India on Islamophobia In UNGA: हिंदू विरोधी, गुरुद्वारा हमले.. संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस्लामोफोबिया पर क्या है भारत का रूख?
India on Islamophobia In UNGA: इस्लामोफोबिया से निपटने के लिए शुक्रवार को UNGA में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान UN चीफ ने कहा कि इस्लामोफोबिया के प्रसार के लिए सोशल मीडिया का दुरुपयोग किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म नफरती विचारधाराओं की उत्पत्ति स्थल बन गए हैं. आज के समय में मुस्लिम विरोधी कट्टरता को खत्म करना हम सभी की जिम्मेदारी है.
India on Islamophobia In UNGA: संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने इस्लामोफोबिया पर अपना रूख स्पष्ट किया है. उन्होंने कहा कि भारत में जहां कई धर्मों, भाषाओं वाले लोग रहते हैं, इसलिए हम सभी धर्मों और सभी धर्मों की आस्थाओं के समान संरक्षण और प्रचार के सिद्धांत को मजबूती से कायम रखते हैं. इस्लामोफोबिया पर उन्होंने कहा कि ये ये स्वीकार करना काफी महत्वपूर्ण है कि धार्मिक कट्टरता इब्राहिम धर्मों के आगे भी फैला हुआ है.
कांबोज ने कहा कि कई वर्षों से हो रहे कृत्यों से पता चलता है कि गैर-इब्राहिम धर्मों के लोग भी धार्मिक कट्टरता से प्रभावित हुए हैं. इसमें विशेष रूप से हिंदू, बौद्ध और सिख प्रभावित हुए हैं, क्योंकि गुरुद्वारों, मठों और मंदिरों जैसे धार्मिक स्थानों पर हमले हुए हैं. दरअसल, UNGA में इस्लामोफोबिया से निपटने के लिए शुक्रवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. इस दौरान संयुक्त राष्ट्र के चीफ एंटोनियो गुटेरस ने कहा कि दुनिया भर में हम मुस्लिम विरोधी नफरत और कट्टरता की बढ़ती लहर देख रहे हैं.
गुटेरस ने कहा कि नफरत और कट्टरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. उन्होंने ये भी कहा कि मुस्लिम विरोधी कट्टरता यानी इस्लामोफोबिया को खत्म करना सभी की जिम्मेदारी भी है. उन्होंने दुनिया के सभी देशों की सरकारों से अपने यहां भड़काने वाले भाषणों पर लगाम लगाने और इसकी निंदा करने की अपील की.
भारत का इस्लामोफोबिया पर क्या रहा रूख?
भारत की ओऱ से इब्राहिम धर्मों से अलग धार्मिक भय को पहचानने की आवश्यकता पर जोर दिया गया. भारत ने शुक्रवार को यहूदी-विरोधी, क्रिस्चियनोफोबिया या इस्लामोफोबिया से प्रेरित सभी कृत्यों की निंदा की. साथ ही हिंदुओं, बौद्धों और सिखों को प्रभावित करने वाले फोबिया को स्वीकार करने की आवश्यकता पर भी बल दिया. दरअसल, शुक्रवार को UNGA ने इस्लामोफोबिया से निपटने के लिए मुस्लिम विरोधी नफरत को पीछे धकेलने के लिए एक प्रस्ताव अपनाया. नए प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र महासचिव से इस्लामोफोबिया से निपटने के लिए एक विशेष दूत नियुक्त करने का अनुरोध किया है.
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि विभाजनकारी बयानबाजी और गलत बयानी समुदायों को कलंकित कर रही है और सभी को असहिष्णुता, रूढ़िवादिता और पूर्वाग्रह से लड़ने के लिए एकजुट होना चाहिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल प्लेटफार्मों को हेट कंटेंट को नियंत्रित करना चाहिए. उन्होंने कहा, संस्थागत भेदभाव और अन्य बाधाएं मुसलमानों के मानवाधिकारों और गरिमा का उल्लंघन कर रही हैं और यह परेशान करने वाली प्रवृत्ति धार्मिक समूहों और कमजोर आबादी के खिलाफ हमलों के व्यापक पैटर्न का हिस्सा है, जिसमें यहूदी लोग, अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय और अन्य भी शामिल हैं.