऐसे में देखना होगा कि हम अपने उत्पादों को कैसे वहां के लिए निर्यात कर सकते हैं. उधर एक मीडिया रिपोर्ट में सरकार के वरिष्ठ अधिकारी की ओर से कहा गया है कि करीब डेढ़ साल पहले उम्मीद थी कि अमेरिका ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटा लेगा और कोई महत्वपूर्व समझौता करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.